ISRO इतिहास रचने को तैयार, Pakistan में अभी से छिड़ गया संग्राम

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जिस पल का इंतजार था वो अब पूरा होने जा रहा है. चंद्रयान 2 की असफलता के 5 साल बाद के बाद एक बार फिर भारत चांद को छूने के लिए तैयार है. चंद्रयान 3 चांद की सतह पर लैंडिंग करने को लेकर पूरी तैयारियां हो चुकी है.  आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से 14 जुलाई दोपहर 2.30 बजे इसे लॉन्च किया जाएगा. एक वक्त जब चंद्रयान-2 का इसरो से लॉन्चिंग के बाद संपर्क टूट गया था. तब पाकिस्तान ने हिंदुस्तान के प्रोजेक्ट पर मजाक उड़ाया था. लेकिन उसने अपने गिरेबां पर झांककर नहीं देखा था की वो कहां पर है और भारत आज कहां पर है. भविष्य को देखते हुए भारत आज स्पेस पावर बनने की ओर है. चाहे चंद्रयान, मंगलयान हो या फिर स्वदेशी सैटेलाइट भारत ने स्पेस में भेजे है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान जिसने भारत से 8 साल पहले अपनी स्पेस एजेंसी शुरू की थी उसका अब नामो निशान तक नहीं है


देशभर की नजरें अब चंद्रयान-3 पर टिकी हैं. 14 जुलाई 2023 भारत के लिए ऐतिहासिक दिन होगा. जबकि पाकिस्तान की इस मामले में कोई बिसात ही नहीं है. पाक स्पेस एजेंसी ICU में है. उसे चीन जिंदगी देने की कोशिश कर रहा है. पिछले साल चीन ने कहा था कि वो PAK स्पेस एजेंसी को खड़ा करने के लिए 800 करोड़ रुपए की मदद करेगा. लेकिन अभी तक क्या हुआ कुछ पता नहीं चल सका है.


दुनिया के सबसे भरोसेमंद स्पेस एजेंसियों में से एक ISRO एक बार फिर दुनिया में अपना परचम लहराने वाला है. पाकिस्तान इस मामले में पीछे नहीं, बल्कि बहुत ज्यादा पीछे है. भारतीय स्पेस एजेंसी के बनने से 8 साल पहले ही पाकिस्तानी स्पेस एजेंसी बन गई थी.
पाकिस्तान ने 16 सितंबर, 1961 को अपनी स्पेस एजेंसी, SUPARCO की स्थापना की.
ISRO की स्थापना 1969 में हुई थी. उससे पहले इंडियन स्पेस एजेंसी को स्पेस Research के लिए इंडियन नेशनल कमेटी के रूप में जाना जाता था.
लेकिन अब पाकिस्तान से भारत इतना आगे है कि उसे भारत की बराबरी करने में कई दशक लग जाएंगे. भले ही वह चीन से मदद ले या किसी और देश से. चीन हो या पाकिस्तान... अंतरिक्ष विज्ञान में ये भारत के आगे कहीं नहीं टिकते. इस वक्त भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो अंतरिक्ष विज्ञान के मामले में अभी दुनिया का सबसे भरोसेमंद संगठन है. पाकिस्तानी स्पेस एजेंसी के पास लॉन्च करने के लिए न तो सैटेलाइट है. न ही पैसे बचे हैं.
ISRO ने अब तक 61 सालों में 34 देशों के 424 सैटेलाइट्स को लॉन्च किया है.
दुनिया की नंबर एक स्पेस एजेंसी है, जो कॉमर्शियल लॉन्चिंग की बादशाह है.  
इसरो 123 स्पेसक्राफ्ट मिशन, 91 लॉन्च मिशन, 15 स्टूडेंट सैटेलाइट्स, 2 री-एंट्री मिशन
तीन भारतीय प्राइवेट सैटेलाइट्स लॉन्च कर चुका है. और पाकिस्तान के सिर्फ पांच

पाकिस्तान के पांच सैटेलाइट्स- Header  
-पहला- 16 जुलाई 1990 को छोड़ा गया था बद्र-1. ये एक आर्टिफिशियल डिजिटल सैटेलाइट था. इसने 6 महीने बाद अंतरिक्ष में काम करना बंद कर दिया था.
-दूसरा- बद्र-बी सैटेलाइट जो एक अर्थ ऑब्जर्वेशन था. इसे 10 दिसंबर 2001 को लॉन्च किया गया था.
तीसरा - पाकात-1आर या पाकसाक-1 Satellite 11 अगस्त 2011 को चीन की मदद से छोड़ा गया. इसे चीन ने ही बनाया था. ये एक Communication Satellite है.
चौथा - आईक्यूब-1 Satellite है जिसे 21 नवंबर 2013 को लॉन्च किया गया था. ये बायोलॉजी, नैनो टेक्नोलॉजी, स्पेस डायनेमिक्स जैसे प्रयोगों के लिए बनाया गया था. इसने भी दो साल काम किया.
पांचवां - पाकिस्तान रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट. इसे 9 जुलाई 2018 को लॉन्च कर दिया गया था. इसे भी चीन ने अपने रॉकेट से लॉन्च किया था.

ISRO की धाक पूरी दुनिया में है. भारत के सामने पाकिस्तान का कोई वजूद ही नहीं है. सिर्फ चीन ही है जो भारत से कुछ मामलों में आगे है.  इसरो की कॉमर्शियल लॉन्चिंग तो दुनिया भर में फेमस है. जिसकी सबसे बड़ी वजह किफायती और भरोसेमंद है .अंतरिक्ष विज्ञान के मामले में भारत दुनिया के अग्रणी देशों में एक है. दक्षिण एशिया में तो नंबर एक. दक्षिण एशिया में आठ देश हैं. भारत, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान और मालदीव. अंतरिक्ष विज्ञान के मामले में सिर्फ चीन ही थोड़ा बहुत प्रयास कर रहा है. स्पेस साइंस में पाकिस्तान को भारत की बराबरी करने में दशकों लग जाएंगे.

कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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