Lok Sabha Elections 2024: असम में मुस्लिम मैरिज एक्ट को लेकर विवाद क्यों हो रहा है ?

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लोकसभा चुनाव को लेकर देश का सियासी माहौल काफी गर्म है। जहां एक तरफ नरेंद्र मोदी विपक्ष को घेरने के लिए रैलियां कर रहे हैं तो वहीं I.N.D.I.A गठबंधन के नेता भी अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। इस बीच असम में मुस्लिम मैरिज एक्ट को लेकर विवाद छिड़ गया है। सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट चीफ बदरुद्दीन अजमल पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें चुनाव से पहले शादी कर लेनी चाहिए। चुनाव के बाद एक से ज्यादा शादी करने वालों को जेल भेजा जायेगा। क्योंकि इससे जुड़े कानून का ड्राफ्ट तैयार है, जो चुनाव के बाद लागू होगा। ऐसे में आइए समझते हैं कि आखिर मुस्लिम मैरिज एक्ट को लेकर विवाद क्यों हो रहा है?

पिछले साल असम सरकार ने बहुविवाह और लव जिहाद के खिलाफ कानून लाने का वादा किया था। फरवरी के विधानसभा सत्र में बाल विवाह के खिलाफ कानून पारित किया गया। अब सरकार एक से ज्यादा शादी करने वालों के खिलाफ कानून बनाने जा रही है। इस पर AIUDF चीफ बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि वो इस कानून का विरोध करते हैं, क्योंकि ये गैर-इस्लामिक है। इस पर कांग्रेस नेता रकीबुल हसन ने चुटकी लेते हुए कहा कि बदरुद्दीन बूढ़े हो गए हैं। इसलिए दूसरा निकाह नहीं कर सकते। इस पर बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि वो अभी भी दूसरा निकाह कर सकते हैं। उन्होंने खुद को बलवान अजमल बताते हुए हिमंत बिस्वा सरमा को चुनौती देते हुए कहा कि कानून बनने के बाद भी उनके पास निकाह करने की हिम्मत है। इस पर असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि अभी मैं अजमल को दूसरी शादी के लिए ग्रीन सिग्नल दे रहा हूं, लेकिन उन्हें चुनाव से पहले ही इसे निपटा लेना चाहिए। अगर वो मुझे अपनी शादी में बुलाएंगे तो मैं भी जाऊंगा, क्योंकि अभी इसके लिए कोई कानून नहीं है। लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद बहुविवाह बंद हो जाएगा। इस कानून के लिए ड्राफ्ट तैयार है। चुनाव के बाद दूसरी शादी करेंगे तो जेल भेज दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी असम की सभी सीटें जीतेगी। दरअसल, पिछले दिनों सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद राज्य सरकार असम में भी UCC लागू करेगी।

मुस्लिम मैरिज एक्ट को किया खत्म

बता दें कि हाल ही में असम सरकार ने राज्य में करीब 89 साल पुराने मुस्लिम मैरिज एंड डिवोर्स एक्ट 1935 को खत्म कर दिया। ये फैसला सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में लिया गया था। अब राज्य में सभी शादियां स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत की जाएंगी। अजमल ने इसे निरस्त करने का विरोध करते हुए इसे मुसलमानों को भड़काने और बीजेपी के पक्ष में वोटर्स का ध्रुवीकरण करने की रणनीति बताया।

नागरिकता संशोधन कानून भी बड़ा मुद्दा

सबसे पहले इस राज्य को आबादी के दृष्टिकोण से समझते हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक, यहां की जनसंख्या 3 करोड़ 12 लाख के आसपास है। इसमें करीब 34% आबादी मुसलमानों की है। ऐसे में समझा जा सकता है कि असम में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) भी बड़ा मुद्दा है। यही वजह है कि CAA को लेकर कुछ स्थानीय संगठन आंदोलनरत हैं तो उसे और हवा देने की कोशिश कांग्रेस और AIUDF जैसे दल कर रहे हैं। ये हालात BJP के लिए चुनौती के रूप में दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद बीजेपी CAA को लेकर दमखम से ताल ठोंक रही है तो उसकी उम्मीदें दूसरे पहलुओं से जुड़ी हैं। राज्य की आबादी में 70 लाख से ज्यादा संख्या हिंदू बंगालियों की है। जिन्हें लंबे समय से CAA जैसे कानून का इंतजार था।

11 सीटों पर ही लड़ेगी BJP

उत्तर पूर्व भारत का राज्य असम किसी भी लोकसभा चुनाव के दौरान खास महत्व रखता है, क्योंकि राज्य की सीमाएं भूटान, म्यांमार और बांग्लादेश जैसे देशों के साथ लगती हैं। 2019 के आम चुनाव में, बीजेपी ने 14 लोकसभा सीटों में से 36 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 9 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस 35 प्रतिशत वोट शेयर के साथ सिर्फ 3 सीटें जीत सकी, वहीं, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने करीब सात प्रतिशत वोट शेयर पाकर एक सीट जीती, एक सीट निर्दलीय ने जीती। इसके अलावा साल 2014 के लोकसभा चुनाव में, बीजेपी ने 36 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 7 सीटें जीतीं थी, जबकि कांग्रेस 29 प्रतिशत वोट शेयर के साथ सिर्फ 3 सीटें जीत सकी, वहीं, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने करीब 14 प्रतिशत वोट शेयर पाकर 3 सीट जीती थी, एक सीट अन्य ने जीती। इस बार बीजेपी यहां 11 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। NDA की सहयोगी असम गण परिषद 2 सीटों पर और UPPL एक सीट पर चुनाव लड़ रही है।

असम में लोकसभा की 14 सीट 

असम में लोकसभा की 14 सीट हैं। कांग्रेस संयुक्त विपक्षी मंच का गठन कर चुनाव लड़ रही है। इस मंच में 16 पार्टियां हैं, लेकिन गठबंधन में कांग्रेस ने दूसरी पार्टियों को सिर्फ एक सीट दी है। ऐसी स्थिति में 13 सीट पर कांग्रेस और एक सीट डिब्रूगढ़ से असम जातीय परिषद चुनाव लड़ रही है। वहीं, आम आदमी पार्टी ने असम में चुनाव लड़ने का ऐलान कर पार्टी की घड़कनें बढ़ा दी हैं। कुछ सीटों पर TMC भी चुनाव लड़ रही है। लेकिन यहां असली मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही है।

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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