इंडियन आर्मी का तोपखाना मोदी सरकार में कितना ताकतवर हुआ ?

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रूस यूक्रेन की जंग से मिले सबक के बाद तोपखाने में अब माउंटेड होवित्जर गन को प्राथमिकता दे रही भारतीय सेना

किसी भी देश की सेना में उसकी आर्टिलरी की ताकत सबसे अहम होती है। आर्टिलरी यानी सेना का तोपखाना। पुराने दौर से आज तक युद्ध लड़ने की तकनीक भले ही कितनी भी बदली हो,लेकिन तोपखाने की अहमियत कम नहीं हुई है। रूस-यूक्रेन युद्ध हो या फिर इजराइल और हमास के बीच चल रही लड़ाई हो। इन देशों की सेना के तोपखाने हार जीत में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वहीं अगर इंडियन आर्मी की बात करें तो वह देश में दो मोर्चों पर अपने तोपखाने को तैनात किए हुए है। चीन और पाकिस्तान की सीमा पर लगातार तोपखाने की तैनाती को सेना और सरकार अहमियत देती है। साथ ही सेना के तोपखाने में लगातार नई और ज्यादा ताकतवर तोपों की खरीद की प्रक्रिया भी चल रही है। हालाकि यह प्रक्रिया कुछ धीमी है,लेकिन अच्छी बात ये है कि अब भारतीय सेना के सामने अलग अलग तरह की ज्यादा ताकतवर तोपों की एक पूरी रेंज मौजूद है। जिसमें से चुन चुन कर सेना उन्हें अपने तोपखाने में शामिल कर रही है। हाल में ही इंडियन आर्मी ने 52 कैलिबर की 155 एमएम होवित्जर तोपों की खरीद के लिए एक्सेप्टेंस ऑफ़ नेसेसिटी जारी किया है। ऐसा बताया जा रहा है कि इस फाइनेंशियल ईयर में ही इंडियन आर्मी 300 के करीब टोड आर्टिलरी गन का आर्डर दे सकती है।

 

इंडियन आर्मी की फायर पावर उसके तोपखाने की ताकत पर ही निर्भर करती है। ऐसे में ये जानना जरूरी है कि भारतीय सेना के पास अब तक किस तरह की तोपे थीं।  

 

 

इंडियन आर्मी की आर्टिलरी में कितनी तरह की तोपे?

-मोर्टार डिवीजन

-फील्ड आर्टिलरी- 105MM और 122MM आर्टिलरी गन

-लाइट आर्टिलरी-130MM की M-46 फील्डगन,अमेरिकी M-777 अल्ट्रा लाइट होवित्ज़र 

-हैवी आर्टिलरी-बोफोर्स,K-9वज्र सेल्फ प्रोपेल्ड आर्टिलरी गन सिस्टम

 

 

इसके अलावा सेना के तोपखाने में राॅकेट आर्टिलरी भी बेहद अहम होती है मौजूदा समय में सेना के तोपखाने में प्रमुख रूप से तीन तरह की राॅकेट आर्टिलरी है। जिसमें से प्रमुख रूप से

 

 

राॅकेट आर्टिलरी में क्या कुछ है?

- BM -21 मल्टी बैरल राॅकेट  

पिनाका मल्टीबैरल राॅकेट लांचर

- BM-30 स्मर्च राॅकेट लांचर

 

गौरतलब है कि भारतीय सेना ने 1988 में आखिरी बार बोफोर्स तोपें खरीदी थी। उसके बाद से अब मोदी सरकार में नई तोपों की खरीद की प्रक्रिया में तेजी आई है। हालाकि कैग की एक रिपोर्ट भारतीय सेना में नई तोपों को शामिल करने की गति को अभी भी बेहद धीमा मानती है। ऐसे में दो मोर्चों पर दुश्मनों के सामने खड़ी सेना के तोपखाने की फायर पाॅवर पर सवाल भी उठते हैं,लेकिन आत्म निर्भर भारत योजना के तहत डिफेंस सेक्टर में जितनी तेजी से नई तोपों को बनाने के लिए प्राइवेट प्लेयर्स आगे आए और कामयाबी हासिल की वो भी बेहद अहम है। डीआरडीओ हो या कल्याणीभारत फोर्ज या टाटा उनकी बनाई अलग अलग तोपों की खरीद की प्रक्रिया को सेना आगे बढा रही है। साथ ही पुरानी पड़ चुकी 130 MM की M-46 तोपों को भी 155MM की तोपों में अपग्रेड करने का काम सेना कर रही है जिन्हें हम सारंग तोप के नाम से भी जानते हैं।

 

ऐसे में ये जान लीजिए कि भारतीय सेना कितनी तरह की तोपों को अपने तोपखाने में शामिल कर चुकी है या उनकी खरीद के आर्डर कर चुकी है।

 

