Kathal Film Review: सरकारी व्यवस्था पर कटाक्ष करती है सान्या मल्होत्रा स्टारर फिल्म कटहल

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सान्या मल्होत्रा स्टारर फिल्म कटहल नेटफ्लिक्स पर आ चुकी है। सान्या मल्होत्रा एक हाजिरजवाब पुलिस वाली के रोल में हैं, राजपाल यादव भी फिल्म में अच्छे खासे टाइम के लिए दिखाई देते हैं। ट्रेलर में तो हमने देखा कि मथुरा के MLA के घर के आंगन से दो कटहल, माफ कीजिएगा फिल्म में इन्हें सुडौल कटहल बताया गया है, वो चोरी जाते है।

फिर क्या नेता जी पुलिस से लेकर मीडिया तक में हल्ला मचा देते है और कहते हैं कि जब MLA के घर चोरी है सकती, तो आम जनता का तो बंटा धार है गओ। फिर क्या पुलिस भी जी-जान लगाकर दोनों कटहल को ढूंढने में लग जाती है, वैसे इतना ट्रेलर मे देखा जा चुका है। बाकी फिल्म में क्या आम और खास है, चलिए जानते है।

फिल्म की कहानी मथुरा की है और कैसे पुलिस सब काम छोड़कर किसी माननीय के लिए कटहल जैसी चीजों को ढूंढने में जी-जान लगा देती है, ऐसी ही घटनाओं पर एक व्यंग्य यानी कि उपहास, मजाक और आलोचना का काम्बिनेशन है, जो करीब दो घंटे की है, लेकिन वो दो घंटे स्क्रीन पर जो कुछ भी होता है, वो सिनेमा के लिहाज से अच्छा लगता है।   

वैसे सबसे पहले ये बता देना जरुरी है कि फिल्म मथुरा की है और मथुरा में इस्तेमाल किए जाने वाले शब्दों, बॉडी लॉग्वेज, इर्द-गिर्द वाले कैरेक्टर और सटायर्स को फिल्म बहुत ही बढिया ढंग से दिखाती है, जो पूरी फिल्म में आपका ध्यान खीचे रखता है, जैसे कि फिल्म में इयरफोन को कनचोंगा बोलते हैं। फिल्म में सटायर्स बिना ज्यादा वक्त लिए सीधे मुद्दों पर बात करती है, वो भी काफी अच्छा और फ्रैश है, जिसका क्रेडिट फिल्म के राइटर अशोक मिश्रा और यशवर्धन मिश्रा को जाता है। साथ ही यशवर्धन फिल्म के डायरेक्टर भी है, जिसमें भी उन्होंने फिल्म को अच्छा प्रेजेंट किया है।

वैसे ऐसा नहीं है कि फिल्म में सिर्फ कॉमेडी ही है, फिल्म के एंड के साथ ही कई सीन्स में आपको सामाजिक मुद्दों पर कटाक्ष भी देखने को मिलते है। जैसे कि जब कटहल के न मिलने पर, कैसे ऊंची पोस्ट पर बैठा हुआ पुलिस वाला मामले की इनचार्ज पुलिस कर्मी से आसानी से कह देता है कि माली को अंदर करो और केस को रफा-दफा करो। वहीं जब माली पुलिस स्टेशन जाता है और उसे बैठने के लिए बोला जाता है तब वो जमीन पर बैठ जाता है। ये सीन कुछ सेकेंड में ही बहुत कुछ बोल देते हैं। फिल्म अमीरी-गरीबी, ऊंच-नीच पर बहुत वक्त भी नहीं देती लेकिन कटाक्ष करने में भी पीछे नहीं रहती है।

अब एक्टिंग पर भी बात कर लेते हैं, सान्या मल्होत्रा इंस्पेक्टर के रोल में है और यकीन मानिए उनकी एक्टिंग से आपको यकीन होता है कि मथुरा में एक पुलिस वाली ऐसी है, बॉडी लैग्वेज से लेकर उनके डायलॉग की डिलीवरी तक, सब में वो पास होती हैं।

राजपाल यादव, वो नाम जिनकी एक्टिंग की मिशाल दी जानी चाहिए, फिल्म में वो पत्रकार है, यानी कि मीडिया जिसे लोकतंत्र का चौथा खंभा कहते है, दरअसल इस बात को यहां बताना इसलिए जरुरी है क्योंकि फिल्म में इसे सटायर के तौर पर बेहेतरीन इस्तेमाल में लाया गया है।

मीडिया को जिस तरह से दिखाया जाता है, वो भी कमाल है। जैसे जब रामपाल यादव एक न्यूज प्रेंजेट करते है तो नीचे की पट्टियों में न्यूज लिखकर आती है कि मैनेजर के बैंक अकाउंट से ही चोरी हो गई, वहीं राजपाल यादव फिल्म की शुरुआत में कॉमिडी तो आखिर तक संजीदा वाले रोल में बेहेतरीन लगते हैं और फिल्म के आखिर में 10 मिनट का मेसी सीक्वेंस है वो भी कमाल है, तो वहीं विधायक के रोल में विजय राज ने अपना किरदार बखूबी निभाया है।

कॉन्स्टेबल के रोल में अनंत जोशी और एक्ट्रेस नेहा सराफ़ ने भी अच्छा काम किया है। ओवरऑल कटहल को एक ऐसी एवरग्रीन सिनेमा का दर्जा दिया जा सकता है जिसे चाहे आप 5 साल बाद भी देखें, मजा ही आएगा।

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