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India में Tiger Population में इजाफा, दुनियाभर में हो रही तारीफ, सामने आई Report

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Big Cats की दुनिया में टाइगर को जंगल का सबसे बड़ा PREDITOR माना जाता है. भारत में दुनिया के 75 परसेंट टाइगर रहते हैं. हाल ही में केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें पता लगा है कि भारत में टाइगरों की संख्या इजाफा हुआ है. पिछले 16 साल में 260 फीसदी बढ़ी टाइगर बढ़े है. 4 सालों में बाघों की संख्या में 2967 से बढ़कर 3682 पहुंच गई है. 2006 में महज 1,411 ही बाघ बचे थे. देश में 785 बाघों के साथ मध्य प्रदेश अव्वल है और उसका टाइगर स्टेट का दर्जा कायम है. केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बाघ गणना 2022 के राज्यवार आंकड़े जारी किए. जिसमें मध्य प्रदेश 785 बाघों के साथ पहले पर तो दूसरे स्थान पर कर्नाटक है, जहां 563 बाघ हैं, जबकि उत्तराखंड में 560 और महाराष्ट्र में 444 बाघ मिले हैं.  वर्ल्ड टाइगर डे पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने जिम कॉर्बेट रिजर्व में बाघ की स्थिती पर रिपोर्ट साझा की...जिसे हर 4 साल में होने वाली Countrywide Tiger Census का Wildlife Institute of India के Analysis पर तैयार किया गया है. इसके मुताबिक देश में साल 2018 में 2,967 बाघ थे, इस लिहाज से 2022 तक इनकी आबादी सालाना 6.1 परसेंट की दर से बढ़ी है.

सबसे ज्यादा 785 बाघ मध्यप्रदेश में हैं. 2016 में सिर्फ 300 थे 
उत्तराखंड में साल 2006 में 178 बाघ ही बचे थे, आज तीन गुना बढ़कर 560 हो गए है
उत्तर प्रदेश में भी 109 से करीब दोगुना बढ़कर 205 हो गए है.
ये राज्य शिवालिक गंगा क्षेत्र में आते हैं, जहां बाघों की संख्या 297 से बढ़कर 819 हो चुकी है.

रिपोर्ट के मुताबिक रिजर्व में बाघों की संख्या
टाइगर रिजर्व में सबसे ज्यादा 260 बाघ उत्तराखंड के कार्बेट रिजर्व में हैं.
कार्बेट टाइगर रिजर्व (उत्तराखंड) -260
बांदीपुर टाइगर रिजर्व (कर्नाटक)-150
नागरहोल टाइगर रिजर्व (कर्नाटक)-141
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (मध्यप्रदेश)-135
दुधवा टाइगर रिजर्व (UP) - 135
मदुमलाई टाइगर रिजर्व (तमिलनाडु) -114
कान्हा टाइगर रिजर्व (मध्य प्रदेश) -105
 काजीरंगा टाइगर रिजर्व (असम) -104
सुंदरवन टाइगर रिजर्व (बंगाल) -100
ताडोबा अंधेरी टाइगर रिजर्व (महाराष्ट्र) -97
सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व (तमिलनाडु) -85

मिले हैं. शिवालिक पर्वत व गंगा के मैदानी क्षेत्र ने खूब बाघ बढ़ाए है. यहां बाघों की आबादी में 16 साल में 275 प्रतिशत वृद्धि हुई, जो देश में सबसे ज्यादा है. इसमें उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश का अहम योगदान रहा.
मध्य भारत क्षेत्र व पूर्वी घाट क्षेत्र में सात राज्य हैं. यहां देश के सबसे ज्यादा बाघ भी हैं. इनमें मध्यप्रदेश में 785 और राजस्थान 88 ने बाघ बढ़ाए, लेकिन आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा में बाघ घट गए.
पश्चिमी घाट क्षेत्र में दूसरी सबसे बड़ी आबादी यहीं की रही. कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु राज्यों ने बाघों की संख्या में 270 प्रतिशत वृद्धि की. ओवरआल नजर डालें तो
 

