Jackie Shroff : अपनी जड़ों को कभी नहीं भूले

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जयकिशन काकुभाई श्रॉफ उर्फ जैकी श्रॉफ (Jackie Shroff) जिनको लोग नेकदिल इंसान के तौर पर जानते और पसंद करते हैं। 80 के दशक में बॉलीवुड में हीरो के रूप में एंट्री ली। सुपरस्टार बने।

जब समंदर में डूबते भाई को नहीं बचा पाए

बात 1967 के आसपास की है मुंबई की एक चाल में दो भाई रहते थे। दोनों एक बार समंदर के किनारे घूम रहे थे। तभी उनकी नजर पड़ी कि समंदर में एक आदमी डूब रहा है और मदद के लिए चिल्ला रहा है। तभी वहां मौजूद दोनों भाइयों में बड़ा भाई उस डूबते हुए आदमी को बचाने के लिए पानी में कूद पड़ा। बिना डरे। जबकि उसे तैरना भी नहीं आता था। अपने भाई को भी डूबता देख छोटे भाई ने एक केबल का तार उनकी तरफ फेंका। भरकस प्रयास के बाद भी छोटा भाई अपने भाई को बचा नहीं पाया और उसकी आंखों के सामने समंदर में डूब गया। बड़े भाई की मौत ने छोटे भाई को बुरी तरह तोड़ कर रख दिया और फिर उस 10 साल के बच्चे ने तय किया कि अब बड़े भाई की जगह उस बस्ती में भलाई का काम अब वो खुद करेगा। वक्त गुजरा और बड़ा होकर वो बच्चा बस्ती का जग्गू दादा बन गया।

बिना सिफारिश के 80 के दशक में बॉलीवुड में की एंट्री 

वो जग्गू दादा जिसे एक नेकदिल इंसान के तौर पर लोग जानते और पसंद करते। जो बिना किसी सिफारिश के 80 के दशक में बॉलीवुड में हीरो के रूप में एंट्री लेता है और सुपरस्टार का तमगा हासिल करता है। पिछले 42 सालों में 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। कई सारे अवार्ड जीते। आज कहानी जयकिशन काकुभाई श्रॉफ उर्फ जैकी श्रॉफ की। जिनकी पूरी जिंदगी किसी फिल्म से कम नहीं है। बचपन से जवानी की दहलीज तक वो चॉल में रहे। जहां 38 लोग रहते और टॉयलेट सिर्फ तीन। कैसे सड़क पर अक्सर मारपीट करने वाला एक लड़का बॉलीवुड का हीरो बना। कैसे टिपिकल मुंबइया लड़के के प्यार में एक शाही परिवार की लड़की दीवानी हो गई। वो जैकी श्रॉफ जो अपने भाई और अपनी मां को बेहद प्यार करते, उनके जाने का गम उन्हें आज भी सताता है।

कजाकिस्तान से पलायन कर भारत आया था मां का परिवार

शेयर ट्रेडिंग करने करने वाले काकुभाई हरिभाई श्रॉफ जो गुजराती बनिया फैमिली से ताल्लुक रखते और महाराष्ट्र के लातूर शहर में रहते। इनकी शादी हुई कजाकिस्तान की रहने वाली हुरुनिसा से। हुरुनिसा जिनकी फैमिली 40 के दशक में कजाकिस्तान से पलायन कर भारत आई और महाराष्ट्र में बसी। हुरुनिसा और काकुभाई की मुलाकात हुई। प्यार हुआ और दोनों ने शादी की। शादी के बाद हुरुनिसा ने अपना नाम बदलकर रीता श्रॉफ कर लिया। रीता श्रॉफ और काकुभाई हरिभाई श्रॉफ को एक फरवरी साल 1957 को बेटा हुआ - नाम रखा - 'जयकिशन काकुभाई श्रॉफ'

