विश्व का सबसे पुराना लोकतंत्र America कैसे चुनता है अपना President ?

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विश्व का सबसे पुराना लोकतंत्र America कैसे चुनता है अपना President ?
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अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से पहले उम्मीदवारों के बीच बहस होती है. इस बार प्रेसिडेंट जो बाइडेन के सामने डोनाल्ड ट्रंप थे. राष्ट्रपति जो बाइडन डिबेट में जब आए तो उनके लिए तय किए गए मानकों का स्तर काफ़ी कम रखा गया था, लेकिन वो उस पर भी खरे नहीं उतरे. वो अपनी बात कहते- कहते रुक जा रहे थे, हकलाने लग रहे थे और काफ़ी अस्पष्ट लग रहे थे. डिबेट में बाइडेन लगातार कमजोर नजर आए. जबकि, पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने काफी हद तक अनुशासित और अच्छा प्रदर्शन किया. तब से चर्चा है कि उन्हें राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी से हटाकर दूसरा चेहरा लाया जा सकता है.


अमेरिका विश्व का सबसे पुराना लोकतांत्रिक देश है. यहां हर चार साल में राष्ट्रपति चुनाव होता है. ये प्रक्रिया काफी पेचीदा और लंबी होती है, इसमें लगभग दो साल लगते हैं, क्योंकि यहां आज भी बैलेट पेपर से वोटिंग होती है. अमेरिका में होने वाले चुनाव हमारे देश के चुनाव से अलग होते हैं. राष्ट्रपति चुनाव का उम्मीदवार बनने के लिए भी अमेरिका में चुनाव होता है.


अमेरिका के राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हर चार साल में नवंबर के पहले सोमवार के बाद आने वाले पहले मंगलवार को होता है. अगला राष्ट्रपति चुनाव 5 नवंबर 2024 को होगा. अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव से एक साल पहले ही इसकी प्रक्रिया शुरू हो जाती है. अमेरिका में दो राजनीतिक पार्टियों की व्यवस्था है, वहां के दो मुख्य राजनीतिक दल डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन हैं, जिनके उम्मीदवार ही चुनावी अभियान की शुरुआत करते हैं. इस अभियान में अलग-अलग दलों के कई उम्मीदवार भाग लेते हैं और पैसा जुटाने के लिए रैली आयोजित करते हैं. इसके बाद डेमोक्रेट और रिपब्लिकन उम्मीदवार टीवी पर बहस शुरू करते हैं. बहस के दौरान प्रत्येक उम्मीदवार अपनी नीतियों और बाकी मुद्दों पर अपना बचाव करता है.


ये प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है, जिसमें कॉकस, प्राइमरी, राजनीतिक सम्मेलन, आम चुनाव और इलेक्टोरल कॉलेज शामिल हैं.


अमेरिका के संविधान के अनुच्छेद-2 में राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया के बारे में जिक्र है. अमेरिकी संविधान में ‘इलेक्टोरल कॉलेज’ के जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव की व्यवस्था है. ये तरीका तब वजूद में आया जब अमेरिका के संविधान निर्माताओं के दो पक्षों के बीच समझौता हुआ. अमेरिकी संविधान निर्माताओं का एक पक्ष का मत था कि अमेरिकी संसद को राष्ट्रपति चुनने का अधिकार मिले. वहीं, दूसरा पक्ष जनता की सीधी वोटिंग के जरिए राष्ट्रपति चुने जाने के हक में था. ‘इलेक्टोरल कॉलेज’ को इन दोनों पक्षों की अपेक्षाओं की बीच की एक कड़ी माना गया.


