लोकसभा चुनाव के लिए मोहन भागवत और RSS का रुख़ बदल रहा है?

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RSS और मोहन भगवत की महिला आरक्षण के प्रति बदलती दिशा | Manchh न्यूज़

महिला आरक्षण बिल (Women Reservation Bill) दोनों सदनों में पास होने के बाद मोदी सरकार इसका जमकर जश्न मना रही है। देश में हर तरफ महिला आरक्षण की चर्चा हो रही है। वहीं, कांग्रेस (Congress) समेत विपक्षी दल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर लगातार महिला विरोधी होने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में संघ अब अपनी पुरानी छवि से बाहर निकलने की तैयारी में है। संघ की शाखाओं में अब महिलाएं भी नजर आ सकती हैं।  

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 27 सितंबर 1925 में हुई थी। 2025 में संघ 100 साल का हो रहा है,करीब 98 साल बीत जाने के बाद अब RSS में महिलाओं की एंट्री हो सकती है। दरअसल, लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) में बीजेपी ने प्रदेश की सभी 80 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले देश के सबसे बड़े सूबे यूपी में आरएसएस ने मोर्चा संभाल लिया है। आरएसएस का फोकस अब गांव-गांव तक दलितों-पिछड़ों और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर है। ऐसे में बीजेपी और संघ पदाधिकारी यूपी में अपनी जमीन मजबूत करने के लिए मैराथन मंथन करने में जुटे हैं। आरएसएस से जुड़ने के लिए हर साल 1.20 लाख लोगों की रिक्वेस्ट आती है। इनमें ज्यादातर की उम्र 20 से 35 साल के बीच होती है।लोकसभा चुनाव में टिकट देने की बात आती है तो यहां अभी 78 महिला सांसद हैं, जो 14 प्रतिशत होता है। राज्यसभा में 29 महिला सांसद हैं और ये 12 पर्सेंट है। अगर महिला आरक्षण बिल पास होता है तो अगले साल चुनाव के बाद लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या करीब 180 हो जाएगी। वहीं, राज्यसभा में ये संख्या 81-82 हो सकती है। 2019 से पहले 2014 में महिला सांसदों की संख्या 62, साल 2009 में 59, साल 2004 में 45 और साल 1999 में 49 थी।

संघ महिला विरोधी होने की तोड़ेगा छवि 

सूत्रों का कहना है कि सहयोगी संगठनों के साथ हुई बैठक में ये निर्णय लिया गया है कि संघ अब अपनी महिला विरोधी होने की छवि तोड़ेगा। दरअसल, संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार की अगुवाई में एक बैठक हुई, जिसमें तय किया गया कि संघ अब यूपी के हर जिले में महिला सम्मेलन करेगा। इसमें बीजेपी, विश्व हिंदू परिषद और हिंदू जागरण मंच के साथ बाकी संगठन भी मदद करेंगे। अभी तक संघ की व्यवस्था में महिलाओं का सीधा इन्टफिअरन्स नहीं है। उनके लिए केवल राष्ट्र सेविका समिति के दरवाजे ही खुले हैं। संघ से जुड़े लोगों का दावा है कि अब सहयोगी संगठनों में भी प्रमुख पदों पर महिलाओं को जिम्मेदारी दी जाएगी।

कांग्रेस समेत विपक्षी दल का गंभीर आरोप

कांग्रेस समेत विपक्षी दल आरएसएस पर लगातार महिलाओं के लिए रूढ़िवादी और पारंपरिक सोच रखने का आरोप लगाते रहते हैं। यह सवाल भी उठता है कि संघ पुरुष प्रधान है। संगठन से औरतें गायब हैं। मतलब संघ में महिलाओं के लिए पद क्यों नहीं है? अंशकालिक या पूर्णकालिक प्रचारक, कार्यकर्ता या संघ के दूसरे विभाग में महिलाएं क्यों नहीं? यह सवाल अक्सर उठते रहते हैं। ऐसे में संभव है कि आने वाले दिनों में संघ की शाखाओं में महिलाएं भी नजर आएंगी। संघ के प्रमुख पदों और विश्व हिंदू परिषद, किसान संघ, शिक्षक संघ, हिंदू जागरण मंच, विद्या भारती और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रमुख पदों पर भी महिलाओं को नियुक्त किया जा सकता है। इसके लिए संघ ने अपने सभी सहयोगी संगठनों से भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को कहा है।

दरअसल, साल के आखिर में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान सहित छह राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों के चुनाव को 2024 का सेमीफाइल माना जा रहा है, क्योंकि इसके बाद ही अगले साल लोकसभा चुनाव है। संघ निश्चित तौर पर चाहेगा कि जब 2025 में उसके गठन के 100 साल पूरे हो रहे हैं तो उसकी विचारधारा वाली पार्टी देश की सत्ता पर काबिज रहे।

पिछले 12 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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