भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौता क्या है ?

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कंगाल पाकिस्तान कहीं बूंद बूंद पानी को न तरस जाए इसलिए सिंधु जल संधि पर चर्चा के लिए पाकिस्तान का प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंचा है। Article 370 के निरस्त होने के बाद पहली बार कोई पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल भारत (India) आया है। जिस सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) पर चर्चा हो रही है भारत और पाकिस्तान (Pakistan) ने साल 1960 में इस सिंधु संधि पर साइन किया था। इसके एक क्लॉज में दोनों पक्षों को साल में एक बार मिलने का प्रावधान है। इस बार की मीटिंग का मुख्य मुद्दा दो हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट हैं, जिन पर दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। तो आइए समझते हैं पूरा मामला है क्या ?

पाकिस्तान बनने के समय ज़मीन तो बंट गई थी, लेकिन पानी नहीं। दरअसल, पाकिस्तान में नदियों का जो भी पानी आता है वो भारत से आता है। भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के इस्तेमाल को लेकर तनाव 1960 तक जारी रहा। आखिरकार भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के बीच सितंबर 1960 में वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में सिंधु जल समझौता हुआ। इस समझौते पर कराची में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के उस समय के नेता जनरल अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। उम्मीद थी कि ये समझौता दोनों देशों के किसानों के लिए खुशहाली लाएगा और शांति, सुरक्षा और दोस्ती की वजह बनेगा। नदियों को बांटने का ये समझौता कई युद्धों, मतभेदों और झगड़ों के बावजूद 62 सालों से अपनी जगह कायम है। हालांकि तब भी लंबे समय से विवादित किशनगंगा और रतले हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट का मसला नहीं सुलझ सका था। भारत ने संधि की समीक्षा के लिए पिछले साल जनवरी में पाकिस्तान को नोटिस भेजा था। वहीं एक्सपर्ट्स का कहना है कि संधि काफी पुरानी हो गई है। दोनों देशों की जनसंख्या काफी बढ़ गई है। कृषि भूमि की जरूरतें बदली हैं। इसलिए भारत इस संधि की समीक्षा चाहता है।

सिंधु जल संधि 1960 में क्या तय हुआ ?

सिंधु जल समझौते में सिंधु बेसिन से बहने वाली छह नदियों को पूर्वी और पश्चिमी हिस्से में बांटा गया था। जो भारत से पाकिस्तान जाती हैं। तीन पूर्वी नदियां यानी रावी, सतलुज और ब्यास का पानी भारत के लिए तय किया गया। समझौते के मुताबिक, भारत इन नदियों का पानी बिना किसी रोक-टोक के पूरी तरह इस्तेमाल कर सकता है, जिन पर पाकिस्तान विरोध नहीं कर सकता है। जबकि तीन पश्चिमी नदियां यानी झेलम, सिंधु और चिनाब का पानी पाकिस्तान के लिए तय किया गया। भारत इन नदियों के पानी का कुल 20 प्रतिशत हिस्सा रोक सकता है। 

किशनगंगा और रतले हाईड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर विवाद ?

सिंधु जल संधि 1960 में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि भारत पश्चिमी नदियों से निकलने वाले किसी भी सिंचाई चैनल पर नए हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्लांट बना सकता है। बशर्ते कि हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्लांट का डिजाइन, निर्माण और संचालन संबंधित प्रावधानों के तहत नियंत्रित किया जाएगा। इस शर्त की आड़ में पाकिस्तान भारत के दो हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्लांट (किशनगंगा-330 मेगावाट और रतले-850 मेगावाट) के निर्माण पर आपत्ति जताता रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि इनका डिजाइन संधि के प्रावधानों का उल्लंघन है। भारत का मानना है कि प्लांट का डिजाइन पूरी तरह संधि के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। इस प्रोजेक्ट का निर्माण करना उसके अधिकार क्षेत्र में है।

हाईड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट पर क्या बातचीत हुई ?

इस समझौते में मुश्किलें तब शुरू हुईं जब भारत ने पश्चिमी नदियों पर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट का निर्माण शुरू किया। पाकिस्तान चाहता था कि कोर्ट ऑफ आरबिट्रेशन इन आपत्तियों पर फैसला करे। वर्ल्ड बैंक ने दोनों देशों से सिंधु जल संधि विवाद पर अपनी असहमति को सुलझाने के लिए वैकल्पिक तरीकों पर विचार करने को कहा है। भारत ने कई बार इस मुद्दे पर पाकिस्तान से बात करने की कोशिश की, लेकिन पाकिस्तान ने हर बार मना कर दिया। भारत ने ये मुद्दा 2017 से 2022 के बीच 5 बार परमानेंट इंडस कमीशन में उठाया, लेकिन हल नहीं निकला।

क्या भारत-पाक के रिश्ते में नरमी आएगी ?

भारत और पाकिस्तान के रिश्ते पिछले कुछ सालों में, खासकर 2019 के बाद से बहुत खराब दौर से गुजर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लिए जाने के बाद पाकिस्तान ने भारत के साथ व्यापारिक संबंध तोड़ लिए थे। दोनों पक्षों ने लगातार सख्त रुख दिखाया है, इसके बावजूद माना जा रहा है कि दोनों मुल्कों के बीच रिश्तों में बेहतरी के लिए कदम उठाए जा सकते हैं। पाकिस्तान में इसी साल शाहबाज शरीफ की सरकार बनी है। वहीं, भारत में भी हाल ही में नरेंद्र मोदी की सत्ता में वापसी हुई है। नवाज शरीफ के भारत के प्रति रुख को चुनाव खत्म होने के बाद कई एक्सपर्ट का मानना है कि रिश्ते बेहतर होंगे और पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का जम्मू पहुंचना इसकी शुरुआत है।

पिछले 12 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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