औपचारिक तौर पर चुनावी साल में चुनाव प्रक्रिया ‘प्राइमरी’ के साथ जनवरी में शुरु होती है और जून तक चलती है. इस दौर में पार्टी अपने उन उम्मीदवारों की सूची जारी करती है, जो राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव में उतरना चाहते हैं. इसके बाद दूसरे दौर में अमेरिका के 50 राज्यों के वोटर, पार्टी डेलिगेट चुनते हैं.
अमेरिकी संविधान प्राइमरी स्तर पर पार्टी डेलिगेट चुनने की प्रक्रिया में कोई लिखित निर्देश नहीं देता है. यही वजह है कि कुछ राज्यों में जनता ‘प्राइमरी’ दौर में मतदान का इस्तेमाल न करके ‘कॉकस’ के जरिए पार्टी प्रतिनिधि का चुनाव करती है. ‘कॉकस’ के तहत राज्यों में स्थानीय स्तर पर बैठक कर पार्टी प्रतिनिधियों का चुनाव किया जाता है.


प्राइमरी में चुने गए पार्टी डेलिगेट  दूसरे दौर में पार्टी के कन्वेंशन यानि सम्मेलन में हिस्सा लेते हैं. क       न्वेनशन में ये डेलिगेट पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का चुनाव करते हैं. इसी दौर में नामांकन की प्रक्रिया होती है. राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार अपनी पार्टी की ओर से उप राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुनता है.


तीसरे दौर की शुरुआत चुनाव प्रचार से होती है. इसमें अलग-अलग पार्टी के उम्मीदवार मतदाताओं का समर्थन जुटाने की कोशिश करते हैं. इसी दौरान उम्मीदवारों के बीच टेलीविजन पर इस मामले से जुड़े मुद्दों पर बहस भी होती है. आखिरी हफ्ते में, उम्मीदवार अपनी पूरी ताकत ‘स्विंग स्टे्टस’ को लुभाने में झोंकते हैं. ‘स्विंग स्टे्टस’ वे राज्य होते हैं, जहां के मतदाता किसी भी पक्ष की ओर जा सकते हैं.


चुनाव की अंतिम प्रक्रिया में ‘इलेक्टोरल कॉलेज’ राष्ट्रपति पद के लिए मतदान करता है. लेकिन इससे पहले राज्यों के मतदाता इलेक्टर चुनते हैं, जो राष्ट्रपति पद के किसी न किसी उम्मीदवार का समर्थक होता है. ये इलेक्टर एक ‘इलेक्टोरल कॉलेज’ बनाते हैं, जिसमें कुल 538 सदस्य होते हैं. ‘इलेक्टर’ चुनने के साथ ही आम जनता के लिए चुनाव खत्म हो जाता है. आखिर में ‘इलेक्टोरल कॉलेज’ के सदस्य मतदान के जरिए अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं. राष्ट्रपति बनने के लिए कम से कम 270 इलेक्टोरल वोट जरुरी होते हैं.
हर राज्य का इलेक्टर चुनने का कोटा तय होता है. ये संख्या हर राज्य से अमेरिकी संसद के दोनों सदनों-हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सेनेट के सदस्यों की कुल संख्या के बराबर होती है. इसलिए हर राज्य के इलेक्टरों की संख्या में अंतर होता है. चुनाव के लिए भी दिन निश्चित होता है. राष्ट्रपति को सेनेट से इतर कुछ मामलों में स्पेशल राइट्स मिलते हैं. ‘इलेक्टोरल कॉलेज’ राष्ट्रपति पद के लिए चुनावी साल के नवंबर महीने में पड़ने वाले पहले सोमवार के बाद पड़ने वाले पहले मंगलवार को मतदान करता है.


यही वजह है कि नवंबर में होने वाले आम चुनाव ये तय नहीं करते कि कौन चुनाव जीता है. इसी कारण कई बार उम्मीदवार राष्ट्रपति पद के लिए आम चुनाव के दौरान लोगों के दीए वोटों में बहुमत पाए बिना, इलेक्टोरल वोटिंग में जीत जाता है. आखिर में राष्ट्रपति को जनवरी में चुन लिया जाता है.

 
 

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