Indian Navy में शामिल हुआ INS इंफाल क्यों है इतना खास ?

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इंडियन नेवी के प्रोजेक्ट 75बी के तहत बने स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल विध्वंसक INS इंफाल में पहली बार एक्सटेंडेड रेंज Brahmos को भी इस्तेमाल किया गया है

 

इंडियन नेवी को उसका सबसे ताकतवर और टेक्नोलाॅजी के मामले में अब तक का सबसे एडवांस डिस्ट्रॉयर आईएनएस इंफाल मिल गया है। समुद्र में भारत की ताकत में ये एक फोर्स मल्टीप्लाॅयर होने जा रहा है क्योंकि विशाखापत्तनम क्लाॅस के इस तीसरे डिस्ट्रॉयर  में कई ऐसे टेक्नोलाॅजिकल एडवांसमेंट का इस्तेमाल किया गया है। जोकि अभी तक इंडियन नेवी के किसी भी बैटल शिप में नहीं थे। डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह की अगुवाई में इसे इंडियन नेवी में शामिल किया गया। आईएनएस इंफाल नेवी की वेस्टर्न कमांड के तहत काम करेगा। पिछले महीने ही इस शिप से ब्रम्होस के एक्सटेंडेंट रेंज वैरियेंट का सफल लांच किया गया था। आईएनएस इंफाल पहला शिप है जिसे ब्रम्होस मिसाइल के एक्सटेंडेंट वेंरियेंट से लैस किया गया है।

 

प्रोजेक्ट 75बी के तहत बन रहे 4 स्टील्थ डिस्ट्रॉयर 

INS इंफाल इंडियन नेवी के विशाखापत्तनम क्लाॅस का डिस्ट्रॉयर है। इसे नेवी के प्रोजेक्ट-15 बी के तहत बनाया गया है। जिसमें कुल 4 स्टील्थ डिस्ट्रॉयर का निर्माण होना है। इससे पहले आईएनएस विशाखापत्तनम और आईएनएस मुरमुगाओ को नेवी में शामिल किया जा चुका है। आईएनएस इंफाल तीसरा शिप है। इन शिप्स को नेवल डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है। चैथे शिप आईएनएस सूरत का निर्माण मझगांव डाॅकयार्ड में चल रहा है। आईएनएस इंफाल इंडियन नेवी का पहला ऐसा शिप है जिसका नाम भारत के नार्थ ईस्ट रीजन के किसी शहर के नाम पर रखा गया है। इसके जरिए डिफेंस मिनिस्ट्री ने भारत की आजादी की लड़ाई में नार्थ ईस्ट रीजन के योगदान को भी याद किया है। भारत ने प्रोजेक्ट 15 बी के तहत चार स्टील्थ डिस्ट्रॉयर के निर्माण के प्रोजेक्ट को साल 2011 में मंजूरी दी थी। जिसके लिए 29]700 करोड़ रुपए का बजट रखा गया था।

 

INS इंफाल के मुख्य फीचर्स

- 163 मीटर लंबाई

- 7400 टन वजन

- 4 गैस टरबाइन इंजन का इस्तेमाल

- 30 नाॅट यानी 56 किमी प्रति घंटे की स्पीड

- 42 दिन तक समुद्र में रह सकता है

- 300 नौसैनिक तैनात किए जा सकते हैं

- 4000 नाॅटिकल मील की रेंज है 

 

 INS इंफाल कितना खतरनाक?

- 32 बराक-8 मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइलों को स्टोर किया जा सकता है

- 16 ब्रम्होस सबफेस टू सरफेस मिसाइलों को भी स्टोर किया जा सकता है

- 127MM की मेन गन] 76MM की सुपर रैपिड गन

- 4 एके-630 गन शिप के दोनों तरफ

- 2 एंटी सबमरीन राॅकेट लांचर

-4 टाॅरपीडो टयूब से लैस

- एंटी शिप और एंटी सबमरीन वाॅरफेयर कैपेबिलिटी

 

ये बात तो हुई INS इंफाल के मेन फीचर्स और उसकी ताकत की,लेकिन ये शिप इंडियन नेवी के दूसरे शिप्स से कितना हाईटेक है। इसे समझने के लिए इस बैटल शिप के स्टील्थ फीचर्स को जानना भी बेहद जरूरी है। आईएनएस इंफाल में यूज की गई 75 परसेंट टेक्नोलाॅजी स्वदेशी है। इसमें स्टेट ऑफ द आर्ट वेपन एंड सेंसर्स का इस्तेमाल]  माॅर्डन सर्विलांस रडार का इस्तेमाल और गनरी वेपन सिस्टम्स लगाए गए। इसमें टोटल एटमाॅस्फेरिक कंट्रोल सिस्टम को लगाया गया है] जिसकी वजह से ये शिप न्यूक्लियर, बाॅयोलाॅजिकल एंड केमिकल वाॅरफेयर कंडीशंस में काम कर सकता है। इसमें हाई डिग्री के टोमेशन और स्टील्थ फीचर्स भी दिये गए हैं। इसमें स्टेट ऑफ द आर्ट स्टील्थ टेक्नोलाॅजी की वजह से इसके रडार सिग्नेचर बेहद कम होते है। या फिर एक छोटे शिप की तरह रडार पर दिखते हैं। जिसकी वजह से दुश्मन को ये पता लगा पाना बेहद मुश्किल होता है कि ये कोई छोटा शिप है या कोई युद्धक पोत। विशाखापत्तनम क्लाॅस इंडियन नेवी की टेक्नोलाॅजिकली सबसे एडवांस शिप में से एक हैं।

इस शिप को टेक्निकली इस तरह से बनाया गया है कि ये हाई स्पीड पर मेनुवर कर सके। साथ ही इसका इस्तेमाल कैरियर बैटल ग्रुप और कैरियर स्ट्राॅइक ग्रुप  में भी किया जा सकता है।

 

इंडियन नेवी के विशाखापत्तनम क्लाॅस शिप का चैथा शिप INS सूरत का निर्माण भी तेजी से  चल रहा है। इस क्लाॅस की शिप के बंगाल की खाड़ी] अरब सागर और हिंद महासागर में आने से इस पूरे  रीजन में भारत का दबदबा बढे़गा साथ ही चीन और पाकिस्तान की नेवी की किसी भी तरह की गुस्ताखी का माकूल जवाब भी दिया सकेगा। इंडियन नेवी लगातार अपने बेड़े को बढाने पर काम कर रही है। अब जब 26 जनवरी को फ्रांस के प्रेसीडेंट भारत आएंगे। ऐसे में भारत फ्रांस के साथ कई अहम सैन्य समझौते कर सकता है। जिसमें आईएसी विक्रांत के लिए 26 राफेल-M फाइटर जेट का सौदा और तीन स्र्कोपियन क्लाॅस सबमरीन के निर्माण का समझौता भी शामिल है। 

 

 

 

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