इंडिया के स्वदेशी मेन बैटल टैंक अर्जुन के नए वर्जन में क्या खास है जो इसे विश्व के सबसे बेहतर टैंकों में से एक बनाता है

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किसी भी जमीनी जंग में टैंक सेना का सबसे अहम हथियार होता है। सेना की आर्टिलरी और तोपखाना डिवीजन जो सेना को पीछे से सपोर्ट करती हैं लेकिन मेन बैटल में टैंक ही सबसे आगे चलता है और दुश्मन को तबाह करता है। भारतीय सेना दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना है। जोकि चीन और पाकिस्तान इन दोनों देशों से लगी भारत की सीमा की सुरक्षा करती है। जैसा की सभी को मालूम हो कि इन दोनों ही देशों के साथ भारत के रिश्ते कैसे हैं और इन देशों की भारत की सीमा को लेकर कैसी सोच रही है। ऐसे में सेना के इस मुख्य हथियार यानी मेन बैटल टैंक को लेकर सरकार ने भी बड़े कदम उठाए है। एक ओर सरकार ने 2021 में 118 अर्जुन एमके-1 ए टैंक के आर्डर दिए हैं वहीं चीन की सीमा पर लाइट वेट टैंकों की खरीददारी भी की जा रही है। लेकिन यहां हम बात कर रहे हैं देश के पहले स्वदेशी मेन बैटल टैंक अर्जुन की। 1972 में अर्जुन प्रोग्राम की शुरुआत की गई थी। अभी तक इसके पुराने वर्जन के 100 टैंक सेना के पास हैं। जिसकी क्वालिटी को लेकर भी सेना की ओर से कई बार सवाल उठाए गए हैं। वहीं इसके नए इम्प्रूवड वर्जन यानी एमके-1-ए में क्या खास है और इस टैंक के आने से सेना कितनी मजबूत होगी ये जानना बेहद जरूरी है।

 

 

इंडियन आर्मी के पास मेन बैटल टैंक के तौर पर आजादी के बाद से ही रूसी टैंक रहे हैं आज भी इंडियन आर्मी रूस में बने टी-72 और टी-90 भीष्मा टैंक का ही यूज सबसे ज्यादा करती है। आर्मी के पास मौजूदा वक्त में 4300 के करीब टैंक हैं। बीते कुछ समय में सेना में तोपखाना मजबूत हुआ है उसे कई नई तोपे मिली हैं,लेकिन टैंकों की बात करें तो भारतीय सेना स्वदेशी मेन बैटल टैंकों को लेकर काफी समय से परेशान रही है। खास तौर से अर्जुन प्रोग्राम की बेहद धीमी गति और टैंको की क्वालिटी को लेकर। 1996 में अर्जुन टैंक की फर्स्ट जेनरेशन का प्रोडक्शन तमिलनाडू में शुरू हुआ। जिसके बाद 2004 में इसे सेना में शामिल किया गया। जब ये टैंक तैयार हुआ तो यह विश्व के कुछ सबसे भारी टैंकों में से एक था।

  

इसका वजन 68 टन है। इसे दिन हो या रात किसी भी वक्त लड़ाई करने में सक्षम बनाया गया। इसमें 120 एमएम राइफल्ड गन लगाई गई, जोकि प्रति मिनट 6 से 8 राउंड फायर करने में सक्षम है। इसके अलावा 12.7 एमएम की एक एंटी एयरक्राफ्ट गन और 7.62एमएम की एंटी पर्सनल गन भी लगाई गई।

 

 

2007 में राजस्थान में अश्वमेघ एक्सरसाइज में अर्जुन टैंकों का भी इस्तेमाल किया गया। जिसके बाद सेना की ओर से इस एमबीटी में कई तरह की परेशानियां बताई गई थीं। जिसमें मुख्य तौर पर 

- टैंक का ज्यादा भारी होना

 - लाॅजिस्टिक प्राॅब्लम

 - ज्यादा गर्मी में ऑपरेट करने में दिक्कत

- टैंक की कम स्पीड

- मेन गन के फायर सिस्टम में कमियां

- इंजन फेलियर

 

जैसी प्राॅब्लम्स का जिक्र किया गया था। जिसके बाद डीआरडीओ और काॅम्बैक्ट वेहिकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट इटेब्लिशमेंट ने 2 साल के वक्त में साल 2012 में इसका एक अपग्रेटेड वर्जन तैयार किया। जिसे अर्जुन एमके-1 ए नाम दिया गया। यह इस टैंक की थर्ड जेनरेशन थी। जिसमें 72 तरह के अपग्रेडेशन और नए फीचर्स लाए गए हैं। साथ ही नये वर्जन में 54.3 फीसदी स्वदेशी टेक्नोलाॅजी का यूज किया गया है। नए वर्जन में

 

एमबीटी अर्जुन एमके-1ए नए अपग्रेडेशन

 - इलेक्ट्रो आप्टिकल फायर कंट्रोल सिस्टम

-बेहतर टारगेट प्रिशिसन के लिए लेजर रेंज फाइंडर

 - थर्मल रेंज फाइंडर का इस्तेमाल

- इंटीग्रेटेड बैलिस्टिक कंप्यूटर

 - जर्मनी मेड नया वी-90 टर्बो चार्ज डीजल इंजन

- ऑपरेटिंग क्रू के लिए मल्टीलेयर प्रोटेक्शन सिस्टम

 - कंपोजिट माॅडयूलर आर्मर का इस्तेमाल

- एडवांस लेजर वाॅर्निंग काउंटर मीजर सिस्टम

 - 16 स्मोक ग्रेनेड का लगाए गए हैं

लेकिन इन सभी नए अपग्रेडेशन के बाद भी एमबीटी अर्जुन के सेना में इस्तेमाल होने का एक दायरा है। यह टैंक भारी है ऐसे में इसे ऊंचाई वाली जगहों पर ले जाने में दिक्कत होती है। खास तौर से चीन की सीमा से लगे इलाकों में इसकी तैनाती में लाॅजिस्टिक्स की दिक्कत है। इसका इस्तेमाल ज्यादातर पाकिस्तान से लगी सीमा पर पंजाब से लेकर राजस्थान और गुजरात में किया जा सकता है। जबकि चीन की सीमा पर तैनाती के लिए केंद्र सरकार की ओर से लाइट टैंकों की खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिनका वजन 40 टन के कम होगा और जिन्हें ऊंचाई वाली जगहों पर आसानी से तैनात किया जा सकता है। केंद्र सरकार ने अर्जुन टैंक के नए वर्जन की खरीद के लिए 7,523 करोड़ की राशि आवंटित की है। जल्द ही सेना को नए टैंक मिलना शुरू हो जाएंगे।

  

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