अब पेपर लीक करने वालों की खैर नहीं, जानिए कैसे नकेल कसने की तैयारी में सरकार ?

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सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली परिक्षाओं के प्रश्न पत्र की लीक, आंसर- की लीक, किसी भी तरह की चीटिंग, गड़बड़ियों और अनियमितताओं से सख्ती से निपटने के लिए सरकार लोक परीक्षा (अनुचित साधन का निवारण) विधेयक 2024 लेकर आई है।

भविष्य की राह तलाश रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए सरकारी नौकरी किसी सपने से कम नहीं होती। महीनों की मेहनत के बाद मिलने वाला एक मौका उनकी जिंदगी बदल सकता है। लेकिन सालों तक जी-तोड़ मेहनत करने वाले युवाओं की परीक्षा का जब वक्त आता है तो पता चलता है कि पेपर लीक हो गया है और परीक्षा रद्द हो गई है । देश में शायद ही कोई राज्य बचा है, जहां कभी कोई पेपर लीक न हुआ हो। ऐसे में सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली परिक्षाओं के प्रश्न पत्र की लीक, आंसर- की लीक, किसी भी तरह की चीटिंग, गड़बड़ियों और अनियमितताओं से सख्ती से निपटने के लिए सरकार लोक परीक्षा (अनुचित साधन का निवारण) विधेयक 2024 लेकर आई है। यूपीएससी, एसएससी, रेलवे बोर्ड, बैंकिंग, नीट और इंजीनियरिंग समेत कई परीक्षाओं को इसके दायरे में लाया गया है।  खास बात ये है कि प्रस्तावित विधेयक में किसी भी तरह से छात्रों और उम्मीदवारों को निशाना नहीं बनाया जाएगा। बल्कि छात्रों को गलत तरीके से पेपर बेचने वाले सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आइए जानते हैं पेपर लीक की वजह से कितने लोगों का भविष्य भंवर में फंसा?

पिछले कई सालों से देश में पेपर लीक एक बड़ा मुद्दा बन गया है। तमाम परीक्षाएं बार-बार लीक होने से स्टूडेंट्स प्रदर्शन कर रहे हैं। साल 2023 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान मध्य प्रदेश से लेकर राजस्थान तक पेपर लीक बड़ा मुद्दा था। इस मुद्दे पर देश के अलग-अलग राज्यों में दर्जनों प्रदर्शन हुए। इसके अलावा विपक्ष भी लगातार समय-समय पर केंद्र सरकार को घेर रहा है। इस बीच पेपर लीक के खिलाफ मजबूत बिल लाकर सरकार स्टूडेंट्स के बीच एक मैसेज देने की कोशिश कर रही है कि वो उनके प्रति गंभीर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2017-2023 तक अलग-अलग राज्यों में पेपर लीक के 70 से ज्यादा मामले सामने आए और 1.5 करोड़ से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए। आइए समझते हैं किन राज्यों में परीक्षाओं के लीक होने से करोड़ों नौकरी चाहने वालों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।

पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ क्या कानून?

राज्य सरकारों ने पेपर लीक और नकल के दोषियों के खिलाफ सख्त कानून बनाए हैं। पेपर लीक रोकने के लिए झारखंड में नया कानून बनाया गया, इसका नाम है ’झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम 2023’। इस कानून के तहत अगर कोई प्रतियोगी पेपर लीक करते हुए पकड़ा जाता है तो उसे कम से कम 10 साल की सजा और अधिकतम आजीवन कारावास से लेकर 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। राजस्थान में कम से कम 10 साल और अधिकतम उम्रकैद की सजा का प्रावधान है। साथ ही कम से कम 10 लाख 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। अगर दोषी जुर्माना नहीं भरता है तो उसे दो साल से ज्यादा जेल की सजा काटनी पड़ती है। गुजरात में पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ 3 से 10 साल की सजा का प्रावधान है और 1 लाख से 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है। वहीं पेपर खरीदने वाले छात्रों को भी 2 से 10 साल तक की सजा हो सकती है। पेपर लीक के आरोपियों को जमानत नहीं मिलती है। उत्तराखंड में भी पेपर लीक और नकल के खिलाफ उम्रकैद का प्रावधान है और कम से कम 10 साल की जेल और 10 लाख से 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। हरियाणा में दोषियों को सात से दस साल की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इतना ही नहीं, उनकी प्रॉपर्टी की नीलामी करके नुकसान की भरपाई करने का भी प्रावधान है। नकल करते हुए पकड़े जाने पर छात्रों पर 5 हजार रुपये का जुर्माना और 2 साल की जेल हो सकती है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, बिहार और हरियाणा में भी ऐसे ही पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। इन राज्यों में लगातार पेपर लीक की घटनाएं न सिर्फ भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती हैं बल्कि एजुकेशन सिस्टम की खामियों को भी उजागर करती हैं।

नए बिल में खास क्या है?

इस एक्ट के तहत आने वाले सभी अपराध गैर-जमानती और गंभीर श्रेणी में माने जाएंगे। विधेयक के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले दोषियों को कम से कम 3 साल की सजा होगी, जिसे 5 साल तक बढ़ाया जा सकता है और 10 लाख तक की पेनल्टी लगाई जा सकती है। अगर कोई संस्थान पेपर लीक और नकल में शामिल पाया जाता है, तो एग्जाम का पूरा खर्च उससे वसूला जाएगा और उसकी संपत्ति भी जब्त की जा सकती है। परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर सर्विस प्रोवाइडर के खिलाफ भी एक्शन हो सकता है। विधेयक में प्रावधान है कि सर्विस प्रोवाइडर पर एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। उस पर चार साल तक किसी भी पब्लिक एग्जाम को कराने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

दोषियों के खिलाफ केंद्र सरकार सख्त

प्रस्तावित विधेयक में संगठित अपराध, माफिया और पेपर लीक में मिलीभगत में शामिल पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। विधेयक में परीक्षाओं में अनियमितताओं से संबंधित अपराध के लिए अधिकतम 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। अगर सर्विस प्रोवाइडर फर्म के डायरेक्टर, सीनियर मैनेजमेंट और सीनियर अधिकारी दोषी साबित होते हैं, तो उन्हें 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना और कम से कम तीन साल की सजा तो तय है, जिसे दस साल तक बढ़ाया भी जा सकता है।

कौन करेगा मामले की जांच?

विधेयक में एक उच्च स्तरीय तकनीकी समिति गठित का भी प्रस्ताव है, जो कंप्यूटर के जरिए परीक्षा प्रक्रिया को और ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए सिफारिशें करेगी। ये एक केंद्रीय कानून होगा और इसमें संयुक्त प्रवेश परीक्षाएं और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में एडमिशन के लिए होने वाली परीक्षाएं भी आएंगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की ओर से आयोजित परीक्षाएं भी इस विधेयक के दायरे में होंगी। पेपर लीक और नकल के मामलों की जांच पुलिस उपाधीक्षक, सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारी करेंगे। सरकार के पास केंद्रीय एजेंसी को जांच सौंपने का अधिकार होगा। इस तरह सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे लाखों योग्य छात्रों की मेहनत बर्बाद नहीं होगी और उनका भविष्य सुरक्षित रहेगा। 

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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