इजराइल की सरकार के न्यायिक सुधार के दावों पर क्यों बरपा है हंगामा ?

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इजराइल की सरकार के न्यायिक सुधार के दावों पर क्यों बरपा है हंगामा ?
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खबरमंच: Israel में judiciary reform को लेकर क्यों हो रहे protest? | PM Netanyahu। Democracy। Manchh

 

भारत में एक ओर जहां ज्यूडीशियरी के रिफार्म को लेकर सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच लगातार तनातनी का माहौल है वहीं भारत के दोस्त माने जाने वाले इजराइल में ज्यूडीशियरी सिस्टम में सुधार के दावों के बाद पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार मुश्किल में पड़ गई हैं। दरअसल इजराइली सरकार एक नया बिल लेकर आई है। जिसे लेकर संसद से सड़क तक हंगामा मचा हुआ है। हजारों की संख्या में लोग संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. वे डेमोक्रेसी और ज्यूडीशियरी की आजादी से जुड़े नारे भी लगा रहे थे। विपक्ष हो या फिर वकील और आम जनता सभी सरकार के इस बिल की मुखालफत कर रही है।

 

 इजराइल की संसद में सरकार के लाए नए बिल पर वोटिंग हो चुकी है। इसके बाद अब प्रस्तावित कानून पर डिबेट होगी। सरकार के मुताबिक ये बदलाव देश की ज्यूडीशियरी के लिए बेहद जरूरी होने के दावे किए। इस दौरान सरकार और विपक्ष ने एक दूसरे पर तख्तापलट की कोशिश करने के भी आरोप लगाए हैं। विपक्षी विधायकों ने हंगामे के जरिए संसद की कार्यवाही में बाधा डालने की कोशिश की, जिसे देखते हुए पीएम नेतन्याहू ने उन पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया।

 

दरअसल प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार ने देश की न्याय व्यवस्था में कुछ बड़े बदलावों का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट संसद में पास कानूनों को आसानी से पलट नहीं पाएगा। साथ ही कोर्ट के जजों को चुनने में सरकार का रोल भी बढ़ जाएगा। वहीं प्रदर्शनकारियों ने इन बदलावों को लोकतंत्र के लिए खतरा माना है और सड़कों पर उतरे हुए हैं।

 

प्रदर्शनकारियों का मानना है कि कानून मंत्री यारिव लेविन की ओर से लाए गए प्रस्तावों से अदालत की न्यायिक समीक्षा शक्तियां प्रभावित होंगी और जजों की नियुक्त पर सरकार का नियंत्रण होगा जिससे ज्यूडिशियरी को कमजोर किया जा सकता है सरकार की ज्यूडीशियल रिफार्म की योजनाओं को लेकर वकीलों सहित कई समूहों ने कड़ी आलोचना की है और व्यापार जगत के नेताओं के बीच चिंता जाहिर की है।

इजराइल के राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग ने इसी संडे को एक भाषण में देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शन को देखते हुए समझौता करने की सलाह दी थी। राष्ट्रपति ने चेतावनी दी थी कि ये प्रदर्शन देश में हिंसा को बढ़ावा देगा, जो संविधान के लिए खतरा होगा।

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