2006 में 1411
2010 में 1706
2014 में 2226
2018 में 2967
2022 में 3682

बाघ बढ़े हैं, रिपोर्ट के मुताबिक

पांच टाइगर रिजर्व में एक भी बाघ नहीं, सात में सिर्फ एक
मिजोरम का डंपा टाइगर रिजर्व, अरुणाचल प्रदेश का कमलेंग, तेलंगाना का कवल टाइगर रिजर्व, उड़ीसा के सटकोसिया व सहायद्री टाइगर रिजर्व में एक भी बाघ नहीं
बंगाल के बक्सा, अरुणाचल के नामदफा, राजस्थान के रामगढ़ विषधारी और मुंकदरा, झारखंड के पलामू, छत्तीसगढ़ के सीतानदी व इंद्रावती टाइगर रिजर्व में सिर्फ एक-एक बाघ है

टाइगर रिजर्व में पांच से भी कम बाघ
इसमें उत्तर प्रदेश के रानीपुर में बाघों की संख्या चार, असम के नमेरी टाइगर रिजर्व में तीन है
 
इन राज्यों में दर्ज की गई गिरावट

अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और झारखंड में गिरावट दर्ज
हालांकि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इन राज्यों से अपील की है कि वे बाघों की आबादी बढ़ाने के लिए गंभीर प्रयास करें.

चिड़ियाघरों की बात करें तो
एसोसिएशन ऑफ इंडियन जू एंड वाइल्डलाइफ वेटेरिनेरियन्स यानी AIZWV के मुताबिक, 'हर साल भारतीय चिड़ियाघरों में 20 से अधिक बाघ कैद में मर जाते हैं,'

बाघों की प्रजातियां
दुनिया में बाघ की 6 प्रजातियां पाई जाती हैं लेकिन भारत में बाघों की 5 प्रजातियां है.
ये पांचों हैं साइबेरियन, बंगाल टाइगर, इंडोचाइनीज, मलयन व सुमत्रन है

चर्चा में क्यों रहता है सफेद टाइगर ?
भारत में सबसे पहला सफेद शेर मध्य प्रदेश के रीवा में पाया गया था. साल 1951 में गोविंदगढ़ के पास जंगलों में तब के महाराजा मार्तंड सिंह ने पहली बार सफेद बाघ देखा था. उसके बाद से सफेद शेरों की संख्या में इजाफा हुआ और अब ये देश ही नहीं विदेशों में भी हैं.  रीवा के मुकंदपुर में व्हाइट टाइगर सफारी भी है जहां सफेद बाघों को आराम फरमाते देखा जा सकता है.

टाइगर से जुड़े फैक्ट्स 
ज्यादातर बाघ घने जंगल में रहना ही पसंद करता है
एक बार में 40 किलो मांस खा सकता है
भरपेट भोजन के बाद ये करीब 30 घंटे तक आराम कर सकता है
बब्बर शेर के बाद टाइगर की दहाड़ 3.5 KM तक सुनाई देती है
पानी के आस-पास रहना पसंद होता है, कारण ये कि वहां शिकार आसानी से कर लेते हैं
बाघ जमीन के बाद पानी में भी चल सकता है, 6 किलोमीटर तक तैराकी कर सकता है
इंसानों पर सबसे ज्यादा टाइगर अटैक करता है.
हालांकि चिड़ियाघरों में बाघों की संख्या कम होती जा रही है.

Central Zoo Authority ने raw data का detailed analysis किया जिसमें पता लगा है कि 2015-16 में भारत के चिड़ियाघरों में लगभग 99 सफेद बाघ और 245 बाघ रखे गए थे, जिनमें से 16 सफेद बाघ और 28 सामान्य बाघ उसी समय मर गए
2011-12 में चिड़ियाघरों में रखे जाने वाले सामान्य बाघों की संख्या लगभग 295 थी, लेकिन 2015-16 में धीरे-धीरे इनकी संख्या घटकर 245 रह गई है.

सामान्य बाघों को 60 चिड़ियाघरों में रखा जाता है.
जबकि सफेद बाघ देशभर में फैले 27 चिड़ियाघरों में मौजूद हैं.

यहां एक बात किल्यर कर दें आपको ये रिपोर्ट 2017 की है. फिलहाल अभी के कोई आंकड़े सामने नहीं आए है.
जू में जैसे टाइगरों की संख्या कम हो रही है. उसको देखते हुए कानपुर में टाइगरों के लिए खास इंतजाम किया गया है और pre-dig सेंटर  बनाया गया है. चिड़ियाघर में वर्तमान में 10 बाघ हैं. इनमें मादा बाघिन 6 और नर 4 हैं.
कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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