ये आर्टिलरी गन इंडियन आर्मी में शामिल हो रहीं

गन का नाम- संख्या

M-777 155MM होवित्जर-145

K-9 वज्र- 100

धनुष गन सिस्टम- 114

सारंग तोप अपग्रेडेशन- 300

ATAGS-150

 

इंडियन आर्मी के तोपखाने की फायर पाॅवर बढाने के लिए अलग अलग तरह की गन्स को शामिल किया जा रहा है। इनमें टोड आर्टिलरी और माउंटेड आर्टिलरी गन्स भी शामिल हैं,लेकिन ये दोनों गन आखिर होती कैसी हैं ये भी जान लीजिए।

 

 

टोड आर्टिलरी- इस गन सिस्टम में ऐसी तोपें होती हैं,जिन्हें किसी दूसरे वाहन से खींच कर ले जाना होता है। इसके लिए अलग से बड़े ट्रक सेना इस्तेमाल करती है। अभी तक आर्मी की ज्यादातर तोपें टोड आर्टिलरी की कैटेगरी में आती हैं।

 

माउंटेड आर्टिलरी- माउंटेड आर्टिलरी गन ऐसी तोपें होती हैं जिन्हें किसी ट्रक या फिर ट्रैक्ड वेहीकल पर लगाया जाता है। ये गन सिस्टम एक जगह से दूसरी जगह ज्यादा आसानी से ले जाए जा सकते हैं साथ ही इन तोपों से सेना की शूट एंड स्कूट कैपेबिलीज बढती हैं। माउंटेड गन सिस्टम ज्यादातर सेल्फ प्रोपेल्ड आर्टिलरी वाले होते हैं। हालांकि इंडियन आर्मी के तोपखाने में अभी तक माउंटेड आर्टिलरी गन न के बराबर थी। K-9 वज्र के साथ अब कई तरह की माउंटेड आर्टिलरी गन की खरीद को लेकर सेना प्रयासरत है।

 

 

गलवान में चीन के साथ भारतीय सेना की भिड़ंत के बाद भारत ने लदाख रीजन में चीन की सीमा पर अपनी तैनाती को बढाया है। साथ ही K-9 वज्र तोपों को भी मोर्चे पर तैनात किया है,लेकिन सेना अपना फोकस टोड आर्टिलरी के साथ माउंटेड आर्टिलरी गन सिस्टम पर भी कर रही है। साथ ही सेना के तोपखाने को पूरी तरह से अपग्रेड करने के लिए नई और ज्यादा ताकतवर तोपें शामिल कर रही है। इन्हीं में शामिल है 155MM-52 कैलिबर की माउंटेड आर्टिलरी गन। दरअसल इंडियन आर्मी को ऐसी 800 तोपों की रिक्वायरमेंट है। दुनिया के कई देशों के पास एक से बढ कर एक ताकतवर माउंटेड गन है,जिसमें अब डीआरडीओ की बनाई गन भी शामिल भी हो गई है। कुछ समय पहले पोखरण फायरिंग रेंज में इसकी टेस्ट फायरिंग भी गई। इसके जो नतीजे वो बेहद उत्साहजनक हैं। दरअसल डीआरडीओ ने अपनी एटीएजीएस गन को ही एक आठ बाई आठ के ट्रक पर माउंट करके माउंटेड गन सिस्टम को तैयार किया हैं जिसकी फायरिंग रेंज 45 किमी तक है। प्रति मिनट ये तोप गोले दाग सकती है। साथ ही जिस ट्रक पर इसे माउंट किया गया है वो ट्रक 90 किमी प्रति घंटे की स्पीड पकड सकता है। दरअसल रूस यूक्रेन युद्ध से सबक लेते हुए इंडियन आर्मी ऐसी तोपों पर फोकस कर रही हैं। जिनका ट्रांसपोर्टेशन जल्दी किया जा सके और जो दुश्मन पर जल्द निशाना साध कर निकल जाएं। इसी कैपेबिलिटी में माउंटेड गन सिस्टम बेहद अहम हो जाता है।

 

गौर करने वाली बात ये भी है कि चीन भारत की सीमा पर हैवी आर्टिलरी तैनात किए हुए है। साथ ही पाकिस्तान को भी अपनी हैवी आर्टिलरी गन दे रहा है। जिनका इस्तेमाल पाकिस्तान भारत की सीमा पर करेगा ये भी तय है। ऐसे में इंडियन आर्मी के तोपखाने में नई गन्स के आने की गति को तेज करने की जरूरत है।

 

आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत भारत के प्राइवेट सेक्टर के साथ ही डीआरडीओ और गन फैक्ट्री ने एक के बाद एक कई बेहतरीन तोपें तैयार की हैं। इनमें से कुछ को कई देशों में एक्सपोर्ट भी किया गया है। अब देखने वाली बात यह है कि भारतीय सेना की कई नई फायर पावर का दुश्मन किस तरह से जवाब देगा। और अगर दुश्मन कुछ करता है तो इंडियन आर्मी का जवाब क्या होगा।

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