जब PM Modi के साथ आगे बढ़े Murli Manohar Joshi

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करोड़ों रामभक्तों का जो सपना पिछले कई सदियों से अधूरा था वो अब पूरा होने वाला है. 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का भव्य, दिव्य कार्यक्रम होगा. जिसमें देश की कई जानी मानी हस्तियां शामिल होंगी. दुनियाभर की निगाहें इस कार्यक्रम में लगी होंगी. ये वो ऐतिहासिक दिन होगा जिसके लिए सैकड़ों सालों से रामभक्तों ने इंतजार किया है. इस सपने को साकार करने के लिए कई लोगों ने अपने जीवन तक की आहूति दे दी. जिन लोगों ने अपने अटल संकल्प से राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया, उनमें एक बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी भी हैं. जिन्होंने कई दशकों तक ऐसे काम किए हैं जिसे कभी भी भूला नहीं जा सकता.

ये वाक्या है 1980 के दशक का जब विश्व हिंदू परिषद यानी VHP ने नए सिरे से अयोध्या आंदोलन का बिगुल फूंका तो उसमें करोड़ों रामभक्त जुड़े, वक्त के साथ-साथ RSS और BJP के कई कद्दावर नेता आंदोलन का चेहरा बन गए. लाल कृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या की रथ यात्रा ने तो राम मंदिर आंदोलन में गजब की ऊर्जा भर दी. आडवाणी के बाद दूसरे बड़े बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी ने भी अयोध्या आंदोलन को परिणति तक पहुंचाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी. आडवाणी की तरह जोशी भी राम मंदिर आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिसा लेते रहे. बीजेपी की वेबसाइट पर मुरली मनोहर जोशी के परिचय का एक अंश कहता है. डॉ. जोशी ने अयोध्या के आन्दोलन में काफी अहम भूमिका निभाई थी. राम जन्मस्थान पर मंदिर निर्माण के लिए उन्हें 8 दिसंबर 1992 को गिरफ्तार कर लिया गया और माता टीला पर लालकृष्ण आडवाणी और अशोक सिंघल के साथ अयोध्या मामले में गिरफ्तार किया गया. उनके जीवन में सबसे ज्यादा महत्व इलाहाबाद का है. उन्होंने चार दशक से भी ज्यादा समय वहां दिया है. वो इलाहाबाद लोकसभा सीट से लगातार तीन बार जीते'

हालांकि इन दिनों PM मोदी और जोशी की एक तस्वीर खूब वायरल है जिसमें दोनों नेता रामलला के दर्शन करते हुए दिखाई दे रहे हैं. तस्वीर को देखने से ही लगता है कि ये काफी पुरानी है. कहा जाता है कि ये तस्वीर तब की है जब कन्याकुमारी से कश्मीर की एकता यात्रा निकाली गई थी, तब बीजेपी के दोनों नेता यात्रा के वक्त अयोध्या आए थे. वो महीना भी जनवरी का था, तारीख थी 14  साल था 1992. रिपोर्ट्स की मानें तो PM मोदी ने बाबरी ढांचे के भीतर मुरली मनोहर जोशी के साथ रामलला के दर्शन किए थे. वो रामलला की मूर्ति को कुछ ऐसे टकटकी लगाकर देख रहे थे जैसे कुछ बात कर रहे हों. कहा तो ये भी जाता है कि उसी दरमियां मोदी ने एंक संकल्प लिया था कि दोबारा तब ही वो आएंगे जब राम मंदिर का निर्माण होगा. इसके बाद जब मंदिर की आधारशिला रखी गई तब वो आए. कहा जाता है कि मुरली मनोहर जोशी राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की विचारधारा के पोषक रहे. इस कारण उन्होंने कश्मीरी आतंकियों की चुनौती स्वीकार करते हुए लाल चौक पर तिरंगा भी फहराया था.  मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल था 1991 और मुरली मनोहर जोशी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे. तिरंगा यात्रा निकालने का प्लान तैयार हुआ. उस समय कश्मीर में आतंकवाद चरम पर था. कोई कश्मीर जाने की हिम्मत नहीं करता था. तब PM मोदी के सुझाव से ही बीजेपी ने प्लानिंग बनाई और शुरू हुई एकता यात्रा.

अनुच्छेद 370 हटाओआतंकवाद मिटाओ एकता यात्रा

अनुच्छेद 370 हटाओ, आतंकवाद मिटाओ के मुद्दे पर बीजेपी की एकता यात्रा निकाली गई थी. जिसे आज भी बीजेपी नेता याद करते हैं. कहा जाता है एकता यात्रा की पूरी जिम्मेदारी PM मोदी ने संभाली थी. ड्राइवर-कंडक्टर की टीम को उन्हीं ने तैयार किया था. एक रथ गुजरात में और एक जयपुर में बना था. बीजेपी की बहुचर्चित ये यात्रा 11 दिसंबर को तमिलनाडु से शुरू होकर श्रीनगर पहुंची थी. इस यात्रा की अगुवाई मुरली मनोहर जोशी कर रहे तो इसकी संयोजन की कमान मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में थी. यात्रा 14 राज्यों से होकर गुजरी थी. 25 जनवरी, 1992 को यात्रा को पटनीटॉप में रुकना पड़ा था, लेकिन फिर भी मुरली मनोहर जोशी और नरेंद्र मोदी ने यात्रा के अंतिम पड़ाव लाल चौक पर पहुंचकर तिरंगा फहराया था.

 

PM मोदी ने जोशी संग मिलकर फहराया था तिरंगा
एक किस्सा और भी यहां का बहुत चर्चा में रहता है जिसे पीएम मोदी ने लोकसभा में सुनाया था. दरअसल पीएम मोदी ने कहा था कि पिछली शताब्दी में, मैं जम्मू-कश्मीर में यात्रा लेकर गया था और लाल चौक पर तिरंगा लहराने का संकल्प लिया था. तब आतंकवादियों ने पोस्टर लगाया था कि देखते हैं कि किसने अपनी मां का दूध पिया है कि लाल चौक पर आकर तिरंगा फहराता है. तब PM ने 24 जनवरी को कहा था कि आतंकवादी कान खोलकर सुन ले, 26 जनवरी को ठीक 11 बजे मैं लाल चौक आऊंगा बिना सिक्युरिटी आऊंगा. फैसला लाल चौक पर होगा कि किसने अपनी मां का दूध पिया है. पीएम मोदी ने कहा कि तब लाल चौक पर तिरंगा फहराया. इस बारे में बीजेपी की वेबसाइट भी ये कहती है. भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जोशी ने 1992 में गणतंत्र दिवस के दिन ऐतिहासिक एकता यात्रा कन्याकुमारी से श्रीनगर तक लक्षित की थी जिसका उद्देश्य लाल चौक पर झंडा फहराना था. इस घटना ने अयोध्या की घटना के साथ मिलकर देश के भविष्य पर एक गहरी छाप छोड़ी.' राम मंदिर आंदोलन हो या लाल चौक पर तिरंगा फहराने की दिलेरी, मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सभी कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहे. मुरली मनोहर जोशी को आज भी लोग राम मंदिर और लाल चौक को लेकर याद करते रहते है.

कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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