Music Director Bappi Lahiri : नाम, शोहरत और पैसा सब मिला पर एक ख्वाहिश रह गई अधूरी

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म्यूजिक डायरेक्टर बप्पी लाहिड़ी (Music Director Bappi Lahiri) ने हर दौर के युवाओं की नब्ज पकड़ी। फटाफट धुनें बनाई। दूसरे म्यूजिक डायरेक्टर की तुलना में पैसे कम लेते इसलिए इन्हें ‘गरीब फिल्म प्रोड्यूसर का आरडी बर्मन’ कहा गया।

 

हर दौर की पीढ़ी झूम कर नाची

हर दौर के युवाओं की नब्ज पकड़ी। फटाफट धुनें बनाई। इनकी प्रतिभा और व्यवहार का हर कोई कायल था। दूसरे म्यूजिक डायरेक्टर की तुलना में पैसे कम लेते, कभी-कभी इस शर्त में भी काम करते की ‘फिल्म हिट हो जाए तब फीस दे देना और पैसे न भी हो तो मत देना।’ इसलिए इन्हें ‘गरीब फिल्म प्रोड्यूसर का आरडी बर्मन’ कहा गया। इन्हें प्यार से ‘बप्पी दा’ भी कहते। ये ‘गोल्ड मैन’ और 'डिस्को किंग' नाम से भी जाने जाते। इनकी धुनों पर हर दौर की पीढ़ी झूम कर नाची। आज कहानी बप्पी लाहिड़ी की जिन्हें नाम, शोहरत सब मिला पर, एक ख्वाहिश अधूरी रह गई।

आलोकेश लाहिड़ी से बप्पी लाहिड़ी

बात 1949-50 के आसपास की है। पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में एक बंगाली ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखने वाले अपरेश लाहिड़ी कोलकाता ऑल इंडिया रेडियो के एक प्रोग्राम में गए जहां उनकी मुलाकात बांसुरी लाहिड़ी से हुई। दोनों सिंगर थे। क्लासिकल और श्यामा म्यूजिक के विद्वान। ये मुलाकात प्यार में बदली और जल्द ही दोनों ने शादी की। 27 नवंबर साल 1952 को इनके एक बेटा हुआ। नाम रखा आलोकेश लाहिड़ी यानी बप्पी लाहिड़ी।

तीन साल की उम्र से बजाते थे तबला

अपरेश और बांसुरी लाहिड़ी फिल्मों में म्यूजिक देते। घर में म्यूजिक से जुड़े तमाम लोगों का आना जाना रहता। ऐसे माहौल में बड़े हुए अपने माता-पिता की इकलौती संतान बप्पी लाहिड़ी का रुझान भी म्यूजिक की तरफ गया। माता-पिता पहले गुरु बने। बाद में लता मंगेशकर ने जब तीन साल की उम्र में छोटे से बप्पी दा को तबला बजाते देखा तो महान तबला वादक समता प्रसाद मिश्रा से तबला सीखने की सलाह दी।

शुरुआती दौर में किशोर मामा का साथ मिला

वक्त गुजरा, 19-20 साल की उम्र में बप्पी दा ने साल 1972 की बंगाली फिल्म ‘दादू’ से बतौर म्यूजिक डायरेक्टर अपना करियर शुरू किया। फिर कोलकाता से मुंबई आ गए। साल 1973 में पहली बार हिन्दी फिल्म ‘नन्हा शिकारी’ में म्यूजिक दिया। पर फिल्म पिट गई।बप्पी दा, किशोर कुमार को मामा बुलाते। क्योंकि वो उनकी मां के राखी भाई थे। करियर के शुरुआती दौर में मामा का साथ मिला।

जब पूरी दुनिया ने उनके म्यूजिक की गूंज सुनी

साल 1974 की फिल्म ‘बढ़ती का नाम दाढ़ी’ में बप्पी लाहिड़ी ने बतौर एक्टर काम किया। इस फिल्म को डायरेक्ट किशोर कुमार ने किया था। फिर बप्पी लाहिड़ी को मौका मिला साल 1975 की फिल्म ‘जख्मी’ में म्यूजिक देने का। इन्होंने बतौर सिंगर भी शुरुआत की। गाने में उनका साथ मोहम्मद रफी और किशोर कुमार ने दिया। फिल्म चली तो बप्पी दा का करियर भी चल पड़ा। साल 1976 की ‘चलते-चलते’ और 1979 की ‘सुरक्षा’ के गाने हिट हुए तो बप्पी दा ने बेहद कम वक्त में बड़ी सफलता हासिल की। लेकिन एक वक्त वो आया जब पूरी दुनिया ने उनके म्यूजिक की गूंज सुनी।

