चीन-पाकिस्तान का कर देगा काम तमाम भारत का सबसे ताकतवर T-90 सुपर भीष्म टैंक

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चीन-पाकिस्तान चाहें कितनी भी गुस्ताखी कर ले उसे उसकी हद बताने के लिए भारत भी फुल एक्शन मूड में है। भारत भी LAC पर अपनी तैयारियां मजबूत कर रहा है। भारतीय सेना आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए लद्दाख सेक्टर में लगातार नए हथियार और उपकरण तैनात कर रही है। वहीं पाकिस्तान से लगी सीमा पर भी कश्मीर से लेकर राजस्थान तक अपने जंगी हथियार तैनात कर रखे हैं। इंडियन आर्मी के तोप खाने में एक से बढ़कर एक टैंक और तोपें हैं। इसमें बड़ी संख्या में T-90 भीष्म टैंक भी शामिल हैं। जिसे विश्व के सबसे बेहतरीन टैंकों में से एक माना जाता है। वहीं अब भारतीय सेना इसकी ताकत को और ज्यादा बढ़ाने जा रही है और एक नया सुपर भीष्म टैंक सेना को देने वाली है।  

T-90 भारतीय सेना का मेन बैटल टैंक है और इसे रूस ने बनाया है। जिसका नाम भारत ने बदलकर  T-90 भीष्म दिया है। ये T-72B और T-80U का मॉडर्न वर्जन है। इस टैंक को पहले T-72 BU के नाम से जाना जाता था, लेकिन बाद में इसे T-90 नाम दे दिया गया। इसमें T का मतलब है टैंक और इसमें 90 इसलिए लगाया गया है क्योंकि ये 1990 के दशक में बना था। ये पहली बार साल 1992 में दुनिया के सामने आया। इसे दुनिया के आधुनिक टैंकों में गिना जाता है। इस टैंक में तीन लोगों का क्रू होता है। कमांडर, गनर और ड्राइवर। T-90 टैंक का वजन करीब 46.5 टन है। इसका इंजन 1000 हार्स पावर है। इसमें अधिकतम 1600 लीटर फ्यूल डाला जा सकता है। ये टैंक 9.6 मीटर लंबा, 3.78 मीटर चौड़ा और जमीन से 2.22 मीटर ऊंचा है। इस टैंक पर अलग-अलग तरह के 43 एमयूनिएशन स्टोर किए जा सकते हैं। T-90 टैंक को सामान्य रास्ते पर 60 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलाया जा सकता है। जबकि उबड़खाबड़ रास्ते पर इसकी अधिकतम स्पीड 50 किलोमीटर प्रतिघंटे के करीब होती है। इसकी ऑपरेशनल रेंज 550 किलोमीटर है। इस टैंक का रूसी वर्जन कई देशों में इस्तेमाल किया जा रहा है। अपने छोटे आकार की वजह T-90 टैंक जंगल और पहाड़ी इलाकों में भी तेजी से चल सकता है।

T-90 टैंक भारत में कैसे आया

साल 2001 में भारत ने पहली बार रूस से T-90 टैंक खरीदने का सौदा किया था। भारत ने रूस को 310 T-90 टैंक का ऑर्डर दिया। इनमें से 124 रूस से बनकर आए, जबकि बाकी टैंक समझौते के तहत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की बदौलत तमिलनाडु में असेंबल किए गए। भारत में जिन T-90 टैंकों को असेंबल किया गया उन्हें ही भीष्म नाम दिया गया। भीष्म को और अधिक आधुनिक बनाने के लिए रूस के साथ ही फ्रांस की भी मदद ली जाती रही है। T-90 टैंक में कक्टस के-6 एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर लगा है। इस आर्मर का काम टैंक को दुश्मन के हमले से बचाना है। आसान भाषा में इसे टैंक की बुलेटप्रूफ जैकेट कहा जा सकता है। जब कोई गोली या रॉकेट कक्टस के -6 आर्मर पर लगता है तो ये विस्फोट को बाहर की ओर धकेलता है। इससे टैंक को कोई नुकसान नहीं होता है।

