इटैलियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने बनाई खाने वाली बैटरी

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छोटे बच्चे जैसे ही चलना सीखते हैं, इधर-उधर की चीजें उठाकर मुंह में डाल लेते हैं। अगर ये पेट में जाकर पचने वाली चीज है, तो कोई दिक्कत नहीं, लेकिन अगर बच्चा प्लास्टिक, कांच या बटन बैटरी निगल ले, तो लेने के देने पड़ सकते हैं। ऐसी परेशानी से निजात दिलाने के लिए इटैलियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने खाने वाली बैटरी का इजाद किया है। 

इटली ने एक ऐसी रिचार्जेबल बैटरी का आविष्कार किया जिसमें आप खाकर पचा भी सकते हैं। इटैलियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने खाने की चीजों से ये बैटरी बनाई है. जिससे चार्जिंग भी की जा सकती है और भूख भी मिटाई जा सकती है।

दरअसल इस बैटरी को दो चीजों से बनाया गया है। एक तो है राइबोफ्लेविन, जो बादाम जैसी चीजों में मिलने वाला विटामिन है। दूसरा है क्वेरसेटिन, जो एक फूड सप्लीमेंट है।

तो वहीं इलेक्ट्रिकल करंट के आने जाने का काम चारकोल से होता है। जबकि शॉर्ट सर्किट से बचाने के लिए सेपरेटर को नोरी सीवीड से बनाया गया है। ये एक तरह का शैवाल होता है जिसे चीन और जापान में खाने के यूज़ में आता है। 

वहीं इसके इलेक्ट्रोड पर शहद के छत्ते से मिलने वाले मोम की परत चढ़ी होती है और उसे सोने के वर्क से लपेटा गया है। वैसे तो ये एक ये प्रोटोटाइप बैटरी है जो  0.65 वोल्ट्स पावर पैदा कर सकती है और इसकी मदद से छोटे एलईडी बल्ब या वैसी छोटी डिवाइस चलाई जा सकती है। 

इसी बैटरी के आने के बाद साइंटिस्टों को उम्मीद हैं कि इसका का इस्तेमाल शरीर में डाली जाने वाली डिवाइस के अंदर किया जा जाएगा. इस बैटरी से मेडिकल की दुनिया में बड़े बदलाव संभव है।  क्योंकि शरीर के अंदर की जांच करने के लिए डाले जाने वाली डिवाइस इस बैटरी की मदद से चार्ज हो सकेंगी.इसके साथ ही इस बैटरी को पचाना यानी हजम करना भी आसान हो जाएगा। 

 

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