राज्यसभा चुनाव 2024 से पहले जानिए किस राजनीतिक दल के पास कितनी सीटें?

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मोदी सरकार अपने इस कार्यकाल में अब तक राज्यसभा में बहुमत हासिल नहीं कर पाई है। तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव में मिली जोरदार जीत के बावजूद बीजेपी उच्च सदन में अपने सांसदों की संख्या नहीं बढ़ा पाई थी। वहीं दूसरी तरफ तेलंगाना में जीत हासिल करके कांग्रेस को दो एक्स्ट्रा सीटें मिल गईं हैं।
देश में आम चुनाव आने वाले कुछ वक्त के बाद होने वाले हैं। लेकिन उससे पहले रिटायर हुए 56 सदस्यों  की सीटें खाली हो गई हैं, जिस पर चुनाव आयोग के मुताबिक, आने वाली 27 फरवरी को चुनाव होंगे। इस समय राज्यसभा में कुल सदस्यों की  संख्या 239 है, हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिक्षा क्षेत्र में मशहूर पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर सतनाम सिंह संधू को राज्यसभा सांसद मनोनीत किया है और भाजपा 93 सदस्यों के साथ सबसे बड़े पार्टी है। 30 सदस्यों के साथ कांग्रेस दूसरे स्थान पर है।
आने होने वाले चुनाव का गणित कुछ ऐसा है कि बीजेपी फिर से अपने 30 सदस्यों को राज्यसभा ले जा सकती है, इसके साथ ही कांग्रेस भी अपने पुराने सदस्यों के साथ तेलंगाना से 2 मेंबर को जीत दिलाने की कंडीशन में है।
अभी राज्यसभा की क्या कंडीशन है पहले उस पर बात कर लेते हैं।
बीजेपी के 93 राज्यसभा सांसद हैं, कांग्रेस के 30, टीएमसी के 13, आप के पास 10, डीएमके के 10, बीजेडी के 9, वाईएसआरसीपी के 9, बीआरएस के 7, राजद के 6, सीपीएम के 5, जेडीयू के 5 राज्यसभा सांसद हैं। इनका टोटल होता है 197...
इनके अलावा अन्नाद्रमुक 4, एनसीपी 4, निर्दलीय 3, सपा 4, शिवसेना 3, सीपीआई 2, झामुमो 2, असम गण परिषद 1, बसपा 1, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग 1, जेडीएस 1, केरल कांग्रेस एम 1, एमडीएम 1, मिजो नेशनल फ्रंट 1, नेशनल पीपुल्स पार्टी 1, पीएमके 1, आरएलडी 1, आरपीआई 1, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट 1, तमिल मनीला कांग्रेस 1, तेलुगु देशम पार्टी 1, यूपीपी 1 और 5 नॉमिनेटेड मेंबर मिलाकर 42 सदस्य हैं।
अब इन विधानसभा सीटों से राज्यसभा का गणित समझिए। दरअसल, जब राज्यसभा के चुनाव होते हैं तो विधानसभा की कुल सीटों में राज्य में मौजूद राज्यसभा की सीटों में एक जोड़ कर भाग कर दिया जाता है। फिर जो आंकड़ा आता है उसमें एक जोड़ा जाता है और फिर जो संख्या निकल कर आती है, उतने वोट उस राज्य से किसी राज्यसभा सांसद उम्मीदवार को जीतने के लिए चाहिए होते हैं। अब जाहिर सी बात है कि अगर बीजेपी के पास इन तीन राज्यों में विधायक ज्यादा हैं, तो वो राज्यसभा की सीटें भी ज्यादा जीतेगी।
फिलहाल तीन राज्यों की बात करते हैं जहां बीजेपी को जीत हासिल हुई है। ये राज्य हैं- मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान. इन तीनों राज्यों में कुल 26 राज्यसभा की सीटें हैं। इनमें सबसे ज्यादा 11 राज्यसभा सीटें अकेले मध्यप्रदेश में हैं। इन 11 सीटों में से बीजेपी के पास 8 सीटें हैं और तीन सीटें कांग्रेस के पास हैं। वहीं, राजस्थान की 10 सीटों में से बीजेपी के पास 4 सीटें हैं और कांग्रेस के पास 6 सीटें हैं।
जबकि, छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की कुल पांच सीटें हैं. इनमें चार सीटें कांग्रेस के पास हैं और एक सीट बीजेपी के पास है। हालांकि, साल 2026 में राज्यसभा के चुनाव में ये आंकड़े बदल सकते हैं, क्योंकि इन राज्यों में बीजेपी विधायकों की संख्या पहले के मुकाबले बढ़ गई है। फिलहाल राज्यसभा में बीजेपी के पास 94 सीटें हैं। वहीं एनडीए की बात करें तो उसके पास कुल 108 सीटें हैं।
मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भले ही कांग्रेस पार्टी को हार मिली हो, लेकिन तेलंगाना में उसे जीत भी मिली है। यहां कुल 119 सीटों पर चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस ने 64 पर जीत दर्ज की है। जबकि, सत्ता में मौजूद केसीआर की पार्टी बीआरएस को 39 सीटें मिली हैं। वहीं बीजेपी को 8 सीटें और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को 7 सीटें मिली हैं। अब इसे राज्यसभा के एंगल से समझिए। तेलंगाना में राज्यसभा की कुल सात सीटें हैं। फिलहाल ये सभी सीटें केसीआर की पार्टी बीआरएस के कब्जे में हैं। लेकिन अब आगामी राज्यसभा चुनावों में कांग्रेस को तीन से चार सीटें मिलने की उम्मीद है।
19 जून 2020 को राज्यसभा की 3 सीटों के लिए चुनाव हुआ था। भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया और डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी को प्रत्याशी बनाया था। जबकि दिग्विजय सिंह और फूल सिंह बरैया ने कांग्रेस की तरफ से नामांकन भरा था। इस चुनाव से तीन महीने पहले सिंधिया समर्थक 22 विधायकों ने 10 मार्च 2020 को विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में मौजूदा विधायकों की कुल संख्या 206 रह गई थी। क्योंकि 2 विधानसभा सीटें- मुरैना जिले की जौरा और आगर-मालवा की आगर सीट विधायकों के निधन के बाद खाली थी। इस हिसाब से राज्यसभा के एक प्रत्याशी को कम से कम 52 वोट चाहिए थे। विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा के दो उम्मीदवार- ज्योतिरादित्य सिंधिया (56 वोट) और डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ( 55 वोट) जीतने में कामयाब हुए थे। कांग्रेस की तरफ से दिग्विजय सिंह (57 वोट) ही जीत दर्ज कर सके थे। दूसरे प्रत्याशी फूल सिंह बरैया को केवल 38 वोट मिले थे।

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