पिता को हुआ काम में घाटा, तो चॉल में रहना पड़ा 

पिता काकुभाई हरिभाई श्रॉफ का शेयर बाजार के काम में घाटा हुआहालात इतने खराब हो गए कि वो लातूर छोड़कर पूरे परिवार के साथ मुंबई के मालाबार हिल के 'तीन बत्तीएरिया में एक चॉल में रहने लगे। काकुभाई हरिभाई श्रॉफ ज्योतिष का काम करते। जैकी श्रॉफ यहीं रह कर बड़े हुए। 11वीं तक पढ़ने के बाद फिर वो आगे स्कूल कॉलेज नहीं गए। वजह थी पैसों की तंगी। वो इधर-उधर घूमतेलोगों की मदद करतेएरिया के जग्गू दादा बन गए। अपने दोस्तों के लिए कुछ भी कर करतेअक्सर सड़क पर मारपीट करते। लेकिन वक्त गुजरा उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का अहसास हुआ। नौकरी की तलाश की। पर सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने ट्रैवल और टूरिज्म में डिप्लोमा किया और एक ट्रैवल एजेंसी में काम करने लगे। पर किस्मत ने उनके लिए कुछ और तय करके रखा था।

नौकरी छोड़कर करने लगे मॉडलिंग

एक बार जैकी श्रॉफ बस में सफर कर रहे थे तभी एक ऐड एजेंसी के अकाउंटेंट ने जब उन्हें देखा तो मॉडलिंग करने की सलाह दे डाली। जैकी श्रॉफ उनके कहने पर फोटोग्राफर से मिले और मॉडलिंग करने लगे। और यही वो वक्त था जब जिदंगी ने बड़ी करवट ली। फिर इनकी मुलाकात हुई आशा के चंद्रा से, जो मुंबई में एक्टिंग स्कूल चलाती थीं। उन्होंने जैकी श्रॉफ को मॉडलिंग करते देखा तो एक्टिंग सीखने के लिए कहा। पहले जैकी श्रॉफ ने दिलचस्पी नहीं दिखाई पर जब उन्हें पता चला की आशा के चंद्रा की क्लास में सुपरस्टार देव आनंद के बेटे सुनील आनंद भी आते हैं तो जैकी श्रॉफ ने भी एडमिशन ले लिया। यही पर सुनील आनंद और जैकी श्रॉफ के बीच में गहरी दोस्ती हो गई। 

स्वामी दादा’ में मिला गुंडे का रोल

ये वो वक्त था जब देव आनंद साल 1982 की फिल्म स्वामी दादा बना रहे थे। सुनील आनंदजैकी श्रॉफ को अपने पिता देव आनंद के पास ले गए। देव आनंद जैकी श्रॉफ से मिले और उन्हें फिल्म स्वामी दादा में शक्ति कपूर के गैंग के सदस्य का एक छोटा सा रोल दिया। इस तरह से एक छोट सा रोल करने के बाद जैकी श्रॉफ की बॉलीवुड में एंट्री हुई। लेकिन किसी को नहीं पता की अगले ही साल वो लोगों के दिलों में राज करने वाले हैं। 

सुभाष घई की हीरो’ से बने हीरो

दरअसल, फिल्म डायरेक्टर और प्रोड्यूसर सुभाष घई अपनी नई फिल्म के लिए एक नए चेहरे की तलाश कर रहे थे। उनकी नजर फिल्म स्वामी दादा के उसी शक्ति कपूर के गिरोह में एक गुंडे का छोटा सा रोल करने वाले जैकी श्रॉफ पर गई। और उन्होंने तय किया यही वो चेहरा है उनकी अगली फिल्म का हीरो बनेगा। सुभाष घई को जैकी श्रॉफ का नाम, इतना पसंद आया की उन्होंने फिल्म में भी उनका नाम जैकी ही रखा। इस तरह साल 1983 की फिल्म हीरो से बॉलीवुड को नया हीरो मिला। फिल्म सुपरहिट हुई और उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हुई। जैकी श्रॉफ और मीनाक्षी शेषाद्रि रातोंरात स्टार बन ग

