भारत की वो सबसे खतरनाक है कमांडो फोर्स, जो दुश्मनों को पल भर में चटा देती है धूल

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भारत में आर्मी, नेवी और एयरफोर्स जैसी तीन प्रमुख सेनाएं तो हैं ही, पर इन तीनों की अपनी अलग-अलग स्पेशल फोर्सेज हैं जो और भी ज्यादा घातक हैं दुनिया में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती हैं। आज हम आपको भारत की 8 स्पेशल फोर्सेज के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी ट्रेनिंग और और जांबाजी के किस्से सुनकर आप दांतों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर हो जाएंगे।

सबसे पहले बात करते हैं MARCOS कमांडो की। आपको अमेरिकन मरीन नेवी सील के बारे में तो पता होगा, पर क्या आप जानते हैं कि अपने देश में भी मरीन कमांडो यानी मार्कोस MARCOS मौजूद हैं। जिन्हें सर्वश्रेष्ठ मरीन कमांडो की लिस्ट में शामिल किया जाता है। इन्हें भारत की सबसे खतरनाक स्पेशल फोर्स माना जाता है। इन्हें पानी में युद्ध करने में महारथ हासिल होती है। बेहद कड़ी फिजिकल ट्रेनिंग से गुजर कर ही मरीन कमांडो बना जाता है। सेलेक्शन के बाद 5 हफ्ते की फिजिकल ट्रेनिंग होती है। जिसे हेल्स वीक बोलते हैं। इन पांच हफ्तों में इतने भयंकर टेस्ट होते हैं कि 80 फीसदी ऐप्लिकेंट सेलेक्शन के पहले ही राउंड में बाहर हो जाते हैं।

मारकोस के बाद नंबर आता है पैरा कमांडोज़ का।इंडियन आर्मी की सबसे ज्यादा ट्रेंड फोर्स को पैरा कमांडो कहते हैं। इनकी ट्रेनिंग दुनिया में सबसे कठिन मानी जाती है। मेन्स एक्सपी वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार इन्हें रोज 20 किलोमीटर की दौड़ में शामिल होने पड़ता है।दौड़ भी ऐसी कि हर जवान के पीठ  पर करीब 60 किलो वजन लदा होता है। पैरा कमांडो में सिर्फ उन्हीं जवानों का सेलेक्शन होता है जो बेहद फिट, मोटिवेटेड और समझदार होते हैं। पाकिस्तान के साथ 1971 का युद्ध हो या कारगिल का युद्ध, इसमें पैरा कमांडो का अहम योगदान दिया था।

पैरा कमांडोज़ के बाद नंबर आता है गरुड़ कमांडो फोर्स का।भारत के सबसे खूंखार कमांडो में गरुड़ कमांडो का नाम लिया जाता है। खतरनाक हथियारों से लैस इंडियन एयरफोर्स के ये कमांडो दुश्मन को खत्म करने के लिए जाने जाते हैं। इनकी ट्रेनिंग ऐसी होती है कि ये बिना कुछ खाए हफ्ते तक संघर्ष कर सकते हैं। 2000 कमांडो वाली गरुड़ कमांडो फोर्स हवा से जुड़े ऑपरेशन, हवा से जमीन पर उतरकर करने वाली लड़ाई करने और रेस्क्यू जैसे ऑपरेशन को अंजाम देने में सक्षम होती है। गरुड़ कमांडो की सबसे ज्‍यादा तैनाती जम्मू और कश्मीर में होती है।इस फोर्स का गठन साल 2004 में किया गया।

गरुड़ कमांडो फोर्स के बाद बात आती है कोबरा कमांडो फोर्स की। इस कमांडो टीम को साल 2008 में बनाया गया था। कोबरा कमांडो फोर्स का पूरा नाम कमांडो बटालियन फॉर रिजॉल्यूट एक्शन है। इनकी तीन महीने की ट्रेनिंग होती है। फिलहाल इस फोर्स में 10 हजार कमांडो हैं। आमतौर पर इन्हें गोरिल्ला ट्रेनिंग और नक्सल वॉरफेयर के लिए ट्रेन्ड किया जाता है। इन्हें दुनिया की बेस्ट पैरामिलिट्री फोर्स में गिना जाता है। ये दुश्मनों पर लगातार हमला करने में एक्सपर्ट होते हैं। राष्ट्रपति भवन और संसद समेत कई महत्वपूर्ण इमारतों की सुरक्षा का काम इनके पास है।

जब भी देश में बड़े आतंकी हमले हुए हैं चाहे वो 26/11 हो या फिर अक्षरधाम मंदिर का हमला हो। एनएसजी कमांडो फोर्स ने ही आतंकियों को ढेर किया है। इन्हे ब्लैक कैट्स भी कहा जाता है। एनएसजी का पूरा नाम राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड है। इस फोर्स को साल 1984 में बनाया गया था। फिलहाल इसमें 10 हजार एक्टिव कमांडो हैं। जिन्हें अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग टीमों में बांटा गया है। ये आतंकरोधी अभियानों में पूरी तरह से ट्रेनेड होते हैं। इसमें देश के किसी भी सैन्य, अर्द्धसैनिक बल या पुलिस से जवान शामिल हो सकते हैं। इनकी ट्रेनिंग 14 महीने की होती है। ये गृह मंत्रालय के तहत काम करते है। इन कमांडो को वीआईपी सिक्योरिटी, हाईजैकिंग रोकने, बम का पता लगाने जैसे अन्य कामों में भी तैनात किया जाता हैं।

अब बात करते हैं प्रधानमंत्री की सुरक्षा करने वाले एसपीजी कमांडो फोर्स की। एसपीजी कमांडो बनाने की वजह थी।साल 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या। 1985 में एसपीजी फोर्स बनाई गई। इस फोर्स में कुल 3000 एक्टिव कमांडो हैं। जिनका काम होता है प्रधानमंत्री की सुरक्षा। इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इकलौते हैं, जिनका प्रोटेक्शन एसपीजी के हाथ में है। ये अक्सर सूट-बूट में दिखते हैं। सूट के अंदर कई तरह के हथियार छिपे होते हैं। हाथ में क्लोज कॉम्बैट के लिए असॉल्ट राइफल होती है। अगर कोई भी दुश्मन प्रधानमंत्री के पास आया तो सेकेंड्स में उसकी मौत तय है। इनके पास करीब एक दर्जन हथियार होते हैं। एसपीजी में आईपीएस , सीआईएसएफ, बीएसएफ और सीआरपीएफ के लोगों की भर्ती की जाती है।

अब बात करते हैं स्पेशल फ्रंटीयर फोर्स की जिससे टू इस्टैब्लिशमेंट या टूटू फोर्स भी कहा जाता है। इस फोर्स का गठन 14 नवंबर 1962 को हुआ था।। जोकि एक पैरामिलिट्री स्पेशल फोर्स है। ये आतंकवादियों से लड़ने में, बंदियों को छुड़ाने में, कोवर्ट ऑपरेशन करने और अपरंपरागत युद्ध में एक्सपर्ट होते हैं। ये रॉ के साथ मिलकर काम करते हैं। इनको भी गुरिल्ला वॉरफेयर के तौर तरीके, हथियार, पैराशूट जंप की खास ट्रेनिंग दी जाती है। कारगिल युद्ध और मुंबई में हुई आतंकी घटना में भी इन जवानों ने वीरता का परिचय दिया था। सियाचिन की चोटियों पर 'ऑपरेशन मेघदूत' में एसएफएफ के जवान शामिल थे।

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