जब कारगिल में इंडियन आर्मी ने पाकिस्तान आर्मी को चटाई धूल

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हिंदुस्तान के वीर जवानों ने एक नहीं कई बार पड़ोसी मुल्क पाकिस्तानी सेना को धुल चटाई है. 24 साल पहले कारगिल की चोटी पर पाकिस्तान को परास्त कर 18 हजार फीट की ऊंचाई पर माइनस 10 डिग्री टेंपरेचर पर जवानों ने तिरंगा लहराया था.  इंडियन आर्मी के घातक हथियारों के प्रहार से पाकिस्तान ने घुटने टेक दिए थे. पिछले 24 सालों में भारत ने अब और ज्यादा घातक हथियार ले लिए है. जिससे सेना की ताकत कई गुना और मजबूत हुई है. LoC से लेकर LAC तक सेना की रणनीति पूरी तरह से बदल चुकी है. आसमान में अपनी ताकत को कई गुना बढ़ा कर इंडियन एयरफोर्स पाकिस्तान और चीन के बॉर्डर पर लगातार सतर्क रहती है. वहीं जमीन पर भी इंडियन आर्मी ने कई नए हथियारों से अपनी ताकत को बढ़ाया है. अत्याधुनिक उपकरण और हथियार जुड़े हैं जिनसे पाकिस्तान और चीन भारत की तरफ आंख उठाकर देखने में भी घबराता है.

1999 कारगिल वॉर की लड़ाई 60 दिन से ज्यादा चली थी. इसे ऑपरेशन विजय नाम दिया गया था. कहा जाता है सेंकेड वर्ल्ड वॉर के बाद ये एकमात्र ऐसा युद्ध था जिसमें दुश्मन सेना पर इतनी बड़ी संख्या में बमबारी की गई थी और अंत में भारत की जीत हुई थी. हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के तौर पर मनाया जाता है. 'ऑपरेशन विजय' में भारत के 527 जवान शहीद और 1363 जवान घायल हुए. जबकि इंडियन आर्मी ने पाकिस्तान के 3 हजार सैनिकों को मार गिराया था.


क्यों हुआ था ?
शिमला समझौते के तहत दोनों देश ठंड के समय अग्रिम चौकियों से अपने सैनिकों को हटा लेते हैं, लेकिन पाकिस्तान ने इस समझौते का गलत फायदा उठाते हुए भारत के इलाकों पर कब्जा कर लिया. जिसका पता लगने पर भारतीय सैनिकों ने जवाबी कार्रवाई की थी.


बना था ये रिकॉर्ड
भारत-पाकिस्तान के बीच 1999 में लड़े गए कारगिल युद्ध में तोपखाने से 2,50,000 गोले और रॉकेट दागे गए थे. 300 से ज्यादा तोपों, मोर्टार और रॉकेट लॉन्चरों ने रोज करीब 5,000 बम फायर किए थे. लड़ाई के महत्वपूर्ण दिनों में प्रतिदिन हर आर्टिलरी बैटरी से औसतन एक मिनट में एक राउंड फायर किया गया था.


इन हथियारों ने दी थी पाकिस्तान को चोट
बोफोर्स तोप- दुश्मनों को मार गिराने में इस तोप की फायर पावर ने मदद की. ये तोप 14 सेकेंड में तीन राउंड फायर कर सकती है.
पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर- दुश्मनों की इंफैन्ट्री यानी पैदल सेना को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया था.
इंसास राइफल- दुश्मनों को सुलाई मौत की नींद
एके-47 राइफल- क्लोज कॉम्बेट के लिए यूज
एसएएफ कार्बाइन 2ए- हल्के वजन का हथियार
ड्रेगुनोव स्नाइपर राइफल- 10 राउंड की मैगजीन बॉक्स का यूज
कॉर्ल गुस्ताव रॉकेट लॉन्चर- दुश्मनों के कई बंकरों को तबाह किया
इंडियन एयरफोर्स ने पाकिस्तानी सैनिकों के खिलाफ कारगिल युद्ध में मिग-27 और मिग-29 का प्रयोग किया था.
मिग-27 की मदद से इस युद्ध में उन स्थानों पर बम गिराए जहां पाक सैनिकों ने कब्जा जमा लिया था.
इस विमान से पाक के कई ठिकानों पर आर-77 मिसाइलें दागी गईं थीं.

