Ebrahim Raisi के जाने से India के व्यापार पर कितना असर पड़ेगा, कौन संभालेगा गद्दी ?

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ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी का हेलीकॉप्टर क्रैश एक हादसा है या साजिश ये बड़ा सवाल बना हुआ है. क्रैश के बाद से कई तरह की अटकलों के साथ हादसे पर सवाल उठाए जा रहे हैं. लापरवाही के एंगल निकाले जा रहे हैं क्योंकि इस हादसे ने ईरान के दूसरे सबसे बड़े ताकतवर नेता की जान ले ली. इस हादसे में ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के साथ ईरान के विदेश मंत्री व अन्य 8 लोगों की मौत हो गई. ये सभी लोग एक ही हेलीकॉप्टर में सवार थे. खास बात ये है कि राष्ट्रपति के साथ तीन हेलीकॉप्टर का काफिला था, जिसमें दो हेलीकॉप्टर सुरक्षित लैंड हो गए थे. जो हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ उसका कारण खराब मौसम को बताया जा रहा है, हालांकि ईरान की एजेंसियां किसी भी एंगल से इंकार नहीं कर रही हैं. बता दें 63 साल के रईसी को ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई का उत्तराधिकारी माना जाता था. रईसी एक कट्टरपंथी और धार्मिक रूप से रूढ़िवादी नेता थे.

ईरान का राष्ट्रपति बनने से पहले वे कई न्यायिक पदों पर काम कर चुके थे. उन्होंने सबसे पहले 2017 में राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा था. रईसी की दो बेटियां हैं. इब्राहिम रईसी हमेशा काली पगड़ी पहनते थे. उनके निधन पर PM मोदी ने भी शोक जताया और दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने में रईसी को याद किया है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा पूरे भारत में शोक के दिन सभी सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा. इस देश में कोई आधिकारिक मनोरंजन कार्यक्रम नहीं आयोजित किया जाएगा. इस बीच कई सवालों के जवाब तलाशों जा रहे है कि आखिर कौन रईसी की गद्दी को संभालेगा. मध्य-पूर्व में कितने समीकरण बदल जाएंगे, भारत पर इसका क्या असर होगा? ये सब इस रिपोर्ट में समझते है. 

 

सबसे पहले बात बात करते है कि आखिर रईसी की जगह कौन लेगा ईरानी संविधान की बात की जाए तो इब्राहिम रईसी के उत्तराधिकारी उपराष्ट्रपति होंगे. वर्तमान में मोहम्मद मोखबर ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति हैं लेकिन उनकी राष्ट्रपति पद पर नियुक्ति सर्वोच्च नेता अयातोल्ला अली खामनेई की मंजूरी पर निर्भर करेगी. इसके अलावा, प्रथम उपराष्ट्रपति, संसद अध्यक्ष और न्यायपालिका प्रमुख वाली एक परिषद को अधिकतम 50 दिनों की अवधि के भीतर एक नया राष्ट्रपति चुनाव आयोजित कराना होगा.

अब बात आती है ईरान-इजराइल की. दरअसल ईरान, इजरायल का खुला दुश्मन है. गाजा युद्ध को लेकर इजरायल की सबसे मुखर आलोचना ईरान ने ही की है. ईरानी दूतावास पर हमले में मौतों के बाद ईरान ने इजरायल पर सीधा हमला भी किया था. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इजरायल से संबंध पहले की तरह ही रहेंगे. रीचमैन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉक्टर मीर जावेदनफर ने द जेरुसलम पोस्ट से कहा, "इस घटना का शासन परिवर्तन पर असर नहीं के बराबर है और घरेलू प्रभाव ज्यादा होगा" वहीं द जेरुसलम पोस्ट से बात करते हुए इजरायल के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मेजर जनरल याकोव अमिड्रोर ने कहा, "अंतत: देश की नीतियां निर्धारित करने वाले सभी फैसले सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई लेते हैं. रईसी और विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियन की जगह लेने वाले लोग अलग-अलग भाषा का उपयोग करेंगे, लेकिन अंत में निर्णय लेने की प्रक्रिया राष्ट्रपति द्वारा नहीं की जाती है और न ही विदेश मंत्री द्वारा"

 

 

बहुत से लोगों के मन में सवाल है कि रईसी की मौत का भारत पर क्या असर होगा. तो उस बारे में जान लेते है. रिपोर्ट्स की मानें तो हाल ही में भारत ने चाबहार बंदरगाह को लेकर ईरान के साथ बेहद अहम समझौता किया है. अमेरिका ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी और प्रतिबंधों की चेतावनी भी दी थी. हालांकि इन सबके इतर रईसी के कार्यकाल में नई दिल्ली का तेहरान के साथ व्यापार भी बढ़ा और दोनों देशों ने काफी अच्छा बिजनेस भी किया है. काफी कम लोग इस बात के बारे में जानते हैं कि ईरान भारत को सिर्फ कच्चा तेल ही नहीं देता है. बल्कि अन्य समान भी आयात करता है. रिपोर्ट की मानें तो इंडिया ईरान से कच्चे तेल के अलावा सूखे मेवे, रसायन और कांच के बर्तन खरीदता है. वहीं, भारत की ओर से ईरान को निर्यात किए जाने वाले प्रमुख सामानों में बासमती चावल शामिल है. वित्त वर्ष 2014-15 से ईरान भारतीय बासमती चावल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश रहा है और वित्त वर्ष 2022-23 में 998,879 मीट्रिक टन भारतीय चावल खरीदा था. बासमती चावल के अलावा इंडिया ईरान को चाय, कॉफी और चीनी का भी निर्यात करता है.

हालांकि रईसी की मौत का असर मध्य-पूर्व में दिखाई दे सकता है. क्योंकि अभी तक हादसे के पीछे मौसम को वजह माना जा रहा है, लेकिन इसमें इजरायली हाथ होने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं. अगर घटना में इजराइल का हाथ सामने आता है तो मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है. गाजा और यूक्रेन युद्ध के अलावा एक तीसरे मोर्चे पर भी युद्ध शुरू हो सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ना निश्चित है. ईंधन से लेकर कई चीजों के दाम बढ़ सकते हैं. अब आगे क्या होता है ये देखने वाली बात होगी.

 

कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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