Music Director Raam Laxman : दोस्त की याद लिए उम्र भर बनाते रहे संगीत

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लक्ष्मण ने राम के साथ मिलकर एक म्यूजिक डायरेक्टर की जोड़ी बनाई। जोड़ी को नाम दिया - ‘राम – लक्ष्मण’ । अभी एक-दो फिल्मों के लिए इस जोड़ी ने म्यूजिक दिया ही होगा कि राम का निधन हो गया और लक्ष्मण रह गए अकेले। लेकिन रामायण के लक्ष्मण की तरह ही इस लक्ष्मण ने भी राम का साथ कभी नहीं छोडा। आज कहानी विजय पाटिल की। जिन्होंने नाम अपना नाम बदलकर हमेशा के लिए राम-लक्ष्मण रख लिया और 50 साल के करियर में ‘मैंने प्यार किया’ और ‘हम आपके हैं कौन’ जैसी करीब 75 फिल्मों के गानों को अपने म्यूजिक से सजाया।

16 सितंबर साल 1942 को महाराष्ट्र के नागपुर में विजय पाटिल का जन्म हुआ। बचपन में म्यूजिक का शौक था तो संगीत की शुरुआती शिक्षा अपने पिता और चाचा से ली। बाद में भातखंडे संगीत एकेडमी में एडमिशन ले कर पढ़ाई की। और यही पर इनके एक दोस्त बने सुरेंद्र राम कदम। सुरेंद्र राम कदम ने अपना नाम राम रखा तो विजय पाटिल ने भी अपना नाम बदलकर लक्ष्मण रखा। इस तरह से म्यूजिक डायरेक्टर जोड़ी बनी राम – लक्ष्मण। दोनों काम की तलाश में उस दौर के फेमस मराठी एक्टर और कॉमेडियन दादा कोंडके से मिले।

दादा कोंडके इनके काम से प्रभावित हुए और साल 1975 में रिलीज हुई मराठी फिल्म ‘पांडू हवलदार’ में काम दे दिया। फिल्म हिट रही तो बॉलीवुड में जाना आसान हो गया। साल 1977 में रिलीज हुई डायरेक्टर दीपक बिहारी की फिल्म 'एजेंट विनोद' ऑफर हुई। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सुरेंद्र यानी राम का अचानक निधन हो गया। दोस्ती के प्रतीक के रूप में, विजय पाटिल ने राम के नाम को हटाया नहीं बल्कि हमेशा के लिए अपने नाम के साथ जोड़ लिया। अब विजय पाटिल राम-लक्ष्मण के नाम से फिल्मों में म्यूजिक देने लगे। चाहे हिंदी सिनेमा रहा हो या फिर मराठी सिनेमा। विजय पाटिल ने अपना खुद का एक आर्केस्ट्रा ग्रुप भी शुरू किया था। जिसका नाम रखा था अमर विजय। अमर उनके बेटे का नाम था।

ये वो दौर था जब रामलक्ष्मण यानी विजय पाटिल फिल्म डायरेक्टर मनमोहन देसाई, महेश भट्ट, जीपी सिप्पी, अनिल गांगुली के साथ काम कर रहे थे।

साल 1981 में डायरेक्टर रवींद्र रावल की फिल्म 'हमसे बढ़कर कौन' के लिए म्यूजिक दिया। इस फिल्म का गाना - "देवा ओ देवा गणपति देवा," जो आज भी हिट है। साल 1983 की 'वो जो हसीना', साल 1987 की 'दीवाना तेरे नाम का', और साल 1988 की 'आगे की सोच' जैसी फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया।

लेकिन अभी उनके उम्दा काम का नमूना आना बाकी थी। साल था 1988, राजश्री प्रोडक्शन की बनी एक फिल्म रिलीज हुई जिसके डायरेक्शन की बागडोर एक नौजवान डायरेक्टर के हाथों में थी जो आगे चल कर खुद इंडियन सिनेमा के ग्रेट डायरेक्टर में शुमार हुए नाम था सूरज बड़जात्या। और वो फिल्म थी ‘मैंने प्यार किया’। इस फिल्म में संगीत देने की जिम्मेदारी राम लक्ष्मण को दी गई।

इस फिल्म के लिए राम लक्ष्मण को फिल्म फेयर का बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का अवार्ड मिला। इस फिल्म के बाद ही सिंगर एसपी बालासुब्रमण्यम एक्टर सलमान खान की आवाज बने। इसके बाद साल 1994 में राजश्री प्रोडक्शन की एक और फिल्म ‘हम आपके है कौन’ के लिए राम लक्ष्मण ने संगीत दिया। और इस फिल्म के म्यूजिक ने भी कमाल कर दिया। ये दोनों फिल्में ही राम लक्ष्मण के करियर में मिल का पत्थर साबित हुई। इसके बाद साल 1999 में रिलीज हुई ‘हम साथ – साथ है’ भी आई। जिसमें राम लक्ष्मण के म्यूजिक से सजे गाने ने धूम मचा दी।

साल 2016 तक फिल्मों में अपना योगदान देने वाले राम लक्ष्मण का 22 मई साल 2021 में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वो म्यूजिक के जरिये लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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