सूडान में फंसे भारतीयों के साथ खड़ा है भारत, ऑपरेशन कावेरी के जरिए निकाल रहा है बाहर

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सूडान हो या अफगानिस्तान, कुवैत हो या यमन, यूक्रेन हो या लीबिया, हर वक्त, हर जगह और हर दम भारत अपने नागरिकों के साथ खड़ा है। इन दिनों भारत के माथे की चिंता सूडान के गृहयुद्ध ने बढ़ा रखी है। क्योंकि इस देश में भारत के हजारों नागरिक जो फंस गये हैं। इन्हीं को निकालने के लिए भारत ने एयरलिफ्ट प्लान तैयार किया है। आईये जानते हैं कि सूडान से भारतीयों को निकालने का प्लान क्या है, और भारत किस तरह से अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालेगा। 

नार्थ अफ्रीका का सूडान इन दिनों जल रहा है, तबाह हो रहा है, इस तबाही में कई जिंदगियां भी झुलस रही हैं। क्योंकि सूडान में दो बड़े सैन्य अधिकारियों के वफादार सैनिकों ने देश को बर्बादी की राह पर धकेल दिया है। सूडानी आर्म्ड फोर्सेस के चीफ अब्देल फतह अल बुरहान और रैपिड सपोर्स फोर्सेस के लीडर मोहम्मद हमदान दगालो की आपसी जंग ने पहले से बर्बाद देश को और तबाह कर दिया है। FAS और RSF के पास न तो हथियारों की कमी है, न ही सैन्य संसाधनों की। 

बुरहान और दगालो की इस जंग में जो भी जीतेगा, वही सूडान का अगला राष्ट्रपति बनेगा। हारने वाले का देशनिकाला, गिरफ्तारी या मृत्युदंड तय है। ये गृहयुद्ध लंबा भी चल सकता है और सूडान का विभाजन भी हो सकता है। हिंसक झड़पों में अबतक 413 लोगों की मौत हो चुकी है।  हालात ये हैं कि हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर भी धराशायी होने लगा है। कई अस्पताल हिंसा के चलते बंद होने की कगार पर आ गए हैं। वहीं सूडान में कई देशों के नागरिकों के साथ साथ कई भारतीय भी फंसे हुए हैं। इन्हीं भारतीयों को निकालने के लिए मोदी सरकार ने एक्शन प्लान तैयार कर लिया है।

भारत ने वहां फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए इंडियन एयरफोर्स के दो C-130J विमानों को सऊदी अरब के जेद्दा में उतार दिये। जबकि इंडियन नेवी का जहाज INS सुमेधा सूडान बंदरगाह पर लंगर डाल दिया है। इस पर विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सूडान में फंसे भारतीयों की सुरक्षा के लिए हम हमारे दूतावास के संपर्क में हैं। किसी भी इमरजेंसी की स्थिति से निपटने के लिए भी सरकार ने योजनाएं बना ली हैं। सूडान की राजधानी खार्तूम में हिंसा के बाद एयरपोर्ट और बड़ी संख्या में विमान क्षतिग्रस्त हो गए हैं, ऐसे में सरकार सड़क मार्ग का इस्तेमाल करके भी अपने नागरिकों को वहां से निकालने की प्लानिंग में जुटी हुई है। 

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक सूडान में 4 हजार के आसपास भारतीय हैं। जिनमें से ज्यादातर भारतीय चार शहरों में बसे हुए हैं। इनमें से ओमडुरमैन, कसाला, गेडारेफ  या अल कादरीफ और वाड मदनी शामिल है।  इनमें से दो शहरों की दूरी राजधानी खार्तूम से 400 किलोमीटर से भी ज्यादा है। तो वहीं एक शहर की दूरी करीब 200 किलोमीटर है। 

