हमास के लीडर्स को शरण देने वाला कतर कैसे बना मिडिल ईस्ट का 'पॉवर सेंटर' ?

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मिडिल ईस्ट का देश कतर इन दिनों काफी चर्चा में है, जिसकी दो वजह हैं- पहली, इजराइल-हमास के बीच चल रही जंग में हमास का समर्थन देना और दूसरी कतर ने जासूसी करने के आरोप में 8 भारतीय पूर्व नेवी अफसरों को मौत की सजा सुनाई है। कतर आज जिस मजबूती से इस तरह के फैसले ले रहा है। उसे खुद ये मजबूती पाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। क्योंकि एक दौर था जब कतर खुद भी गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। कतर के गुलामी से निकलने और दुनिया के अमीर देशों में शामिल होने का सफर शब्दों में पिरोकर कह देने वाली कहानी के जैसा आसान नहीं रहा है। एक समय ऐसा भी था जब इसे मिडिल ईस्ट का कंगाल और गुलाम देश कहा जाता था, वजह थी टर्की और ब्रिटेन की गुलामी। लेकिन साल 1950 में वक्त ने कुछ यूं करवट ली कि ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स 2023 की रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र ने कतर को दुनिया की बेहतर और विकसित अर्थव्यवस्था माना है, जहां देश के प्रति व्यक्ति की आय 51 लाख रुपए से ज्यादा है।

कतर का इतिहास

भले ही आज कतर अपनी नेशनल एयरलाइन कतर एयरवेज के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता है, लेकिन अगर कतर के इतिहास में झांके तो नजर आता है  कि तब इसकी पहचान हवा में उड़ने वाली इन फ्लाइट्स से नहीं थी, बल्कि समंदर से थी। ये वो दौर था जब कतर के निवासी समंदर के किनारे ही रहा करते थे, क्योंकि यही समंदर बाकी दुनिया से जुड़े रहने और व्यापार करने का जरिया भी था। ज़िंदगी के गुजर बसर के लिए इसी समंदर किनारे फिशिंग और मोती निकालने से जुड़े काम भी किया करते थे।
साल 1850 में एक देश के तौर पर वजूद में आए कतर पर कई अलग-अलग अरब जनजातियों का कब्जा रहा, इन्होंने ही देश से लगे समंदर में मोती तलाशे और ये यहां का प्रमुख कारोबार बना। अंग्रेजों ने 1968 में मोहम्मद इब्न थानी और खुद के बीच एक संधि में अल-थानी के शासन के तहत बहरीन से कतर की स्वतंत्रता को मान्यता दी। जिसके बाद वहां की सत्ता अल-थानी ने संभाली और पीढ़ियां दर पीढ़ियां यहां खानदान के वारिस को सत्ता मिलती रही, पर जो नहीं बदला वो था कतर की गुलामी का संघर्ष... क्योंकि कतर पहले तुर्की और फिर बाद में ब्रिटेन का गुलाम बना रहा। ये वो दौर था जब कतर में हर तरफ रेत ही रेत नजर आती थी। तीन ओर से समुद्र और एक तरफ सऊदी अरब से घिरे कतर का मेन बिजनेस मूंगे का व्यापार था।
साल 1971 में आजादी मिलने दो दशक पहले ही कतर में बदलाव की शुरूआत हो चुकी थी, क्योंकि साल 1950 के आस-पास कतर में कई जगह तेल और गैस के भंडार की खोजे जा चुके थे, जिसके चलते प्रवासी और निवेशक पहुंचने लगे और यहीं से कतर की किस्मत बदलने का सिलसिला शुरू हुआ। अगर आबादी की बात करें तो साल 1950 में कतर की आबादी करीब 25 हजार थी जो 70 के दशक तक 1 लाख पहुंच गई और फिर अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद कतर एक आजाद इस्लामिक मुल्क बना और वर्ल्ड बैंक की मानें तो, देश की आबादी करीब 30 लाख है और यहां सबसे बड़ा धर्म इस्लाम है। देश में 65 फीसदी के आसपास मुस्लिम आबादी है। इसके बाद नंबर आता है हिंदू और ईसाई धर्मों के लोगों का जिनकी आबादी करीब 15 और 14 फीसदी के आसपास है, देश की 88 प्रतिशत आबादी 100 से ज्यादा देशों से आए लोगों की हैं, जो कतर में काम करते हैं। इन्हीं लोगों ने मिलकर कतर को एक चमकता सोना बना दिया है।

दोहा 4 दशक पहले तक था एक छोटा सा कस्बा

आज कतर का एक अलग रूप दिखाई देता है। राजधानी दोहा 4 दशक पहले तक एक छोटा सा कस्बा हुआ करती थी। लेकिन आज मुल्क की तरक्की का आलम ये है कि यहां लोगों की सैलरी भी टैक्स फ्री है। कतर में बदलाव बेहद तेजी से हुआ है, गैस और तेल इस देश की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा हिस्सा है। देश की कमाई हुई तो यहां तरक्की की कहानियां भी लिखी गईं।
कतर कभी अपने तेल के लिए प्रसिद्ध रहा है लेकिन अब गैस अर्थव्यवस्था की धड़कन बन चुकी है। कतर के पास दुनिया की प्राकृतिक गैस का करीब 14 प्रतिशत हिस्सा है और ये दुनिया का सबसे बड़े गैस फील्ड को ईरान के साथ साझा करता है। करीब 11,437 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला कतर सबसे छोटे अरब देशों में से एक है। इसकी सिर्फ एक भूमि सीमा है जो सउदी अरब से मिलती है लेकिन ये खुली हुई नहीं है। अरबी यहां की राष्ट्रीय भाषा है, हालांकि व्यापारिक कामों में आम तौर से अंग्रेजी बोली जाती है। क़तर में 100 से ज्यादा देशों के लोग रहते हैं और इसी वजह से दोहा की सड़कों और इसके मॉल में कई भाषाएं सुनने को मिलती हैं। प्रशासनिक रूप से, क़तर में 8 म्युनिसिपैलिटीज हैं, अल शमल, अल खोर, अल शाहनिया, उम्म सलाल, अल दायेन, अद दावह (दोहा), अल रेयान और अल वकराह।
179.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर की जीडीपी के साथ कतर की अर्थव्यवस्था दुनिया की 54वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसकी अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल और गैस पर आधारित है। सरकारी राजस्व में तेल से हुई आमदनी का हिस्सा 70 प्रतिशत से अधिक है। इस्तेमाल की जाने वाली मुद्रा कतरी रियाल (क्यूआर) है, जिसे 100 दिरहम में बांटा गया है। कतर में पर कैपिटा इनकम $62,088 है। ऐसे कतरी नागरिक जो तेल, गैस, या फाइनेंस से जुड़े सेक्टर में काम करते हैं उन पर तो पैसों की बरसात होती है लेकिन कंस्ट्रक्शन में काम करने वाले श्रमिक थोड़ी कमाई ही कर पाते हैं।
कतर भले ही तेजी से modernization कर रहा हो, लेकिन समाज रूढ़िवादी बना हुआ है। एक नियम है कि क़तर में रहने वाले प्रवासियों को स्थानीय परंपराओं का सम्मान करना चाहिए और परंपराओं के हिसाब से कपड़े पहनने चाहिए। इन सबसे ऊपर, उन्हें इस्लामी आस्था का सम्मान करना चाहिए। ये जानना भी इंपोर्टेंट है कि देश में शाही परिवार की आलोचना वर्जित है। तो आप कभी कतर जाएं तो ये बाते जरूर याद रखें।

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