Tawang Clash के बाद China बॉर्डर पर Zorawar Tank तैनात करने की तैयारी में India

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चीन की सीमा पर अब हिंदुस्तान के जोरावर का जोर चलेगा। ड्रैगन को सबक सिखाने के मकसद से अब भारत की सीमा पर आधुनिक टैंकों जोरावर को तैनात करने की तैयारी कर रहा है। इस बेहद फुर्तीले टैंक को चीन से सटी सीमा पर तैनात किया जाएगा। ये टैंक सीमा पर मुश्किल से मुश्किल हालात में दुश्मन को हर मोर्चे पर परास्त करने के लिए डिजाइन किए गया हैं। 

ज़ोरावर यानी पंजाबी भाषा में बहादुर और ताकतवर, ये भारतीय सेना के अत्याधुनिक लाइट टैंक का नाम है। ये एक आर्मर्ड फाइटिंग व्हीकल यानी AFV है। ज़ोरावर टैंक को डिफेंस रिसर्च एंड डेवलेपमेंट ऑर्गेनाइजेशन यानी डीआरडीओ ने डिजाइन किया है। इसे बनाने का काम लार्सेन एंड टुर्बो को दिया गया है। अगले दो साल में इनका प्रोड्क्शन शुरू हो जाएगा। भारतीय सेना को ऐसे 350 टैंक्स की जरुरत है। ये टैंक मात्र 25 टन के होंगे। इन्हें चलाने के लिए सिर्फ तीन लोगों की जरुरत होगी।

असल में ये देश का पहला ऐसा टैंक होगा, जिसे माउंटेन टैंक बुलाया जा सकता है। हल्का होने की वजह से इसे उठाकर कहीं भी पहुंचाया जा सकेगा। माना जा रहा है कि इसकी मुख्य तोप 105 मिलिमीटर की होगी। ऑटोमैटिक लोडर होगा, रिमोट वेपन स्टेशन होगा, जिसमें 12.7 मिलिमीटर की हैवी मशीन गन इस पर तैनात होगी। साथ ये टैंक हाईटेक टेक्नोलॉजी से भी लैस होगा। ज़ोरावर लाइट टैंक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन इंटीग्रेशन, एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम, हाई डिग्री ऑफ सिचुएशनल अवेयरनेस जैसी तकनीके होंगी। साथ ही इसमें मिसाइल फायरिंग की क्षमता होगी। इसमें दुश्मन के ड्रोन्स को मार गिराने की यंत्र, वॉर्निंग सिस्टम भी लगे होंगे। यानी ये मीडियम बैटल टैंक्स के बजाय भारतीय सेना की ज्यादा मदद करेंगे।

भारतीय सेना के पास जो फिलहाल टैंक हैं। वो समतल और रेगिस्तान के लिए हैं। चाहें फिर रूसी टी-72 हो या फिर टी-90 या फिर स्वदेशी अर्जुन टैंक, ये सभी टैंक 45-70 टन के हैं। जबकि प्रोजेक्ट जोरावर के तहत लाइट टैंक करीब 25 टन के होंगे। चीन से सटी एलएसी पर तैनात करने के लिए दुनिया के सबसे उंचे दर्रों से होकर गुजरना पड़ता है। ऐसे में टी-72 और बाकी भारी टैंकों के लिए एलएसी पहुंचने में खासी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि भारतीय सेना हल्के टैंक लेना चाहती है।

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