China-PAK पर नजर रखने के लिए भारत ने सीमा के करीब तैनात किया हेरॉन मार्क-2 ड्रोन

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इजराइल में बने Heron drones को भारत काफी समय से इस्तेमाल कर रहा है। अब इसका MK-2 वर्जन भी भारत आ चुका है, जिसकी तैनाती सरकार ने बार्डर एरियाज में कर दी है।

चीन और पाकिस्तान की ओर से ख़तरे को देखते हुए भारत लगातार LAC और LOC पर अपनी तैयारी बढ़ा रहा है। भारत ने नॉर्दर्न सेक्टर में फॉरवर्ड एयरबेस पर एडवांस्ड हेरॉन मार्क-2 ड्रोन (Heron Mark 2 drones) तैनात किए हैं। ये ड्रोन लंबी दूरी की मिसाइलों से दुश्मन पर हमला करने में सक्षम हैं। ये ड्रोन पाकिस्‍तान और चीन से लगी सीमाओं की न सिर्फ रेकी या जासूसी कर सकता है बल्कि जरूरत पड़ने पर छोटी सर्जिकल स्‍ट्राइक भी कर सकता है। हेरॉन मार्क-2 ड्रोन इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने बनाए हैं। वहीं, इंडियन एयरफोर्स (Indian Air Force) ने श्रीनगर एयरबेस पर एडवांस्ड MIG-29 फाइटर जेट की स्क्वाड्रन तैनात की है। नॉर्दर्न सेक्टर में MIG-29 और हेरॉन मार्क-2 ड्रोन तैनात होने से दोनों मोर्चों पर भारत और मजबूत होगा।  

ड्रोन स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर विंग कमांडर पंकज राणा ने कहा हेरॉन मार्क-2 बेहद सक्षम ड्रोन है। ये लंबे समय तक टिकने में सक्षम है और बड़े इलाके पर नजर रख सकता है। मॉर्डन एवियोनिक्स और इंजन की वजह से ड्रोन का ऑपरेशनल टाइम बढ़ गया है। ये सटैलाइट कम्युनिकेशन से भी लैस है और टारगेट की 24 घंटे निगरानी करने में माहिर है। हेरॉन मार्क-2 ड्रोन फाइटर जेट्स की भी मदद करते हैं। ये अपने टारगेट पर लेजर लाइट डालते हैं, जिससे फाइटर एयरक्राफ्ट टारगेट की पहचान कर उस पर सटीक निशाना लगा सकें। हेरॉन मार्क-2 ड्रोन का संचालन करने वाले स्क्वाड्रन को वार्डन ऑफ द नॉर्थ के रूप में जाना जाता है। ड्रोन 277 किमी. प्रति घंटे की स्पीड से उड़ सकते हैं। एक बार में 36 घंटे तक उड़ान भरने में सक्षम है। इनमें एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल, एयर-टू-ग्राउंड एंटी-टैंक वैपन्स और बम लगाए जा सकते हैं। ड्रोन 35 हजार फीट की उंचाई से निगरानी कर सकते हैं। सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम भी है। ये किसी भी मौसम और किसी भी इलाके में अपने मिशन को अंजाम दे सकते हैं। हेरोन ड्रोन मार्क-2 सैटेलाइट से नियंत्रित होने वाला ड्रोन है जो 250 किलोग्राम हथियार लेकर उड़ सकता है।

हेरॉन मार्क-2 ड्रोन की खासियत

लंबाई 14 मीटर

चौड़ाई 26 मीटर

वजन 4,650 किग्रा

ऊंचाई 13,700 मीटर

स्पीड 200 किमी प्रति घंटा

ड्रोन्स में हथियार और सेंसर भी लगाए जा सकते

इसमें थर्माेग्राफिक कैमरा, एयरबॉर्न सर्विलांस विजिबल लाइट, राडार सिस्टम लगा है। ये अपने बेस से उड़कर खुद ही मिशन पूरा करके बेस पर लौट आता है। ये ड्रोन किसी भी मौसम में उड़ान भर सकता है और जीरो से कम तापमान में भी काम करने में सक्षम है। इंडियन एयरफोर्स प्रोजेक्ट चीता पर भी काम कर रही है। इसके तहत करीब 68 हेरॉन मार्क 1 ड्रोन को अपग्रेड किया जाएगा। इसके अलावा 90 मार्क 2 ड्रोन और लिए जाएंगे। इनमें सैटेलाइट कम्युनिकेशन लिंक और जरूरत के हिसाब से हथियार जोड़े जाएंगे। जल्द ही सेना को अमेरिका से 31 प्रीडेटर ड्रोन भी मिलने वाले हैं। इन ड्रोन्स में हथियार और कई तरह के सेंसर भी लगाए जा सकते हैं। इनमें से 15 ड्रोन नेवी को और 8-8 ड्रोन एयरफोर्स और आर्मी को दिए जाएंगे। इंडियन एयरफोर्स के पास पहले से ही 180 इजरायल निर्मित यूएवी है, इसमें 108 सर्चर और 68 हेरॉन मार्क 1 सर्विलांस और जासूसी ड्रोन शामिल हैं। अभी ये ड्रोन किसी हथियार से लैस नहीं हैं।

इंडियन एयरफोर्स ने श्रीनगर एयरबेस पर MIG-21 की जगह MIG-29 फाइटर जेट के स्क्वाड्रन को तैनात किया है। MIG-29 अपग्रेडेड हैं और मॉर्डन फीचर्स से लैस हैं। इनमें लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलें, नाइट विजन, एयर-टू- एयर रिफ्यूलिंग समेत कई नए फीचर्स जोड़े गए हैं।  

पिछले 12 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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