बीते दिनों को हमेशा याद करते जैकी

जैकी श्रॉफ का बॉलीवुड का करियर चल निकाला। गुजरते वक्त के साथ एक से एक बेहतरीन फिल्मों में काम किया। लोगों के दिलों में राज किया। उन्होंने ऊंचा मुकाम हासिल किया। पर उनके किरदार की खास बात ये है कि वो अपनी जड़ों को कभी नहीं भूले। वो अपने एक इंटरव्यू में बताते हैं कि ‘मैं जिस चॉल में रहता था वहां 7 खोली और 3 टॉयलेट थे। इन खोली में कुल 38 लोग रहते। सुबह-सुबह से हमें टॉयलेट यूज करने के लिए लाइन में खड़े रहना पड़ता था। जब मैं फिल्मों में काम करने लगा और मुझे शूटिंग पर जाने के लिए जल्दी रहती पर इंतजार करने के अलावा कोई च्वाइस नहीं थी।’ ‘बाद में जब मेरी फिल्में हिट हो गईं तो उन लोगों ने मुझे प्राइवेट टॉयलेट दे दिया। मैंने उनसे बोला भी, कि ऐसा करने पर बाकी सभी लोगों की मुसीबत और बढ़ जाएगी। पर सभी ने कहाआप हमारी चॉल के हीरो हो और मुझे एक प्राइवेट टॉयलेट दे दिया।’

मां और भाई के बेहद करीब

जैकी श्रॉफ अपनी मां रीता श्रॉफ के बेहद करीब रहे। वो एक इंटरव्यू में बताते हैं कि ‘जब मैं चॉल में रहता था तो मां के बीमार होते ही तुरंत पता चल जाता था। पर जब मैं बड़े घर में शिफ्ट हो गया और हमारे बीच दीवारें आ गईं तो सुबह तक अगले कमरे में अपनी मां की मौत का एहसास नहीं कर पाया।’ जैकी श्रॉफ के अपने बड़े भाई को हमेशा याद करते। वो बताते हैं कि ‘मेरे बड़े भाई काफी संवेदनशील इंसान थे। असल में चॉल के दादा वही थे। सबकी मदद के लिए हमेशा तैयार रहते।’

जब जिंदगी में आईं शाही परिवार की लड़की

पांच जून, साल 1987 में जैकी श्रॉफ ने आयशा दत्त से शादी की। दोनों की लव स्टोरी किसी फिल्मी से कम नहीं थी। एक बार जैकी श्रॉफ सड़क किनारे खड़े थेतभी उन्हें 13 साल की एक लड़की स्कूल यूनिफॉर्म में बस में बैठी दिखाई दी।जैकी श्रॉफ को उस लड़की से पहली ही नजर में प्यार हो गया। उन्होंने उससे नाम पूछा और कहा कि मैं एक रिकॉर्डिंग स्टोर की ओर जा रहा हूं। क्या आप मेरे साथ आना पसंद करेंगी?’ आयशा दत्त ने जैकी श्रॉफ की म्यूजिक एल्बम खरीदने में मदद की। इस मुलाकात के बाद आयशा दत्त जैकी श्रॉफ से इनती प्रभावित हुई कि ये रिश्ता प्यार में बदल गया। लेकिन एक दिक्कत थी।

बंगला छोड़कर चॉल में रहने आ गई थीं आयशा 

आयशा दत्त शाही परिवार से थीं। उनके पिता रंजन दत्त एयर फोर्स में अफसर थे। आयशा दत्त काफी संपन्नता के बीच पली-बढ़ी थीं। लेकिन जैकी श्रॉफ के लिए वो उनके साथ चॉल में रहने को तैयार हो गई। उन्होंने जैकी श्रॉफ के लिए कई त्याग किए। दोनों के दो बच्चे हुए। एक बेटी - कृष्णा श्रॉफ, एक बेटा - टाइगर श्रॉफ। टाइगर श्रॉफ ने भी अपने पिता जैकी श्रॉफ की तरह बॉलीवुड में अपना मुकाम बनाया है। पर्यावरण के लिए पौधों को बेहद जरूरी मानने वाले जैकी श्रॉफ आने वाले दिनों में कई फिल्मों में नजर आने वाले हैं।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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