समय के बदलाव के साथ अब इंडियन आर्मी की ताकत और बढ़ी है. इंडियन आर्मी ने अपने हथियारों, विमानों और सर्विलांस डिवाइसेस में भी इजाफा किया है. पिछले 20 सालों में राफेल, चिनूक, अपाचे, मी 17 वी 5 जैसे शक्तिशाली लड़ाकू विमान इंडियन एयरफोर्स में शामिल है.


जमीन पर भी इंडियन आर्मी ने कई नए हथियारों से अपनी ताकत को बढ़ाया है. पुरानी आर्टिलरी गनों को अपग्रेड करके और तेज और दूर तक प्रहार करने के लिए तैयार किया है. एम 777 होविट्जर, K9 वज्र, पिनाका मिसाइल की एक्सटेंडेड रेंज के साथ अपनी आक्रामकता को बढ़ाया है. रूस से एस 400 सर्फेस टो एयर मिसाइल सिस्टम भी हासिल की है. एक मिसाइल सिस्टम की यूनिट पाकिस्तान बॉर्डर पर तो S-400 की दूसरी यूनिट एलएसी पर तैनात है.


ड्रोन की शक्ति के साथ सर्विलेंस रडार सिस्टम मजबूत
पिछले दो दशकों में इंडियन आर्मी ने इजरायल से अनमैंड एरियल व्हीकल या UAV खरीद कर सीमाओं पर अपनी निगरानी को भी नए आयाम दिए हैं. ड्रोन की शक्ति के साथ सर्विलेंस रडार सिस्टम भी बॉर्डर पर तैनात हैं. पाकिस्तान से आने वाले घुसपैठियों की हर कोशिश को बेहतरीन सर्विलांस और एंटी इनफील्ट्रेशन ग्रिड के साथ नाकाम किया जा रहा है. अपने उपकरणों हथियारों और आधुनिक सर्विलांस डिवाइस के अलावा आर्मी ने अपने विंटर क्लॉथिंग, राशन, हैबिटेशन और Medical Facilities को भी पूरी तरह से नया बना दिया है.


Times Now की एक खबर के मुताबिक
सेना के एक अधिकारी ने कहा, ''उन क्षेत्रों को सुरक्षित कर लिया गया है जहां से घुसपैठिए आए थे. एलओसी के माध्यम से संभावित दुश्मन प्रवेश बिंदुओं पर माइन बिछाई गई हैं"


इन सबके बदलाव के पीछे KRV कमेटी रिपोर्ट है. दरअसल कारगिल युद्ध होने के तुरंत बाद, तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने घुसपैठ के विभिन्न पहलुओं पर गौर करने के लिए के. सुब्रह्मण्यम की अध्यक्षता में कारगिल रिव्यू कमेटी (KRV) गठित की थी. जिसमें ये बताया गया था कि देश की सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली में गंभीर कमियों के कारण कारगिल संकट पैदा हुआ.


KRV रिपोर्ट के बाद चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद यानी CDS की मांग उठी थी. जिसे मोदी सरकार ने पूरा किया था. इसके बन जाने से युद्ध के वक्त तीनों सेनाओं तालमेल के साथ काम कर सकती है. देश के पहले CDS जनरल बिपिन रावत बने थे.


कारगिल युद्ध के दौरान भारत के पास उन ऊंचाइयों पर उड़ पाने वाला हेलिकॉप्टर नहीं था. ऊंचाई वाली ठंडी जगहों पर  एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) ने दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर में आपूर्ति मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है.
पिछले 20 सालों में भारत की ताकत में कई गुना इजाफा हुआ है. अब सीमा पर तैनात रहने वाले जवानों को अमेरिका से आने वाली विशेष विंटर क्लॉथिंग और जूते दिए जाते हैं उनके हाथों में सिग सौयर राइफल्स है और रहने के लिए भी नए तरीके के शेल्टर हैं. इन कुछ सुविधाओं के चलते सेना के जवान माइनस 20 से 25 डिग्री तक भी पाकिस्तान और चीन की सीमा पर लगी अपनी पोस्ट पर फर्ज निभा रहे है. इंडियन आर्मी टू फ्रंट वार के लिए पूरी तरह से तैयार है, यानि पाकिस्तान हो या चीन किसी भी मोर्चे पर, किसी भी परिस्थिति में, किसी भी वक्त भारत की सेना दुश्मन को करारा जवाब दे सकती है.


कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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