T-90  टैंक की खासियत

T-90 टैंक की दूसरी खासियत ये है कि ये 2 किलोमीटर तक की रेंज में हेलिकॉप्टर को भी मारकर गिरा सकता है। इसके लिए टैंक में सबसे ऊपर एंटी एयरक्राफ्ट गन लगाई गई है। इसे मैन्युअल और रिमोट दोनों तरह से चलाया जा सकता है। ये गन एक मिनट में 12.7 एमएम की 800 गोलियां दागती है। इस टैंक की जान 125 मिलीमीटर की स्मूथबोर गन है। इसके जरिए कई तरह के गोले और मिसाइलें दागी जा सकती हैं। जैसे बख्तरबंद गाड़ियों को उड़ाने वाली मिसाइल और एंटी टैंक मिसाइल भी होती है।  

कई तरह से है सुरक्षित

टैंक में एक थर्मल इमेजर है। थर्मल इमेजर शरीर से निकलने वाली गर्मी के आधार पर काम करता है।  इसके जरिए दिन और रात में 8 किलोमीटर की दूरी तक छिपे दुश्मनों को देखा जा सकता है। इसमें मिसाइल ऑटोमेटिक लोड होती है, यानी एक बार निशाना लगाने के बाद दोबारा रॉकेट या मिसाइल अपने आप लोड हो जाती है। T-90 टैंक एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल भी दाग सकती है। इससे 100 मीटर से लेकर 4000 मीटर तक की रेंज में निशाना लगाया जा सकता है।

दुश्मन के लिए मुसीबत बनेगा T-90 टैंक

T-90 टैंक को मैदानी इलाकों, रेगिस्तान, दलदली जमीन और यहां तक कि पानी के अंदर भी चलाया जा सकता है। ये पांच मीटर पानी की गहराई तक काम कर सकती है और खास बात ये है कि इस टैंक के 360 डिग्री घुमने पर क्रू मेंबर्स को कोई दिक्कत नहीं होती है। इस टैंक में ऑटोमेटिक वैपंस लोड करने की सुविधा है। यही वजह है कि इसमें बार-बार वैपन लोड करने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे अलग-अलग तरह के बम और रॉकेट भी दागे जा सकते हैं। इसमें लगे जायरास्कोप सिस्टम की बदौलत ये टैंक तेज स्पीड से चलते हुए भी फायर कर सकता है। ये सिस्टम इसकी और टारगेट की डायरेक्शन के बारे में सटीक जानकारी देता है।

आखिर T-90 टैंक में क्या अपग्रेड होगा?

T-90 के अपग्रेड के लिए DRDO और BEL ने कई नई टेक्नोलॉजी और सेंसर डेवलप किए है। इनमें से कई का पहले से इस्तेमाल अर्जुन टैंक में किया जा रहा है। सुपर भीष्म अपग्रेड के लिए मुख्य तौर पर T 90 में एडवांस लेजर वार्निंग रिसीवर, चार सेंसर लगाए जाएंगे। न्यू कमांडर साइट ऑप्टिकल सेंसर, स्यूमिलेट टेस्ट एंड इनक्यूरेटर किट लगेगी। ईएसएसए थर्मल इमेजिंग साइट और इंफ्रारेड साइट मिलेगी, जिससे दुश्मन पर सटीक निशाना लगाया जा सके। इसके अलावा आटोमैटिक टारगेट टैकर, डिजिटल बैरेसटिक कंप्यूटर, नया 1500 हार्स पावर का इंजन भी लगाया जाएगा। जिससे ये और ताकतवर हो जाएगा। इसके बाद भारत के पास जो T 90 टैंक होगा दुनिया का सबसे ताकतवर T 90 टैंक होगा।

तो भारत के पास 1100 T-90 भीष्म टैंक हैं। ये टैंक अल्जीरिया, अजरबैजान, इराक, सीरिया, तुर्कमेनिस्तान, युगांडा और वियतनाम में भी हैं। भारत में तमिलनाडु के अवाडी की हैवी व्हीकल्स फैक्टरी में T-90 टैंकों को तैयार किया जाता है। भीष्म के अंदर लगने वाले कई सारे पार्ट्स स्वदेशी हैं।

पिछले 12 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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