'आदिपुरूष' में कहानी, डायलाग और किरदारों ने रामायण पलटकर रख दी।

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'आदिपुरुष' की रिलीज के साथ ही सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ सी आ गई है। जिससे फिल्म कैसी है इसका कुछ अंदाजा आप को लग गया होगा। हमने भी फिल्म देख ली है, स्पाइलर न देते हुए आपको बताते है कि फिल्म में क्या था, ये कैसी हैं। वैसे फिल्म की रिलीज से पहले सोचा था बात शायद इस पर होगी क्या कुछ एक चेंजेंस हैं, जैसे ट्रेलर में माता सीता का अपहरण का तरीका, उनका अंगूठी की जगह हाथ की चूड़ीं देना।

लेकिन रिव्यू के लिहाज से इस पर बात न करें तो ही शायद बेहतर हो, नहीं तो पूरी फिल्म पर ही बात करनी पड़ जाएगी। हालांकि जिन चेंजेस की अति मति भ्रष्ट कर दी, उस पर बात तो करनी होगी। कुमार विश्वास ने इस साहित्य सम्मेलन के दौरान एक बात कही थी कि जिसका अर्थ था कि रामायण को किसी गली में कहीं पर बैठा हुआ कोई साधारण सा पंडित ही क्यों न गाए....वो प्रभावी होगी, क्योंकि लिखने वाले ने लिखी ही ऐसी है।

लेकिन ओम राउट के डायरेक्शन में तैयार हुई फिल्म आदिपुरुष, ये कहानी जो हमने रामायण पढ़ी या देखी है, उसकी मानो बुनियाद हिला दी हो या यूं कहिए ये श्रीराम और माता सीता की कहानी जैसी है और जिन जो छोटी-छोटी कहानियां कथाओं के रुप में फेमस हैं। जैसे माता शबरी का कहानी, बाली और श्रीराम का मिलन, संजीवनी बूटी, सीता हरण, इंद्रजीत वध और भी कई कहानी उनकी पृष्ठभूमि ही बदल दी है। अब बात करते हैं फिल्म में एक्टिंग की।

 

प्रभास, राघव के रोल में हैं। कृति सेनन माता सीता के रोल में हैं। तो दोनों कि एक्टिंग 50-50 रही है। कहीं प्रभास काफी अच्छे रोल में दिखे, तो कहीं पर उनका रोल सटीक नहीं लगता। प्रभास फिल्म में कई जगह श्रीराम नहीं बल्कि बाहुबली नजर आती है। वहीं बात कृति सेनन के रोल में दिखती है। कुछ रोल्स में वो और उनकी सुंदरता दोनों ही जचतें है, लेकिन कुछ सीन्स में एक्टिंग अच्छी नहीं लगती। दमदार रोल निभाया है।

रावण के रोल में सैफ अली खान ने। लेकिन उनकी एक्टिंग को वीएफएक्स की नजर लग गई। हालांकि वीएफएक्स भी बिलो द स्टैडर्ड रहे हैं। राघव, जानकी और कई कैरेक्टर्स से लंबी हाइट में रावण के रोल में सैफ अली खान का एक्टिंग वाइस रोल काफी अच्छा रहा है। सनी सिंह ने लक्ष्मण जिसे फिल्म में शेष नाम से पुकारते हैं, वो अहम रोल निभाया है। लेकिन जिस क्रोध, वीरता, त्याग और भाई से प्रेम के लिए हम जानते हैं उस रोल काफी कम था।

हनुमान के रोल में देवदत्त नागा है, उनका जो लुक क्रिएट किया गया है, उसके लिए भले ही लोगों ने उन्हें पंसद न किया हो लेकिन फिल्म में सिर्फ उनकी ही एक्टिंग सैटिसफाइंग थी। बाकी विभीषण के रोल सिद्धांत कार्णिक मंदोदरी के रोल में सोनल चौहान हैं, इंद्रजीत के रोल में वत्सल शेख हैं।

वैसे एक बात ये भी है कि रामायण जैसी कहानी को एक फिल्म में दिखाना संभव नहीं है। लेकिन मेकर्स में फिल्म की कहानी को काफी फिक्शनल कर दिया है, फिल्म में डायलॉग्स काफी विवादित हैं, और रामायण जैसी पावन कथा के लिहाज से सड़कछाप लगते हैं।

जैसे जब लंका दहन से पहले हनुमान जी की मूंछ में आग लगाई जाती है तो डायलॉग है कि कपड़ा तेरे बाप का! तेल तेरे बाप का! जलेगी भी तेरे बाप की और एक डायलॉग है जो हमारी बहनों को हाथ लगाएंगे उनकी लंका लगा देंगे, इंद्रजीत का डायलॉग है मेरे एक सपोले ने तुम्हारे शेषनाग को लंबा कर दिया अभी तो पूरा पिटारा भरा पड़ा है। इस तरह के डायलॉग की उम्मीद बिल्कुल नहीं थी।

शुरु से लेकर आखिर तक फिल्म फैक्स के हिसाब से डिसआपइटिंग है। फिल्म का बजट मीडिया रिपोर्ट्स में 600 करोड़ बताया जा रहा है। लेकिन फिल्म को हाई बजट की स्माल, बिलो दैन अवेरेज फिल्म कहना शायद ज्यादा सही होगा। कुल मिलाकर ये समझिए फिल्म की बाकी चीजों पर लोगों का ध्यान तब जाएगा जब वो कहानियां किस तरह से बदली गईं हैं इस बात से हट पाएंगे। लेकिन फिल्म पर कई फिल्म क्रिटिक्स की दी गई रेटिंग इसकी असलियत दिखाती है।

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