दुश्मनों के छक्के छुड़ाने को तैयार भारत का T-90 Bhishma Tank, नया वर्जन बेहद ताकतवर

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T-90 Bhishma टैंक का MK3 मॉडल बनकर तैयार है. भारत का ये मेन बैटल टैंक अब ज्यादा भरोसेमंद और ताकतवर बन चुका है. इसका पहला बैच चेन्नई के अवादी में मौजूद हैवी व्हीकल फैक्ट्री से T-90 भीष्म मार्क 3 टैंक का नया बैच निकल गया है. दुश्मन के छक्के छुड़ाने के लिए इसे जल्द ही इंडियन आर्मी की आर्मर्ड व्हीकल फ्लीट में शामिल किया जाएगा.
T-90 वैसे तो रूस का बनाया टैंक है, लेकिन भारत ने इसका नाम Bhishma रखा है. हम पहले से ही इनका इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन अब इसके नए वर्जन में टैंक की फायर पावर और सिक्योरिटी सिस्टम में कई बड़े बदलाव किए गए हैं. साथ ही इसकी ऑपरेशनल कैपेबिलिटी भी बढ़ाई गई है.


भीष्म टैंक की खासियतों की बात करें तो, फिलहाल इस टैंक की खासियतों को गुप्त रखा गया है लेकिन डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसमें 125 मिलिमीटर स्मूथबोर गन लगी है. इसकी ऑपरेशनल रेंज 550 किलोमीटर और स्पीड 60 किलोमीटर प्रतिघंटा है. इस टैंक में एक बार में 43 गोले स्टोर किए जा सकते हैं. इस टैंक में तीन लोग बैठ सकते हैं.


इसमें डिजिटल कम्यूनिकेशन सिस्टम लगाया गया है. ऑटोट्रैकर लगा है. TKN -4S AGAT-M सीडीआर साइट लगी है. एलसीडी मॉनिटर, डिजिटल बैलिस्टिक कंप्यूटर, एंटी-थर्मल आईआर कोटिंग और इनवार जीएलजीएमएस लगाया गया है. यानी इसमें स्वदेशी यंत्रों का इस्तेमाल बढ़ा दिया गया है. इंडियन आर्मी में करीब 1200 Bhishma टैंक सेवा दे रहे हैं. लेकिन हाल ही में भारत ने 464 नए टैंक्स का ऑर्डर दिया है. भारत ने जो नई डील रूस के साथ की है, उसके मुताबिक, साल 2025 तक रूस 1657 भीष्म टैंक को रेडी करके देगा.


इस रूसी टैंक्स का इस्तेमाल और भी कई देशों में किया जा रहा है. हाल ही में यूक्रेन से चल रही जंग में भी रूस ने T-90 टैंक का इस्तेमाल किया. इसके अलावा इस टैंक ने दागेस्तान के युद्ध, सीरियन नागरिक संघर्ष, डोनाबास में युद्ध, 2020 में हुए नागोमो-काराबख संघर्ष में काफी ज्यादा मदद की है.


T90 भीष्म टैंक के अलावा भारतीय सेना के बेड़े में 'अर्जुन' नाम का ऐसा शक्तिशाली टैंक शामिल हैं जो युद्ध में दुश्मन को कदम पीछे खींचने पर मजबूर कर दे. इसकी तुलना T-90 से होती है. ये टैंक इंडियन आर्मी में साल 2004 से सर्विस दे रहे हैं. अर्जुन टैंक थर्ड जनरेशन का बैटल टैंक है, जिसमें 120mm की तोप लगी है. अर्जुन टैंक में चार लोगों के बैठने की जगह है. इसके क्रू में कमांडर, गनर, लोडर और ड्राइवर रहते हैं. अर्जुन टैंक के कई वैरिएंट्स डिवेलप किए गए हैं. मेन जेनरेशन में Arjun MK1 और Arjun MK1A है. इसके अलावा इसी डिजाइन के बेसिस पर भीम SPH, अर्जुन कैटापुल्‍ट सिस्‍टम, ब्रिज लेयर टैंक, अर्जुन ARRV को भी डिवेलप किया गया है.