डिस्को बीट पर सजे गानों का जादू सिर चढ़ा

साल था 1982 और फिल्म ‘डिस्को डांसर’ थी। फिल्म के हर एक गाने ने धूम मचा दी। डिस्को बीट पर सजे गानों का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोला। साल 1981 की फिल्म ‘ज्योति’ का गाना 'कलियों का चमन' अमेरिकन टॉप-40 का हिस्सा बना। साल 1986 में एक साल में रिलीज हुई 33 फिल्मों के लिए 180 से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए तो बप्पी दा का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। 50 साल के करियर में करीब 500 से ज्यादा फिल्मों के लिए 5000 गाने कंपोज किए। 50 से ज्यादा गानों को अपनी आवाज देकर अमर कर दिया।

गोल्ड को मानते थे लकी

डांस और क्रिकेट खेलने के शौकीन बप्पी दा के पहनावे में चमक और रंग बहुत गहरे होते थे। गोल्ड पहनने के शौकीन थे उन्हें ‘गोल्ड मैन’ कहा जाता। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि मैं हॉलीवुड सिंगर एल्विस प्रेस्ली से प्रभावित था। वो हमेशा एक सोने की चेन गले में पहनते। मुझे ये अंदाज पसंद आया तो मैंने भी सोचा कि जब मैं बड़ा म्यूजिक डायरेक्टर बनूंगा तो मैं भी गोल्ड पहनूंगा। मैं गोल्ड को अपने लिए लकी मानता हूं। मेरे गाने तब और हिट हुए जब मैंने गोल्ड पहनना शुरू किया।’

चुनाव लड़ा पर हार मिली

साल 2014 में बप्पी दा ने श्रीरामपुर लोकसभा सीट से बीजेपी की टिकट पर चुनाव भी लड़ा और हार मिली। साल 1977 में बप्पी लाहिड़ी ने चित्राणी लाहिड़ी से शादी की थी। दो बच्चे हुए - एक बेटी रीमा लाहिड़ी जो सिंगर हैं। रीमा ने बिजनेस मैन और सिंगर गोविंद बंसल से शादी की। बप्पी लाहिड़ी के बेटे बप्पा लाहिड़ी भी म्यूजिक डायरेक्टर हैं। उन्होंने तनीषा लाहिड़ी से शादी की।

कई अवार्ड से किए गए सम्मानित

बप्पी दा स्वयंसेवी संगठन 'जस्टिस फॉर विडोज' के जरिए सामाजिक काम करते। इस वजह से उन्हें 'हाउस ऑफ लॉर्ड्स' से नवाजा गया। दो बार फिल्मफेयर – पहला – साल 1985 की फिल्म  शराबी के लिए बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टरऔर दूसरा  साल 2018 में लाइफ टाइम अचीवमेंट दिया गया। साल 2017 में बंगा भूषण से सम्मानित बप्पी दा उम्र के आखिरी पड़ाव पर ब्रीदिंग डिसऑर्डर से जुझे। कोरोना हो गया तो तबीयत और बिगड़ी। अस्पताल में इलाज के दौरान 15 फरवरी साल 2022 को म्यूजिक की दुनिया का ये सितारा 69 साल की उम्र में अलविदा कह गया।

एक ख्वाहिश जो अधूरी रह गई

बप्पी दा को पूरी दुनिया में खूब शोहरत मिली ‘किग ऑफ पॉप’ माइकल जैक्सन भी बप्पी दा के दीवाने थे। पर बप्पी दा को एक कसक रह गई। दुनिया का सबसे बड़ा सम्मान ग्रैमी अवार्ड जीतने की। जिसको लेकर उन्होंने कई बार कहा भी था। लेकिन उनके लिए सम्मान ये कि आज कोई पार्टी हो या फंक्शन हो बप्पी दा के गाने डीजे पर न बजे, ऐसा हो ही नहीं सकता। इनके गाने डांस फ्लोर पर लोगों को थिरकने को मजबूर कर ही देते हैं।

 

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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