भारत को जल्द ही तीसरा स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर, समुद्र में कितनी मजबूत होगी भारतीय नौसेना?

Home   >   खबरमंच   >   भारत को जल्द ही तीसरा स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर, समुद्र में कितनी मजबूत होगी भारतीय नौसेना?

26
views

कुछ चुनिंदा देश लगातार अपनी समुद्री सीमाओं को और सुरक्षित बनाने के लिए एयरक्राफ्ट कैरियर पर फोकस बढ़ा रहे हैं. पेंटागन के मुताबिक, चीन 5 एयरक्राफ्ट  कैरियर बनाने का प्लान कर चुका है, जिसमें दो बना भी चुका है और तीसरे फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर का सी ट्रायल बीते दिनों शुरू हो चुका है, जिसपर हम पहले भी एक डिटेल्ड वीडियो बना चुके हैं, जिसका लिंक आपको डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा.


लेकिन, अब चीन को टक्कर देने के लिए भारत भी अपने तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर के मैनुफैक्चरिंग को कभी भी हरी झंडी दे सकता है. इसकी पुष्टि हाल ही में डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने अपने एक समाचार पत्र को दिए इंटरव्यू में की. उन्होंने कहा कि "बहुत जल्द तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर की शुरुआत हो जाएगी. ये पूरी तरह से स्वदेशी होगा. ये विक्रांत क्लास का दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर होगा. इसे बनने कम समय लगेगा. एयरक्राफ्ट कैरियर का डिस्प्लेसमेंट 45 हजार टन होगा. ये अपने ऊपर 28 फाइटर जेट्स और हेलिकॉप्टर तैनात कर सकेगा. हम तीन पर ही नहीं रुकेंगे. हम पांच-छह कैरियर और बनाएंगे."


INS Vikrant को सितंबर 2022 में कमीशन किया गया था. आईएनएस विक्रांत के अलावा भारत के पास एक और एयरक्राफ्ट कैरियर है, जिसका नाम आईएनएस विक्रमादित्य है। इसे 2013 में रूस से मंगाया गया था. समुद्री एयरक्राफ्ट कैरियर रखना लॉन्ग टर्म प्लान का हिस्सा है, इसके जरिए डेक से फाइटर जेट को लॉन्च और रिकवर कर सकते हैं. दोनों फिलहाल इंडियन नेवी की सर्विस में लगे हैं.


भारत जिस तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर को बनाने का प्लान कर रहा है, उसका नाम IAC-II बताया जा रहा है. जो कि भारत का दूसरा स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर होगा. जिसका डिस्पलेसमेंट 45 हजार टन रहेगा. लंबाई 860 फीट, बीम 203 फीट, ऊंचाई 194 फीट और ड्रॉट 28 फीट होगी. इसमें 14 डेक होंगे. इसे चार जनरल इलेक्ट्रिक इंजन और दो इलेकॉन कोगैग गीयरबॉक्स से ताकत मिलेगी. प्रोपल्शन के लिए दो शाफ्ट होंगे. ये मैक्सिमम 56 km/hr की रफ्तार से समंदर में चल सकेगा. इसकी रेंज 15 हजार km होगी. इसपर एक बार में 196 ऑफिसर औऱ 1449 नौसैनिक एक बार में तैनात हो सकेंगे. बचाव के लिए इस पर कवच एंटी-मिसाइल सिस्टम और मारीच एंडवांस्ड टॉरपीडो डिफेंस सिस्टम लगे होंगे. इसके अलावा सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल बराक 8 के 32 सेल होंगे. 4 ओटोब्रेड ड्यूअल परपज गन और 4 AK 630 CIWS गन लगी होगी. इस पर राफेल एम, मिग-29के, तेजस फाइटर जेट, टेडबीएफ फाइटर जेट या एएमसीए फाइटर जेट तैनात हो सकते हैं. इसके अलावा कामोव, अपाचे, प्रचंड, एमएच-60आर या ध्रुव हेलिकॉप्टर तैनात हो सकता है.


पिछले साल जनवरी में संसदीय स्टैंडिंग कमेटी ने तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर की जरूरत बताई थी. साथ ही भारत का मकसद- चीन की बराबरी में एयरक्राफ्ट कैरियर खड़े करना है. ताकि टक्कर दी जा सके.
चीन के पास अभी दो ऑपरेशनल एयरक्राफ्ट कैरियर हैं - लिओनिंग और शांदोंग। 1 मई को, चीन ने अपनी नेक्स्ट जनरेशन के एयरक्राफ्ट कैरियर फुजियान का सी ट्रायल शुरू कर चुका है. ये चीन का तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर है और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट से लैस पहला है.


तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर अगर भारतीय नौसेना में शामिल होता है तो इंडियन नेवी की ताकत हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में कई गुना बढ़ जाएगी. जिससे चीन की हरकतों पर विराम लगेगा. नए एयरक्राफ्ट कैरियर के शामिल होने के बाद भारत का बंगाल की खाड़ी, अरब सागर और हिंद महासागर में डॉमिनेंस बढ़ जाएगा. क्योंकि एयरक्राफ्ट के साथ सबमरीन और कई डिस्ट्रॉयर्स का बेड़ा भी रहता है.


इंडिया में एयरक्राफ्ट कैरियर्स की शुरुआत की बात करें तो, भारत ने अपना पहला कैरियर HMS हरक्यूलिस साल 1961 में ऑपरेट किया था। इसे यूके से सेकेंड हैंड खरीदा गया था और इसका नाम बदलकर 'आई.एन.एस. विक्रांत' कर दिया गया था. साल 1997 में रिटायर होने से पहले इसने पूर्वी मोर्चे पर 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. भारत का दूसरा कैरियर HMS हर्मीस था, जिसे यूके से ही खरीदा गया था. इसका नाम बदलकर आईएनएस विराट कर दिया गया. इसे 1987 में शामिल किया गया था और 2017 में इसे रिटायर कर दिया गया. एयरक्राफ्ट कैरियर किसी भी देश के लिए समंदर में पूरे ऑपरेशन के कमांड, कंट्रोल और कॉर्डिनेशन की रीढ़ होते हैं और इसलिए बेहद अहम भी है. भारत के लिए तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर इसलिए भी जरूरी है क्योंकि अगर एक एयरक्राफ्ट सर्विस और मेंटेनेंस पर जाता है तो देश में सिर्फ एक ही एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात रहेगा, जो कि सुरक्षा के लिहाज से देश के लिए ठीक नहीं है.  


इसके अलावा अगर बात करें बाकी देशों की तो, अमेरिका के पास 11 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं. ये सभी परमाणु शक्ति से संचालित हैं, जिन्हें सुपरकैरियर भी कहा जाता है. ये समुद्र में अमेरिकी सैन्य शक्ति के प्रतीक हैं. चीन के पास 3 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं. इनमें से तीसरे टाइप 003 फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर को चंद दिनों पहले लॉन्च किया गया है. ये कैरियर अपने सी ट्रायल्स पर है. भारत के पास 2 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं. इसमें से पहले आईएनएस विक्रमादित्य को भारत ने रूस से खरीदा है, जबकि दूसरा आईएनएस विक्रांत स्वदेशी तकनीक पर निर्मित पहला विमानवाहक पोत है. इटली के पास 2 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं. इसमें से कैवोर एयरक्राफ्ट कैरियर को 2008 में लॉन्च किया गया था, जबकि दूसरा ग्यूसेप गैरीबाल्डी एयरक्राफ्ट कैरियर 1985 से सर्विस में है. जापान के पास कुल 2 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं। इनमें से जेएस कागा को हाल में ही हेलीकॉप्टर कैरियर से एयरक्राफ्ट कैरियर में मोडिफाई किया गया है. जापान के दूसरे एयरक्राफ्ट कैरियर जेएस इजिमो को भी अपग्रेड करने का प्लान है. यूनाइटेड किंगडम यानी ब्रिटेन के पास 2 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं. इन दोनों के नाम नाम एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ और एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स हैं. फ्रांस के पास 1 एयरक्राफ्ट कैरियर है, जिसका नाम चार्ल्स द गॉल है. फ्रांस नई पीढ़ी के एक नए एयरक्राफ्ट कैरियर का निर्माण कर रहा है, जो अत्याधुनिक तकनीकों से लैस होगा. रूस के पास सिर्फ 1 एयरक्राफ्ट कैरियर एडमिरल कुजनेत्सोव है. इसे 1991 में रूसी नौसेना में शामिल किया गया था. हालांकि, रूस इसका इस्तेमाल बहुत कम करता है. पाकिस्तान के पास एक भी एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं है. कंगाली से जूझ रहे पाकिस्तान के पास एयरक्राफ्ट कैरियर को न तो खरीदने की क्षमता है और ना ही उसके ऑपरेशन और मेंटीनेंस लागत को उठाने की.

 

Comment

https://manchh.co/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!