-10.6 मीटर लंबे Arjun MK1 टैंक का वजन 58.5 टन है. वहीं Arjun MK1A का वजन 68 टन तक पहुंच जाता है.
-अर्जुन टैंक की फ्यूल कैपेटिसी 1,610 लीटर है. Arjun MK1 टैंक की ऑपरेशनल रेंज 450 किलोमीटर है. वहीं, इसके अडवांस्‍ड वैरिएंट Arjun MK1A की रेंज का खुलासा नहीं किया गया है.
-Arjun MK1 टैंक मैक्सिमम 67 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से आगे बढ़ सकता है. जबकि, Arjun MK1A की टॉप स्‍पीड 58 किलोमीटर प्रतिघंटा है.
-Arjun MK1 में 'कंचन' कम्‍पोजिट मॉड्युलर आर्मर लगा है. वहीं, Arjun MK1A में कंचन का एडवांस्ड वर्जन लगा है. दोनों ही वैरिएंट्स में मल्‍टी-स्‍पेक्‍ट्रल मोबाइल कैमोफ्लॉज है. इसके अलावा ऐंटी-इन्‍फ्रारेड/ऐंटी-थर्मल पेंट होता है. दोनों में ही IR जैमर के साथ अडवांस्‍ड लेजर वार्निंग काउंटरमेजर सिस्‍टम (ALWCS) लगा है. Arjun MK1 में 12 स्‍मोक ग्रेनेड्स होते हैं जबकि Arjun MK1A में 16 स्‍मोक ग्रेनेड्स.
-भारतीय सेना में 124 Arjun MK1 टैंक सेवा दे रहे हैं. इसके अलावा दो Arjun MK1A प्रोटोटाइप भी सर्विस में हैं. इसके अलावा 118 Arjun MK1A टैंकों का ऑर्डर दिया जा चुका है. सेना के पास अर्जुन की चेसिस पर आधारित 40 130mm M-46 कैटापुल्‍ट्स भी हैं.

इसके अलावा भारत टी-72 टैंक का इस्तेमाल भी काफी समय से कर रहा है. टी-72 को भारत में "अजेय" के नाम से जाना जाता है. भारत ने यूरोप के बाहर रूस से पहला टी-72 टैंकर खरीदा था. टी-72 यानी अजेय को 1960 में रूस में बनाया गया और 1973 में सोवियत सेना में शामिल किया गया था.


अजेय का वजन 41 हजार किलोग्राम है. इसमें तीन जवान यानी क्रू आसानी से बैठ सकते है. इस टैंक के कैनन की लेंथ 9,530 एमएम है. अजेय टैंक की ऊंचाई 2,190 एमएम है, चौड़ाई 3,460 एमएम. टी-72 टैंक सड़क पर आसानी से अधिकतम 60 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम है. ये कच्चे रास्तों पर 35 से 45 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है. इसके साथ ही इस टैंक की फ्यूल कैपेसिटी 1,590 लीटर की है. मौजूदा समय में इंडियन आर्मी में करीब 2400 टी-72 टैंक सर्विस दे रहे हैं. हालांकि इन टैंक्स को मेंटनेंस या अपग्रेड के लिए फ्रांस, पोलैंड और रूस भेजा जाता है. जिसमें काफी खर्च आता है. हालांकि, इंडियन आर्मी टी-72 टैंक को अपग्रेड करने वाली है, जिसके लिए फिलहाल रक्षा मंत्रायल ने सेना को अपने टी-72 टैंकों के लिए मौजूदा 780 हॉर्स पावर के इंजन की जगह 1000 हॉर्स पावर के इंजन को लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इसके लिए 2,300 करोड़ रुपये की योजना में 200 इंजन सीधे इम्पोर्ट किए जाएंगे, और 800 इंजन भारत में ही बनाए जाएंगे.

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