Lok Sabha Election 2024 : इन 5 राज्यों ने बढ़ाई BJP की टेंशन

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बीजेपी, यूपी, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और तमिलनाडु पर खास फोकस कर रही है। इन 5 राज्यों में लोकसभा की करीब 249 सीटें हैं। 2019 में बीजेपी को इन 249 में से 120 सीटों पर जीत मिली थी।

कहा जाता है कि बीजेपी ऐसी पार्टी है जिसकी हर चाल चुनावी होती है। बीजेपी (BJP) खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी कहती है। उत्तर भारत और हिंदी भाषी राज्यों पर नजर डालें तो बीजेपी लगभग पीक पर पहुंच गई है। लेकिन बीजेपी के सामने साउथ के राज्यों में अपनी जड़ें जमाने की चुनौती है। हालांकि बीजेपी पिछले कुछ सालों से इस पर फोकस भी कर रही है। लेकिन, उसे मनमाफिक रिजल्ट नहीं मिल रहा। सूत्रों के मुताबिक  बीजेपी, यूपी, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और तमिलनाडु पर खास फोकस कर रही है। इन 5 राज्यों में लोकसभा की करीब 249 सीटें हैं। 2019 में बीजेपी को इन 249 में से 120 सीटों पर जीत मिली थी। पिछले लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) में बीजेपी ने यूपी में 80 में से 62 सीटें जीतीं। महाराष्ट्र की 48 में से 23 सीट, पश्चिम बंगाल में 42 में से 18 सीटें, बिहार की 40 में से 17 सीटें हैं। अगर दक्षिण भारत के राज्यों की बात की जाए तो तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश में एक भी सीट नहीं मिली। बीजेपी के लिए यहां अपनी पकड़ बनाना चुनौती है।

सबसे पहले देश के सबसे बड़े राज्य और सबसे ज्यादा 80 लोकसभा सीटों वाले प्रदेश यूपी की बात करें तो यहां विपक्षी दल अलग रणनीति के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश पर पीएम मोदी और बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह का पूरा ध्यान है। यूपी की इन्हीं 80 सीटों में से जो सबसे ज्यादा सीटें जीतता है। वो केंद्र में सरकार बनाता है। दरअसल, उत्तर प्रदेश को अवध, पूर्वांचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी यूपी में बांटा गया है। पश्चिमी यूपी में लोकसभा की कुल 27 सीटें हैं। साल 2019 लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव और मायावती ने महागठबंधन बनाया। इसमें राष्ट्रीय लोक दल भी शामिल हुई। महागठबंधन के तहत बसपा 38, सपा 37 और रालोद तीन सीटों पर चुनावी मैदान में उतरी। एनडीए से बीजेपी 78 और अपना दल एस 2 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। यूपीए तब तीसरे गठबंधन के रूप में चुनावी मैदान में थी। कांग्रेस ने इस चुनाव में 67 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। इस चुनाव में बीजेपी 62, सहयोगी अपना दल एस 2 और महागठबंधन की ओर से बसपा ने 10 और सपा ने 5 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस को महज एक सीट पर जीत मिली। लेकिन, इस बार लोकसभा चुनाव 2019 वाली स्थिति नहीं है। इस बार अखिलेश को चाचा शिवपाल यादव के साथ होने का फायदा मिल सकता है। बीजेपी ने मुस्लिम वोट बैंक में सेंधमारी के लिये यूपी में शुक्रिया मोदी भाईजान कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। जिसकी टैगलाइन ना दूरी है ना खाई है, मोदी हमारा भाई है रहेगी। इसके अलावा ओबीसी वोट बैंक के लिए भी खास प्लान बनाया है।

बंगाल में बीजेपी से सीधी टक्कर

वहीं पश्चिम बंगाल की बात करें तो राज्य से वाम दलों और कांग्रेस का करीब-करीब सफाया हो चुका है। यहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) चीफ ममता बनर्जी की और बीजेपी की सीधी लड़ाई होने वाली है। साल 2014 में बंगाल में सिर्फ दो सीट जीतने वाली बीजेपी ने साल 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में बंगाल में 42 में से 18 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं, ममता बनर्जी की TMC ने 22 सीटें हासिल की थी। 2019 में बीजेपी ने 40.3 प्रतिशत वोट हासिल किया था, जबकि TMC का वोट प्रतिशत 43.7 फीसदी रहा था। इस बार बीजेपी ने बंगाल में 35 सीटों पर जीत का टारगेट सेट किया है। लेकिन बीजेपी के सामने 2024 के चुनाव में  चैलेंज भी कम नहीं हैं। 35 सीटों के लक्ष्य को हासिल करने में जुटी बीजेपी के सामने पश्चिम बंगाल में आंतरिक कलह चिंता का सबब बन चुकी है। पार्टी को इससे भी निपटना होगा।

