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बीजेपी की पहली लिस्ट में ज्योतिरादित्य सिंधिया को झटका, कांग्रेस के पूर्व विधायक का कटा टिकट

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ये पहली बार है जब बीजेपी (BJP) ने चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में प्रत्याशियों के नाम की लिस्ट जारी की है। मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) के लिए पार्टी ने 39 प्रत्याशियों की पहली लिस्ट जारी की है। इनमें से ज्यादातर वो सीटें हैं जहां पिछले दो या तीन बार से बीजेपी हार रही है। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात ये है कि बीजेपी की इस पहली लिस्ट से सिंधिया समर्थकों की नींद उड़ी हुई है। इसकी वजह 2020 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होकर सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के खास पूर्व विधायक का टिकट कटना है। मजेदार बात तो ये है कि ये वही पूर्व विधायक हैं, जिन्होंने 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस में रहते हुए बीजेपी के पूर्व मंत्री तक को हराया था।

मध्य प्रदेश में टिकटों के ऐलान की बड़ी बातों पर गौर करें तो 12 ऐसे नेताओं को टिकट मिला है, जो पिछले चुनाव में हारे थे। पार्टी की ओर से जारी पहली लिस्ट में पहला झटका कांग्रेस की सरकार गिराकर बीजेपी की ताजपोशी कराने वाले सिंधिया समर्थकों को लगना शुरू हुआ। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के एक करीबी को टिकट मिला है तो वहीं एक का टिकट काट दिया गया है।  दरअसल ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने 22 समर्थकों के साथ मार्च 2020 में पाला बदल लिया था। 22 में से 19 उनके कट्टर वाले समर्थक थे। इसके बाद कांग्रेस की सरकार गिर गई। 2020 के आखिर में हुए उपचुनाव में उनके छह समर्थक चुनाव हार गए थे। इनमें एदल सिंह कंसाना और रणवीर सिंह जाटव  भी शामिल हैं। वहीं, गोहद सुरक्षित सीट से रणवीर जाटव का टिकट काटकर बीजेपी ने अपने नेता लाल सिंह आर्य को ही मैदान में उतारने का ऐलान किया। 2018 में यहां से आर्य को ही हराकर कांग्रेस के रणवीर जाटव जीते थे लेकिन जब ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में विद्रोह हुआ तो विधायक पद से इस्तीफा देने वालों में रणवीर जाटव भी शामिल थे। सिंधिया के साथ ही रणवीर जाटव भी कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे।

सिंधिया खेमे में भी हलचल 

साल 2020 के उप चुनाव में बीजेपी ने लाल सिंह आर्य को साइड कर गोहद से रणवीर जाटव को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन कांग्रेस के मेवाराम जाटव ने रणवीर को हरा दिया था। इसके बावजूद सरकार ने उन्हें हस्त शिल्प विकास निगम का चेयरमैन बनाकर केबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया लेकिन इस बार बीजेपी ने सिंधिया समर्थक रणवीर जाटव का पत्ता काट दिया है। अब तक यही लग रहा था कि एक बार फिर से रणवीर जाटव को टिकट दिलाने में ज्योतिरादित्य सिंधिया सफल हो जाएंगे, लेकिन टिकट कटने के बाद कहा जा सकता है कि बीजेपी में शामिल होने के बाद रणवीर जाटव के बुरे दिन शुरू हो गए। कुल मिलाकर अब सिंधिया खेमे में भी हलचल मच गई है। इसकी वजह सिर्फ रणवीर का टिकट काटना ही नहीं है, बल्कि बाकी लोगों के नाम का ऐलान होना भी है।

टिकट कटने की लटक रही तलवार !

अब पार्टी ने उपचुनाव हारने वाले एदल सिंह के नाम की घोषणा तो कर दी, लेकिन उनके साथ ही उप चुनाव हार चुके ग्वालियर पूर्व से मुन्नालाल गोयल, डबरा से पूर्व मंत्री इमरती देवी, मुरैना से रघुराज कंसाना, दिमनी से गिर्राज दंडोतिया और करेरा से जसवंत जाटव के नाम घोषित न कर होल्ड कर दिए। ये सभी विधायक पद छोड़कर सिंधिया के साथ बीजेपी में शामिल हुए, लेकिन उपचुनाव हार गए। अब इन लोगों को भी रणवीर की तरह अपना टिकट कटने की तलवार लटकती नजर आ रही है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है एक से दूसरे दल में नेताओं के जाने का सिलसिला भी चल पड़ेगा।

अब देखना ये होगा कि रणबीर जाटव बीजेपी में बने रहते हैं या फिर टिकट कटने से नाराज होकर कांग्रेस का दामन थाम लेंगे। सियासी जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में कुछ और समर्थकों के टिकट कट सकते हैं, जिससे बगावत बढ़ सकती है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के कुछ समर्थक पहले ही बीजेपी से अलग हो चुके हैं। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि बीजेपी के अंदर चुनाव हारे सिंधिया समर्थकों का फ्यूचर क्या है।

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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