जानिये वो दिलचस्प किस्सा, जब शरद यादव ने राजीव गांधी के खिलाफ लड़ा था अमेठी से चुनाव

Home   >   मंचनामा   >   जानिये वो दिलचस्प किस्सा, जब शरद यादव ने राजीव गांधी के खिलाफ लड़ा था अमेठी से चुनाव

274
views

भारतीय राजनीति के माहिर खिलाड़ी और समाजवादी आंदोलन के बड़े नेता शरद यादव अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके जीवन और राजनीति से जुड़ी कहानियां हमेशा ही जिंदा रहेंगी। ऐसी ही एक कहानी है उत्तर प्रदेश के अमेठी उपचुनाव से जुड़ी हुई। जहां इंदिरा गांधी की सरकार गिराने के लिए चौधरी चरण सिंह का बनाया प्लान हो गया था फेल।

मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार की अलग-अलग सीटों से 11 बार सांसद रहे शरद यादव के लंबे राजनीतिक सफर में कई उतार-चढाव आए लेकिन ऐसे कम ही चुनाव रहे जब शरद यादव को हार का सामना करना पड़ा हो। ऐसा ही एक चुनाव था, अमेठी का उपचुनाव।

बात है साल 1981 की, जब एक विमान दुर्घटना में इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी की मौत के बाद अमेठी की सीट खाली हो गई थी और इस सीट पर उप चुनाव के हालात बने। तब शरद यादव युवा जनता दल के प्रेसिडेंट थे और प्रधानमंत्री रहे चौधरी चरण सिंह के काफी नजदीक ऐसे में चौधरी चरण सिंह ने लोकदल से शरद यादव को अमेठी से प्रत्याशी बना दिया। वो भी कांग्रेस उम्मीदवार राजीव गांधी के खिलाफ लेकिन शरद यादव का मन इस चुनाव को लड़ने का नहीं था। लेकिन नाना राव देशमुख ने उनसे कहा कि वो केवल चेहरा है बाकि चुनाव खुद लड़ रहे हैं। इस चुनाव में चौधरी चरण सिंह और नाना राव देशमुख ने जमकर प्रचार किया। इसके बाद भी वो राजीव गांधी से बहुत बुरी तरह हार गये।

राजीव गांधी से हारने वाले वो पहले नेता बने। इस उपचुनाव में राजीव गांधी ने शरद यादव को 2 लाख 37 हजार 696 वोटों से हरा दिया..राजीव गांधी के वोटों का प्रतिशत 84.18 फीसदी था।

इस हार के बाद समाजवादी नेता शरद यादव ने एक इंटरव्यू में कहा कि  “मैं अमेठी नहीं जाना चाहता था, लेकिन चौधरी साहब ने जिद पकड़ ली थी। वो राजीव गांधी के खिलाफ मुझे लड़ाना चाह रहे थे। मैं तैयार नहीं था। तब चौधरी साहब नानाजी देशमुख के साथ मुझे एक ज्योतिषी के पास लेकर गए। दोनों की जिद पर मुझे चुनाव लड़ना पड़ा। उन्हें ज्योतिष पर बहुत भरोसा था। ज्योतिषी का कहना था कि राजीव गांधी चुनाव हार जाएंगे और इंदिरा गांधी की सरकार गिर जाएगी।

कहा जाता है चौधरी चरण सिंह ने शरद यादव को लेकर 1984 में बंदायू में भी एक बार प्रयोग किया लेकिन फिर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुये चुनाव में कांग्रेस को बंपर वोट मिले और शरद यादव फिर बंदायूं से चुनाव हार गये। इसके बाद जनता दल के उम्मीदवार के तौर पर साल 1989 के आम चुनाव शरद यादव ने बदायूं से लड़ा और इस सीट से जीत दर्ज की। फिर आया साल 1991 ये वो साल था, जब शरद यादव ने बिहार को स्थायी रूप से अपना राजनीतिक ठिकाना बना लिया और 75 साल की उम्र में शरद यादव ने गुरुग्राम के फोर्टिंस अस्पताल में आखिरी सांस ली है।

Comment

https://manchh.co/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!