इंडियन आर्मी के लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर 'प्रचंड' की खासियतें क्या हैं?

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इंडियन आर्मी के लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर LCH 'प्रचंड' ने बीते सोमवार बड़ी कामयाबी हासिल की। सेना ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट में कहा, 'हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर- एलसीएच प्रचंड की 70 मिमी रॉकेट और 20 मिमी बुर्ज गन की पहली फायरिंग को दिन और रात दोनों स्थितियों में सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।' ये टेस्ट असम में लिकाबाली के पास मौजूद एक फायरिंग रेंज में किया गया। प्रचंड एक मल्टी रोल, लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर है। ट्रायल के दौरान इस हेलिकॉप्टर को सियाचिन में लैंड कराया गया था और ये दुनिया का पहला कॉम्बैट हेलिकॉप्टर है, जो सियाचिन में लैंड हुआ था। जिसके चलते अब आर्मी और एयर फोर्स चीन से लगी सीमा पर इन एडवांस हेलीकॉप्टर्स को तैनात करने के बारे में भी सोच रही है।

भारत में लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर के प्रोजेक्ट को लॉन्च किया गया

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल ने इसे डेवलप किया है। प्रचंड का वजन 5.8 टन है। ये पहला स्वदेशी ट्विन इंजन लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर है, जो 20 मिमी बुर्ज गन, 70 मिमी रॉकेट सिस्टम और हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से लैस है। जिसमें एक बार में 24 रॉकेट लोड किए जा सकते हैं। इसका कॉम्‍बैट रेडियस यानी लड़ने का दायरा 500 किमी है। प्रचंड हेलीकॉप्टर में 45% स्वदेशी कलपुर्जे इस्तेमाल किए गए हैं। इसको दुनिया में अपने वेट क्लास में एकमात्र कॉम्बैट हेलीकॉप्टर माना जाता है। 'प्रचंड' मैक्सिमम 288 km per hour की स्पीड से 5,000 मीटर या 16,400 फीट की ऊंचाई पर काफी वजन लेकर लैंड और टेक-ऑफ कर सकता है। इसमें हथियारों के साथ-साथ ईंधन का भी वजन शामिल है।
भारत को लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर बनाने का विचार पहली बार 1999 के कारगिल युद्ध के बाद आया। दरअसल, इस युद्ध में पाकिस्तानी सैनिकों ने कारगिल की ऊंचाई वाली चोटियों पर कब्जा कर लिया था। भारतीय वायुसेना उस वक्त मेनली रूस के बनाए हेलीकॉप्टरों का ही इस्तेमाल कर रही थी, जो कि इतनी ऊंचाई पर ज्यादा कारगर नहीं थे। आखिरकार भारत को रूस के ही एमआई-17 हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करना पड़ा था। इसी के बाद से भारतीय वायुसेना ने एलसीएच प्रोजेक्ट पर गंभीरता से विचार शुरू किया। आखिरकार साल 2006 में भारत में लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर के प्रोजेक्ट को लॉन्च किया गया। एचएएल ने तब एलान किया कि वो ऐसा हेलीकॉप्टर डेवलप करेगा जो कि कठिन से कठिन रेगिस्तानी क्षेत्र के साथ-साथ लद्दाख और सियाचिन ग्लेशियर जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी आसानी से हर ऑपरेशन में काम आ सके। चार साल तक इस प्रोजेक्ट पर काम करने के बाद आखिरकार 29 सितंबर, 2022 को पहला LCH सेना में शामिल किया गया था।

क्‍या है प्रचंड की खास बातें?

- एलसीएच प्रचंड में 2 क्रू मेंबर बैठ सकते हैं। इसकी लंबाई 15.8 मी जो कि लगभग 51 फिट 10 इंच है। विंग्स का फैलाव 4.60 मीटर का है। इसकी ऊंचाई 4.70 मीटर जो कि करीब 15 फिट है। मैक्सिमम स्पीड 275 किमी प्रति घंटा की है।
- लोडेड आर्म्स की बात की जाए तो इसमें चिन माउंटेड गन, M621 20mm Cannon Gun, 69 मिमी रॉकेट, अनगाइडेड रॉकेट्स और air-to-air missiles, Air-to-surface missiles, Anti-radiation missiles, Helina ATGM, Iron bombs, cluster bomb units और grenade launcher भी हैं।
- हेलीकॉप्टर में दुश्मन की नजर में न आने की Modern Features, Strong Armor Protection And Night Attack Ability है। ये दुनिया के सबसे high battlefield सियाचिन में भी काम करने में पूरी तरह सक्षम है।

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