पुरुषवादी मानसिकता को तोड़ न पाए डायरेक्टर कमाल अमरोही

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‘आज मैं तुम्हारा पर्स उठाऊंगा, कल तुम्हारे जुते’

ये कोई फिल्म का डायलॉग नहीं है। ये तल्ख अंदाज़ में बोले गए शब्द बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर और राइटर कमाल अमरोही के हैं और उन्होंने इस तरह से बात अपने दौर की फाइनेस्ट एक्ट्रेस मीना कुमारी से की थी। आखिर क्या वजह थी कि कमाल अमरोही को मीना कुमारी ये कहना पड़ा? जबकि वे मीना कुमारी से बेइंतहा मोहब्बत करते थे।

सैयद अमीर हैदर कमल नकवी जो यूपी के अमरोहा से थे। इनके चाहने वाले इन्हें प्यार कमाल अमरोही कहते थे। कमाल अमरोही पाकिस्तान के मशहूर शायर जॉन एलिया और रईस अमरोही के भाई हैं। एक राइटर से अपना करियर शुरू करने वाले कमाल अमरोही को अपनी पहचान बनाने के लिए 10 साल का लंबा संघर्ष करना पड़ा जब उन्होंने महल फिल्म का डायरेक्शन किया। एक डायरेक्टर के रूप में इनकी ये पहली फिल्म थी। इस इस सस्पेंस थ्रिलर फिल्म का गीत 'आएगा, आएगा, आएगा आनेवाला...' आज भी सुनें तो एक हूक सी पैदा होती है।

ये फिल्म बॉलीवुड की पहली हॉरर फिल्म के रूप में पॉपुलर हुई।

एक शो में एक्टर अन्नू कपूर ने कहा था कि फिल्म 'महल' के असर का अंदाजा तब होता है जब आप इसके तर्ज पर बनी बिमल राय की 1958 में बनी 'मधुमती', बीरेन नाग की 1962 में बनी '20 साल बाद', 1964 में बनी 'कोहरा' और इसी साल आई राज खोसला की 'वो कौन थी' देखते है।

कमाल अमरोही ने महल सुपरहीट होने के बाद साल 1953 में दायरा, 1972 में पाकीजा, साल 1983 में रजिया सुल्तान जैसी फिल्मों का डायरेक्टर किया। बालीवुड में अपनी फिल्मों के जरिए उन्होंने एक से बढ़कर एक काम किया लेकिन उनकी रियल जिंदगी में बेहद उधल पुथल थी। वो वजह थी उनकी मोहब्बत मीना कुमारी। अपने दौर की बेहतरीन एक्टर्स मीना कुमारी इनकी तीसरी पत्नी थी। कमाल ने मीना कुमारी से साल 1952 में शादी की थी। मीना और कमाल की लव स्टोरी बहुत ही खूबसूरत रही, लेकिन पुरुषवादी मानसिकता को तोड़ न पाई। ऐसा ही किस्सा उन दिनों की एक फिल्मी मैगजीन में छपा था। बात 1955 की है जब फिल्म 'परिणीता' के लिए मीना कुमारी को फिल्म फेयर पुरस्कार मिलना था। मीना कुमारी और कमाल अमरोही एक साथ बैठे हुए थे जब मीना स्टेज पर गईं तो अपना पर्स कुर्सी पर ही भूल गईं और उसके बाद वो घर चली गईं।

बाद में हीरोइन निम्मी ने मीना कुमारी को उनका पर्स लाकर दिया। मीना कुमारी ने बाद में कमाल अमरोही से पूछा, 'क्या आपको मेरा पर्स नहीं दिखा?', तब कमाल ने जवाब दिया, 'दिखा पर उठाया नहीं, आज मैं तुम्हारा पर्स उठाता, कल तुम्हारे जूते।' कमाल अमरोही की ये बात सुनकर मीना सक्ते में रह गई।

इसी तरह के कई किस्से उन दिनों उन दोनों के रिश्तों के बारे में मीडिया में आया करते थे। एक दिन इस हसीन जोड़ी के टूटने की नौबत आ गई और मीना कुमारी कमाल अमरोही को छोड़ कर हमेशा के लिए उनके घर से चली गई।

साल 1960 में रिलीज हुई फिल्म मुगल-ए-आजम के लिए कमाल अमरोही को फिल्म फेयर का बेस्ट डायलॉग राइटर का अवार्ड मिला।

11 फरवरी साल 1993 में 75 साल की उम्र में इन्होंने दुनिया से अलविदा कह दिया और मुंबई के रहमताबाद कब्रिस्तान में मीना कुमारी की कब्र के बगल में उनको दफनाया गया। पांच दशकों से ज्यादा फिल्मों में काम करने ब्रिटेन के न्यूज़ पेपर द इंडिपेंडेंट ने एक आर्टिकल छापा  जिसमें उन्हें मुग़ल जैसा कहा गया।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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