Lala Amarnath को 12 सालों तक कर दिया गया था टीम से बाहर

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भारतीय क्रिकेट के पितामह दिग्गज क्रिकेटर लाला अमरनाथ ने दुनिया का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया। ये इकलौते खिलाड़ी जिन्होंने महान बल्लेबाज सरडॉन ब्रैडमैन को हिट विकेट किया। भारत के पहले खिलाड़ी हैं, जिन्होंने पहली बार शतक मारा, वो भी इंग्लैंड के खिलाफ।

दुनिया के इकलौते खिलाड़ी जिन्होंने महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन को हिटविकेट किया। भारत के पहले खिलाड़ी हैं, जिन्होंने पहली बार शतक मारा, वो भी इंग्लैंड के खिलाफ। ये वो पहले भारतीय कप्तान ने जिनकी सरपरस्ती में भारत ने पहली बार पाकिस्तान की टीम को हराया।

आज कहानी भारतीय क्रिकेट के पितामह कहे जाने वाले दिग्गज क्रिकेटर लाला अमरनाथ की। जिन्होंने दुनिया का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया। पर करियर में 12 साल तक टीम से बाहर कर दिया गया।

11 सितंबर, साल 1911 पंजाब के कपूरथला में लाला अमरनाथ का जन्म हुआ। उनका पूरा नाम नानिक अमरनाथ भारद्वाज है। शुरुआती पढ़ाई कपूरथला से की और इसी दौरान जब अंग्रेजों को क्रिकेट खेलते देखा तो इस खेल की तरफ दिलचस्पी बढ़ी।

माता-पिता से जिद कर एक बैट मांगा। पैसे तो थे नहीं फिर भी माता-पिता ने बेटे की इच्छा पूरी की। इसके बाद वो कपूरथला में ही एसएसएस क्लब में खेलने लगे। 10-11 के हुए थे अचानक मां का निधन हो गया। लाहौर जाना पड़ा, अपने दादा के पास। जहां दादा ने उनकी परवरिश की।

फिर ग्रेजुएशन करने अलीगढ़ मुस्लिम गए, जहां यूनिवर्सिटी की टीम से खेलने लगे। उनका शानदार खेल देखकर पटियाला के महाराजा की क्रिकेट टीम के कोच फ्रैंक टैरंट उनके मुरीद हुए।

उन्हीं के सिफारिश पर लाला अमरनाथ को महाराजा पटियाला की टीम में जगह मिली। 

लाल अमरनाथ ने एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह कई अंग्रेज क्रिकेटर्स को लाते थे। मैं उन्हें नेट्स में प्रैक्टिस करते देखता। फिर घर में शीशे के सामने खड़े होकर स्ट्रोक्स का अभ्यास करता। मैंने उसी दौरान समझा की सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज हमेशा अपने पैरों का इस्तेमाल कैसे करते हैं।’ 

लाला अमरनाथ ने गुजरात, महाराजा पटियाला, रेलवे, यूपी के लिए खेला है। इसके बाद वो इंडियन क्रिकेट टीम में शामिल हुए।

साल 1933 जब भारत में क्रिकेट अपनी जड़ें जमा रहा था, तब 22 साल के उम्र में लाला अमरनाथ ने अपना पहला ही टेस्ट मैच खेलते हुए इंग्लैंड के खिलाफ 180 गेंदों पर 118 रन बनाएं। और रातों रात चर्चा में आए। ये इंडियन क्रिकेट हिस्ट्री का भी पहला टेस्ट शतक था। इस पारी को आज भी याद किया जाता है।

तब अखबारों में लिखा गया था "जिन चुनिंदा भाग्यशाली लोगों ने इस पारी को देखा, वो इसे कभी नहीं भूलेंगे। जो नहीं देख पाए, उन्हें हमेशा मलाल रहना चाहिए।"

फिर अगले तीन सालों तक अपने बेहतरीन खेल से लोगों को अपना मुरीद बनाया। पर अगले 12 सालों को लिए उन्हें भारतीय टीम में जगह नहीं मिली। वजह एक विवाद बना।

साल 1936, भारतीय टीम विजयनगरम के महाराजा 'विजी' की कप्तानी में इंग्लैंड के दौरे पर थी। इस दौरान सीके. नायडू के साथ चल रहे निजी झगड़े की वजह से विजी ने अमरनाथ के साथ बैटिंग करने से मना कर दिया। उस वक्त तो लाला अमरनाथ ने विजी की बात मान ली और बैटिंग क्रम में बदलाव के बाद शानदार शतक भी जड़ा।

पर जब विजी ने उन्हें गेंदबाजी का सही मौका नहीं दिया, तो वो झल्ला गए। बाद में फिर से बैटिंग का नंबर आयातो विजी ने भी कुछ ऐसा ही किया। फिर क्या था, गरमागरमी में लाला अमरनाथ ने पैड्स उतार फेंके और कमरे से बाहर चले गए। विजी ने अमरनाथ को टीम से बाहर कर दिया। 

लेकिन वो भारतीय घरेलू क्रिकेट में खेलते रहे और एक मजबूत प्रभाव वाले खिलाड़ी बने रहें। देखते-देखते 12 साल का वक्त गुजर गया। साल 1946 में भारत के इंग्लैंड दौरे के दौरान उनकी वापसी हुई।

टेस्ट क्रिकेट में 45 और फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 463 विकेट लेने वाले लाला अमरनाथ एक बेहतरीन गेंदबाज भी थे। वो दुनिया के इकलौते गेंदबाज हैं जिन्होंने साल 1947 में सर डॉन ब्रैडमैन को हिटविकेट किया।

साल 1952 में लाला अमरनाथ पाकिस्तान के दौरे पर बतौर कप्तान टीम के साथ गए। जहां उन्होंने पाकिस्तान को चारों खाने चित्त किया। ये पाकिस्तान के खिलाफ भारत की पहली जीत थी।

साल 1955 में उन्होंने रिटायरमेंट ले लिया। फिर वो चीफ सेलेक्टर, मैनेजर और टीम के कोच जैसी जिम्मेदारी संभाली।

साल 1938 में कैलाश कुमारी से शादी की। उनके तीनों बेटे सुरिंदर, मोहिंदर और रजिंदर ने भी पिता की तरह ही क्रिकेट को ही करियर बनाया। उनकी दो बेटियां – कमला और गुड़िया।

ऐसे कहा जाता है लाला अमरनाथ अपने गुस्से को कंट्रोल नहीं कर पाते थे। एक शानदार क्रिकेटर तो थे ही वो एक बेहतरीन कुक भी थे। मुगलई और इंडियन फूड में उनकी पकड़ ली।

5 अगस्त साल 2000 करीब 90 साल की उम्र में भारत का ये पहला शतक फिर दुनिया छोड़ कर चला गया। लाला अमरनाथ अपने शानदार खेल की वजह से हमेशा अमर रहेंगे।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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