एक शहर तो राजधानी से सटा हुआ है और उसकी खार्तूम से दूरी मात्र 25 किलोमीटर है। सबसे ज्यादा चिंताजनक बात ये है कि इन चारों शहरों में से किसी में भी इंटरनेशनल एयरपोर्ट नहीं है। सूडान में दो ही अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हैं। एक राजधानी खार्तूम में तो दूसरा पोर्ट सूडान में है। हालांकि, एयरस्ट्राइक के बीच यहां से लोगों को एयरलिफ्ट करना भी बेहद मुश्किल है। ये तभी संभव है, जब सीजफायर हो जाए। इसी लिए भारत अब सड़क रास्ते के जरिए अपने लोगों को जेद्दा पहुंचाएगा। 

वहीं भारत सरकार सूडान में फंसे नागरिकों को वापस लाने के लिए कई देशों से भी संपर्क किया है। क्योंकि ये देश भी खुद अपने नागरिकों को वहां से निकालने की जद्दोजहद कर रहे हैं। इस वक्त सूडान से भारत और अमेरिका समेत दुनिया के कई दिग्गज देश अपने नागरिकों को वापस बुला रहे हैं। फ्रांस भी अपने नागरिकों की वापसी के लिए युद्धस्तर पर अभियान चला रहा है। इसी को लेकर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने बताया है कि सूडान के अधिकारियों के साथ साथ सऊदी अरब, यूएई, मिस्र, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के संपर्क में भी है। भारत हर कीमत पर चाहता हैं कि उसके नागरिक सही सलामत अपने वतन वापस आ जाएंगे।

साल 2022 में रूसी सेना के आक्रमण के बाद यूक्रेन में फंसे हुए भारतीयों को निकालने के लिए ‘ऑपरेशन गंगा’ शुरू किया था। जिसमें यहां फंसे 18,000 से अधिक भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया था। साल 2021 में अफगानिस्तान से भारतीयों को निकालने के लिए ऑपरेशन देवी शक्ति चलाया गया इस रेश्क्यू ऑपरेशन के जरिए 800 लोगों को निकाला गया था। दरअसल अफगानिस्तान पर तालिबान ने कब्जा कर लिया था। इनके अलावा साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान दुनिया के कई देशों में फंसे 60 लाख से अधिक भारतीय छात्र और नागरिकों निकाला गया था। जिसे ‘वंदे भारत मिशन’ नाम दिया गया था। साल 2016 में ऑपरेशन संकट मोचन के जरिए साउथ सूडान में फंसे 600 भारतीय नागरिकों को भारत सरकार ने दो C-17 विमान से बाहर निकाला था। उस वक्त तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज थीं। साल 2015 में यमन में सरकार और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष हुआ।

जिसके बाद भारत ने अपने नागरिकों को निकालने के लिए एयरलिफ्ट ऑपरेशन चलाया। जिसे ‘ऑपरेशन राहत’ नाम दिया गया। इस ऑपरेशन में करीब 4,000 भारतीयों को निकाला गया था। साल 2011 में लीबिया से भारतीयों को निकालने के लिए ऑपरेशन सेफ होमकमिंग की शुरूआत की। जिसमें  15,400 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया। साल 2006 में लेबनानी उग्रवादी समूह, इज़राइल और हिजबुल्लाह के बीच युद्ध छिड़ गया था। जिसके बाद भारतीय नौसेना ने ‘ऑपरेशन सुकून’ चलाया। इस ऑपरेशन के जरिए भारतीय नौसेना ने 1,764 भारतीयों, 112 श्रीलंकाई, 64 नेपाली और 7 लेबनानी सहित 2,280 लोगों को युद्ध ग्रस्त क्षेत्र से बचाया था। साल 1990 की बात हैं कुवैत में फंसे करीब दो लाख नागरिकों को निकाला था। दो महीने तक ये अभियान चला था। एयर इंडिया को अब तक के सबसे बड़े एयर लिफ्ट मिशन के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था।

इसी तरह भारत हमेशा से विदेश में रहने वाले अपने लोगों के साथ उनके बुरे वक्त पर खड़ा होकर हमेशा मदद करता रहा है। 

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