महाराष्ट्र के लिए बीजेपी ने बनाया खास प्लान  

महाराष्ट्र की लोकसभा सीटों पर मुकाबला I.N.D.I.A और NDA गठबंधन के बीच देखने को मिलेगा। 2024 के लोकसभा चुनावों में 2019 की तरह बड़ी जीत हासिल करने के लिए महाराष्ट्र बीजेपी ने खास प्लान बनाया है। इस बार महाराष्ट्र में बीजेपी के सहयोगी दल बदल चुके हैं। महाराष्ट्र में बीजेपी एनसीपी (अजित पवार गुट) और शिवसेना (शिंदे गुट) के साथ मिलकर चुनाव में उतरेगी। 48 सीटों वाले महाराष्ट्र में बीजेपी को सहयोगियों के साथ सीटें शेयर करनी होंगी। वहीं एबीपी न्यूज और सी वोटर ने अपने ओपिनियन पोल में महाराष्ट्र में बीजेपी को नुकसान होने की बात कही है। ओपिनियन पोल में NDA को 19 से 21 सीटें मिलने का अनुमान किया है, जबकि I.N.D.I.A गठबंधन को 26 से 28 सीटें मिलने की संभावना जताई गई हैं। ओपिनियन पोल में 1 से दो सीट अन्य के खाते में जाने की बात सामने आई है। साल 2019 में, बीजेपी ने 25 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था, और 23 सीटें अपने तत्कालीन सहयोगी, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली अविभाजित शिवसेना के लिए छोड़ी थीं। महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद पवार) और कांग्रेस गठबंधन में हैं। तीनों पार्टियां इंडिया गठबंधन का हिस्सा भी हैं। ऐसे में महाराष्ट्र में बीजेपी के लिए राह आसान नहीं है।

बिहार में मुकाबला होगा तगड़ा

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव से पहले बड़ा दांव चला है। उन्होंने जनता दल (यूनाइटेड) की कमान एक बार फिर अपने हाथ में ले ली है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की हुई बैठक में राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के इस्तीफा देने के बाद उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जातिगत सर्वे के आर्थिक आंकड़ों की रिपोर्ट जारी होने के साथ राज्य में आरक्षण का दायरा 50 फीसदी से बढ़ाकर 75 फीसदी करने का प्रस्ताव विधानसभा में रखा है। राजनीतिक जानकार नीतीश कुमार के दांव को लोकसभा चुनाव के लिए ठोस कदम देख रहे हैं। बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं। I.N.D.I.A गठबंधन में आरजेडी, जेडीयू, कांग्रेस के साथ ही लेफ्ट पार्टियां शामिल हैं। यानी 40 लोकसभा सीटों के लिए छह पार्टियां दावेदार हैं। जबकि पिछले लोकसभा चुनाव में जेडीयू, बीजेपी और एलजेपी के साथ मिलाकर चुनाव लड़ी थी। 2019 में एनडीए गठबंधन ने बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से 39 पर जीत दर्ज की थी। एक सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी की जीत हुई थी। इस स्थिति में बीजेपी की नजर उन 17 संसदीय क्षेत्रों पर है जो विरोधियों के कब्जे में है। NDA में फिलहाल एलजेपी (रामविलास), राष्ट्रीय एलजेपी, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक जनता दल हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि जेडीयू से अलग होने के बाद बीजेपी इस बार किसी भी स्थिति में अपनी सहयोगी पार्टियों के लिए ज्यादा सीट नहीं छोड़ेगी।  

तमिलनाडु में बीजेपी के लिए बढ़ी चुनौती

तमिलनाडु में लोकसभा की 39 सीटें हैं। AIADMK ने NDA का साथ छोड़ दिया है, ऐसे में बीजेपी अकेले यहां पर चुनाव लड़ सकती है। तमिलनाडु में DMK और AIADMK के बीच ही मुकाबला होता रहा है। इसी कारण हाल ही में दो बार गृह मंत्री अमित शाह वहां का दौरा कर चुके हैं, बीजेपी यहां की 7 सीटों पर हर हालत में जीतना चाहती है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई भी यहां पार्टी को मजबूत करने के लिए जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं और वो भष्टाचार समेत कई मुद्दों पर यात्रा निकाल रहे हैं। अगर इस कोशिश में वो सफल होते हैं तो लोकसभा चुनाव 2024 की तस्वीर यहां पर बदल सकती है। बता दें कि 2019 में AIADMK ने बीजेपी को 6 सीटें दी थी, लेकिन इस बार वो साथ नहीं ऐसे में BJP की पूरी कोशिश अपने दम पर सीटें हासिल करने की है। साल 2019 में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और गठबंधन ने राज्य की 39 सीटों में से 37 पर जीत दर्ज की थी तो वहीं ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) को केवल 1 ही सीट हासिल हुई थी।

बीजेपी को नए मुद्दों की तलाश 

बीजेपी फिलहाल मोदी की गारंटी के रथ पर सवार है और लगातार कहती है कि बीजेपी ने अपने वादे पूरे किए हैं। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण, जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने का मुद्दा शुरू से ही बीजेपी और संघ का मुद्दा रहा है। अब आर्टिकल 370 हट चुका है और 22 जनवरी को अयोध्या में भव्य राम मंदिर में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। बीजेपी नागरिक संशोधन बिल पास करा चुकी है, हालांकि इसे अभी लागू किया जाना बाकी है। महिला आरक्षण का कानून भी बन गया है। ऐसे में अब बीजेपी के सामने चुनौती ये है कि वो कौन से नए मुद्दे होंगे जो बीजेपी के लिए वोट बैंक जुटाएंगे। फिलहाल समान नागरिक संहिता का मुद्दा तो है लेकिन ये भी काफी समय से चल रहा है। बीजेपी की कई राज्यों की सरकारें इस पर काम भी कर रही हैं। बीजेपी की चुनौती नए मुद्दे तलाशने के साथ-साथ उनके इर्द-गिर्द माहौल बनाने की भी है। साथ ही बीजेपी जिस रेवड़ी पॉलिटिक्स पर निशाना साधती है, उसकी क्या काट निकालेगी और खुद को उससे कैसे अलग करेगी, ये भी बीजेपी की चुनौती है।

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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