प्रियंका गांधी-रॉबर्ट वाड्रा की लव स्टोरी का दिलचस्प किस्सा

Home   >   मंचनामा   >   प्रियंका गांधी-रॉबर्ट वाड्रा की लव स्टोरी का दिलचस्प किस्सा

41
views

तारीख 20 मार्च 1977, 6वीं लोकसभा चुनाव के नतीजे आने वाले थे. रायबरेली पर पूरे देश की निगाहें थीं. शुरू में खबरें आईं कि इंदिरा गांधी पिछड़ रही हैं, फिर लंबा सन्नाटा खिंच गया. कोई खबर नहीं. उस रात की कहानी बाद में पता लगी कि किस तरह से रायबरेली के तत्कालीन ज़िला मजिस्ट्रेट ने अपने ऊपर पड़ते दबाव को झटकते हुए इंदिरा गांधी की हार की घोषणा की. लोकसभा चुनाव के इतिहास में ये वो पल था, जब बिना पीएम चेहरे के विपक्षी दल ने उस वक्त की सबसे ताकतवर नेता को हरा दिया था. इस चुनाव में इंदिरा गांधी के लिए ये हार इसलिए भी बेहद निराशाजनक थी, क्योंकि वो अपनी सीट रायबरेली भी नहीं जीत सकी. उन्हें राजनारायण ने हराया था. अब आप सोच रहे होंगे इस बात की चर्चा आज क्यों, तो आपको जानकारी दे दें अब रायबरेली सीट से इंदिरा गांधी की पोती प्रियंका गांधी चुनाव लड़ सकती है, जिसके बाद से कांग्रेसियों का जोश हाई है. 

वैसे तो प्रियंका गांधी पहले से कांग्रेस के कई बड़े पदों पर रह चुकी है. लेकिन अबकी बार UP की रायबरेली सीट से लड़ने की चर्चा ने कांग्रेसियों को एक बड़ी ताकत दे दी है. कहा जा रहा है प्रियंका गांधी को लेकर तभी से चर्चा छिड़ गई थी जब सोनिया गांधी ने राज्यसभा चुनाव के लिए पर्चा भरा था. अपने मां और भाई की व्यस्तताओं के चलते प्रियंका गांधी पिछले डेढ़ दशक से ज्यादा समय से रायबरेली-अमेठी की सीटों का प्रबंधन देखती रही हैं. इसलिए रायबरेली में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है. रिपोर्ट्स की मानें तो प्रियंका गांधी को चुनाव में आगे करने के लिए रॉबर्ट वाड्रा का भी हाथ बताया जा रहा है. ऐसे में आज दोनों की लव स्टोरी के बारे में भी जानते है. कैसे दोनों की मुलाकात हुई है और क्या कुछ हुआ.

कहा जाता है कि प्रियंका ने भी अपने पिता राजीव गांधी की तरह लव मैरिज की थी. पहली बार जब प्रियंका रॉबर्ट वाड्रा से मिली थीं तो उनकी उम्र 13 साल थी. इसके बाद धीरे-धीरे दोनों की बातचीत शुरू हो गई और देखते ही देखते दोस्ती प्यार में बदल गई. बता दें कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखने वाले रॉबर्ट वाड्रा की कोई पॉलिटिकल बैकग्राउंड नहीं था. रॉबर्ट वाड्रा का जन्म 18 अप्रैल 1969 में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद शहर में हुआ था. वाड्रा के पिता राजेंद्र वाड्रा पीतल व्यवसायी थे. 

रिपोर्ट्स की मानें तो रॉबर्ट वाड्रा और प्रियंका एक ही स्कूल में पढ़ते थे. दोनों की मुलाकात रॉबर्ट वाड्रा की बहन मिशेल वाड्रा के जरिए हुई थी. तब से ही दोनों एक-दूसरे के अच्छे दोस्त बन गए थे. रॉबर्ट वाड्रा का परिवार पीतल और आर्टिफिशल ज्वैलरी के बिजनेस में था. रॉबर्ट अक्सर प्रियंका को खास ज्वैलरी तोहफे में दिया करते थे. वाड्रा जल्द ही प्रियंका के भाई राहुल गांधी के भी अच्छे दोस्त बन गए. जब एक बार प्रियंका मुरादाबाद में रॉबर्ट से मिलने पहुंची तो उनकी प्रेम कहानी की चर्चा शुरू हो गई. हालांकि रॉबर्ट वाड्रा नहीं चाहते थे कि उनके रिश्ते के बारे में किसी को पता चले. 

रॉबर्ट वाड्रा ने एक इंटरव्यू में बताया था, 'हम दिल्ली के ब्रिटिश स्कूल में पढ़ने के दौरान मिले थे. मुझे लगा कि वो मुझमें दिलचस्पी रखती हैं. हम दोनों एक-दूसरे से काफी बातें करते थे लेकिन मैं नहीं चाहता था कि लोग इसके बारे में जानें क्योंकि लोग इसे गलत तरीके से लेते.' रॉबर्ट कहते हैं कि उन्होंने प्रियंका को घुटनों के बल बैठकर प्रपोज नहीं किया, बल्कि दोनों ने साथ बैठकर अपने रिश्तों के बारे में गंभीरता से विचार किया. 

 

 

बताया जाता है कि पहले गांधी परिवार राजी नहीं था, लेकिन प्रियंका की जिद के आगे झुकना पड़ा. इतना ही नहीं रॉबर्ट के पिता भी इस रिश्ते से खुश नहीं थे, लेकिन बाद में वो भी मान गए. इसके बाद 18 फरवरी, 1997 में दोनों ने शादी कर ली. अब दोनों एक बेटी मिराया वाड्रा और एक बेटे रेहान वाड्रा के माता-पिता हैं. 

सियासी करियर पर नजर डालें तो प्रियंका गांधी अभी कांग्रेस महासचिव हैं और UP की राजनीति की जिम्मेदारी उन्हें मिली हुई है, लेकिन उनका राजनीतिक सफर अप्रत्यक्ष रूप से उसी समय शुरू हो गया था, जब उन्होंने पहला राजनीतिक भाषण दिया था. प्रियंका ने अपना पहला राजनीतिक भाषण 16-17 साल की उम्र में दिया. उसके बाद अक्सर प्रियंका को सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ उनकी रैलियों में देखा जाने लगा था. प्रियंका कांग्रेस नेताओं और पार्टी के चुनाव प्रचार के लिए अक्सर ही नजर आती रहतीं थीं.  प्रियंका गांधी ने सक्रिय राजनीति में आने के बाद सबसे ज्यादा महिलाओं के मामलों में आवाज बुलंद की. प्रियंका को देखकर राजनीति में महिलाओं ने आने का मन बनाया और आईं भी. उत्तर प्रदेश में कई बार कई मौकों पर प्रियंका का कुशल नेतृत्व और राजनीतिक अनुभव देखने को मिला. UP में एक दौरे के दौरान प्रियंका गांधी को गांव की महिलाएं अपने हाथों से खाना खिलाती नजर आईं थीं. वहीं यूपी में प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने एक कैंपेन की शुरुआत की, जिसका नाम है, लड़की हूं लड़ सकती हूं. इसके अलावा प्रियंका का बच्चों से भी गहरा लगाव है. अब प्रियंका गांधी चुनावी पिच में क्या कमाल दिखातीं है. ये देखने वाली बात होगी.

कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

Comment

https://manchh.co/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!