खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू के अमेरिका में रोड एक्सीडेंट में मारे जाने का दावा !

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खालिस्तान. इस शब्द से वास्ता बरसों पुराना है. आजादी की लड़ाई से पहले भी इसका जिक्र कई बार आया BBC की रिपोर्ट बताती है मुस्लिम लीग के लाहौर घोषणापत्र के जवाब में डॉक्टर वीर सिंह भट्टी ने एक पैम्फ़लेट में इसका इस्तेमाल पहली बार 1940 में किया था. तब से लेकर अब तक लगातार खालिस्तान की मांग उठती आ रही है. मुल्क के बंटवारे के दौरान भी खालिस्तान की मांग जोरों पर उठी थी. लेकिन इसका रिजल्ट कुछ नहीं आया और आज भी खालिस्तान को लेकर सिख मांग उठाते रहते है. भारत के साथ साथ अब अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों में रह रहे कई सिखों द्वारा खालिस्तान की मांग उठाई जा रही है. सिख फ़ॉर जस्टिस अमेरिका का ग्रुप है. ग्रुप का प्रमुख चेहरा पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से लॉ ग्रेजुएट गुरपतवंत सिंह पन्नू हैं. इस बीच खबर है कि पन्नू की सड़क हादसे में मौत हो गई है. जो सोशल मीडिया पर काफी ट्रेंड कर रही है. हालांकि इस बारे में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया जा रहा है.


सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ग्रुप को भारत सरकार ने 10 जुलाई, 2019 को UAPA के तहत बैन कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि संगठन का अलगाववादी एजेंडा है. इसके साल भर बाद 2020 में भारत सरकार ने खालिस्तानी समूहों से जुड़े 9 लोगों को आतंकवादी घोषित किया और लगभग 40 खालिस्तान समर्थक वेबसाइटों को बंद कर दिया. जिसके बाद से खालिस्तानी कट्टरपंथियों की टेंशन बढ़ी हुई है. बताया जाता है कि पिछले 60 दिनों में 3 खालिस्तानी आतंकवादियों – हरदीप सिंह निज्जर, अवतार सिंह खांडा और परमजीत सिंह पंजवार के मारे जाने के बाद वो छिपा हुआ था.

कौन है गुरपतवंत सिंह पन्नू ?
अमृतसर के खानकोट का रहने वाला
अमेरिका में बसा एक वॉन्टेड आतंकवादी
'सिख फॉर जस्टिस' का स्वयंभू सरगना
पाक की खुफिया एजेंसी ISI से फंडिंग का आरोप
खालिस्तान की स्थापना को लेकर डींगे हांकना
सोशल मीडिया पर भारत के खिलाफ प्रॉपगेंडा वॉर
कृषि आंदोलन के दौरान NIA की FIR में आया नाम

दरअसल भारत में जब कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन चल रहा था. उसी दौरान विदेशों में भारतीय दूतावासों के बाहर खालिस्तानी संगठन सिख फॉर जस्टिस के आतंकवादी ने प्रदर्शन किया था. इस मामले में NIA ने भारत सरकार के खिलाफ भावनाओं को भड़काने के आरोप में FIR दर्ज की थी.

क्या है सिख फॉर जस्टिस का उद्देश्य?
सिखों के लिए एक स्वायत्त देश बनाना है. जिसके लिए ग्रुप सिख समुदाय के लोगों का सहयोग लेने की कोशिश कर रहा है.

वहीं भारत की ओर से देश के बाहर बैठे ऐसे कट्टरपंथियों को एक के बाद एक जख्म दिए जा रहे हैं. पिछले दिनों खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल के जरिए भी भारत में दंगा भड़काने की साजिश हुई थी. जिसके बाद उसे सलाखों के पीछे भेज दिया गया था. इस बीच एक महीने के अंदर पाकिस्तान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा से भारत विरोधी ऑपरेशन चलाने वाले तीन की मौत हो चुकी है.

 हरदीप सिंह निज्जर
भारत के जालंधर का रहने वाला
खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) का प्रमुख
NIA ने घोषित किया था 10 लाख का इनाम
भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा में शामिल
साल 2010 में बम विस्फोट में आया नाम
ISI से मदद मिलने का दावा
कनाडा में दो हमलावरों ने गोलियों से भूना

अवतार सिंह खांडा
पंजाब के मोगा जिले का रहने वाला था
15 जून को ब्रिटेन में निधन हुआ
सिख युवाओं को देश के खिलाफ भड़काता था
लंदन में भारतीय उच्चायोग में हुई हिंसा का मास्टमाइंड
कथित तौर पर खांडा ने उच्चायोग से तिरंगा उतारा था
वारिस पंजाब दे के चीफ अमृतपाल का करीबी
मौत का कारण फूड पॉइजनिंग बताया गया
इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेस (IEDs) बनाने में एक्सपर्ट
एक कट्टरपंथी चैनल खालिस्तान टीवी से भी जुड़ा रहा

अवतार सिंह खांडा ने साल की शुरुआत में लंदन में भारतीय उच्चायोग में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था. ये वो वक्त था, जब अमृतपाल सिंह फरार था और उसकी भारत में तलाश की जा रही थी. खांडा अपने स्टूडेंट वीजा पर ब्रिटेन में एंट्री लिया और इसके बाद उसे राजनीतिक शरण दी गई.

परमजीत सिंह पंजवड़
तरनतारन के झब्बाल गांव का रहने वाला
7 मई को पाकिस्तान के लाहौर में हत्या कर दी गई
1990 से मलिक सरदार सिंह के नाम से छिपा था
हथियारों और ड्रग्स की सप्लाई का रैकेट चलाता था
खालिस्तान कमांडो फोर्स (KCF) का चीफ था
30 जून, 1999 चंडीगढ़ पासपोर्ट कार्यालय के पास बम विस्फोट में नाम
ISI के संरक्षण से आतंकी वारदातों को अंजाम

केंद्र की मोदी सरकार भी आतंकियों को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है. अब भारत की एजेंसियों ने खालिस्तान सपोर्टर्स मोस्ट वॉन्टेड की एक और ब्लैक लिस्ट जारी की है जिसमें खालिस्तानी समर्थकों का सारा कच्चा चिट्ठा रखा गया है. हाल-फिलहाल इनकी संख्या 9 मानी जा रही है. जो जिंदा रहकर भारत की हदों से बाहर से छिपकर, भारत के खिलाफ वॉर छेड़ने की घिनौनी कोशिशों में जुटे हुए हैं. इन पर NIA और IB-RAW पैनी नजर 24 घंटे रख रही हैं.

 
कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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