यूपी, आंध्र और अब महाराष्ट्र अपना कुनबा बढ़ाने में जुटी NDA

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लोकसभा चुनाव 2024 को देखते हुए बीजेपी पूरी तैयारी में जुटी हुई है तो विपक्षी खेमा INDIA ब्लॉक लगातार बिखरता दिख रहा है। अब UP में RLD, आंध्र प्रदेश में TDP और महाराष्ट्र में MNS भी बीजेपी में जाने की तैयारी में दिख रही है।

आम चुनाव करीब हैं। ऐसे में जहां बीजेपी 400 प्लस सीटों का दावा कर रही है तो विपक्षी खेमा इंडिया ब्लॉक लगातार बिखरता दिख रहा है। एक के बाद एक राजनीतकि दल एनडीए का हिस्सा बन रहे हैं। पहले बिहार में नीतीश कुमार ने साथ छोड़ा। फिर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने किनारा किया। उसके बाद अरविंद केजरीवाल भी पंजाब में सीट शेयरिंग पर आंखें दिखा रहे हैं। तो वहीं अब यूपी में राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख जयंत चौधरी, आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी, महाराष्ट्र में एमएनएस और पंजाब के शिरोमणि अकाली दल के भी एनडीए का हिस्सा बनने की उम्मीद जताई जा रही है। अगर ये संभव होता है तो इसे बीजेपी की बड़ी रणनीतिक जीत माना जाएगा। अब सवाल ये उठ रहा है कि आखिर वो क्या वजह है कि सियासी दल इंडिया ब्लॉक से टूटकर एनडीए का कुनबा और बढ़ाते जा रहे हैं ?

2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने के टारगेट के साथ 28 दलों के नेताओं ने इंडिया नाम से विपक्षी गठबंधन बनाया था, लेकिन आज एक-एक कर सिसासी दल इंडिया गठबंधन से टूटते जा रहे और एनडीए में जुड़ते जा रहे हैं। यही वजह है कि जुलाई 2023 तक एनडीए में कुल 23 पार्टियां शामिल थी। लेकिन धीरे-धीरे NDA का कुनबा बढ़ता जा रहा और आज NDA में सियासी दलों की संख्या 39 हो गई है। इतना ही नहीं NDA में शामिल होने के लिए कई सियासी दलों से बातचीत भी चल रही है। इस लिस्ट में RLD के बीजेपी से अलायंस करने पर चर्चा चल रही है। दरअसल, पश्चिमी यूपी को जाट और मुस्लिम बाहुल्य इलाका माना जाता है। यहां लोकसभा की कुल 27 सीटें हैं और 2019 के चुनाव में बीजेपी ने 19 सीटों पर जीत हासिल की थी। जबकि 8 सीटों पर महागठबंधन ने कब्जा किया था। इनमें 4 सपा और 4 बसपा के खाते में आई थी। जयंत चौधरी की पार्टी RLD ने सपा-बसपा के साथ गठबंधन में तीन सीटों पर चुनाव लड़ा था। 2019 के लोकसभा चुनाव में जयंत चौधरी अपने पुश्तैनी क्षेत्र बागपत से चुनाव लड़े और बीजेपी के डॉ. सतपाल मलिक से 23 हजार वोटों से हार गए थे। मथुरा से RLD के कुंवर नरेंद्र सिंह को हेमा मालिनी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इसी तरह जाटों के लिए बेहद सुरक्षित मानी जाने वाली मुजफ्फरनगर सीट से अजित सिंह पहली बार चुनाव लड़े थे और बीजेपी के संजीव बालियान से 6500 से ज्यादा वोटों से हार गए थे। अजित और जयंत चौधरी को सपा-बसपा के अलावा कांग्रेस का भी समर्थन मिला था। यही नहीं, 2014 के चुनाव में भी जयंत को निराशा हाथ लगी थी और एक भी सीट नहीं मिली थी।

बिहार में NDA अब मजबूत स्थिति में 

वहीं बिहार की बात करें तो यहां सियासी पाला बदलकर सीएम नीतीश कुमार एक बार फिर से NDA का हिस्सा बन चुके हैं। फिलहाल, बिहार में NDA अब मजबूत स्थिति में आ गई है। उसे उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RLSP, चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) और जीतनराम मांझी के दल HAM का साथ है। वहीं, बिहार में राजद और कांग्रेस का गठबंधन रह गया है। ऐसे में JDU और NDA के बीच हुई ये डील इंडिया गठबंधन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इसकी बड़ी वजह है कि नीतीश कुमार के NDA में आने से नॉन यादव ओबीसी, अपर कास्ट, अति पिछड़े, पासवान, मुसहर और अन्य दलित समुदाय का समर्थन हासिल किया जा सकेगा। नीतीश के बाहर निकलने से इंडिया गठबंधन के पास अब मुस्लिम, यादव वोट ही रह जाएंगे। इस नए राजनीतिक फेरबदल से RJD के वोट बैंक मुस्लिमों और यादवों पर कोई असर नहीं होगा क्योंकि ये बिहार का एक तिहाई वोट बैंक है। वहीं लोकसभा चुनाव में बीजेपी के दिमाग में 400 पार की रणनीति दौड़ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार बीजेपी JDU से ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। 2019 लोकसभा चुनाव में NDA को 40 में से 39 सीटें मिली थीं। एक सीट कांग्रेस ने जीती थी। बीजेपी के एक नेता ने कहा कि इस बार पार्टी 20 सीटों पर ख़ुद लड़ेगी और 14-15 सीटें JDU को दी जा सकती हैं। 

महाराष्ट्र में NDA में आने की कवायद में जुटी MNS ?

अब महाराष्ट्र को देखा जाए तो वहां भी बीजेपी अपनी मजबूत जीत की दिशा में कदम आगे बढ़ा रही है। पहले शिवसेना में टूट की और एकनाथ शिंदे खेमे को NDA में शामिल किया और राज्य में सरकार बनाई। उसके बाद NCP खेमे से अजित पवार भी 30 से ज्यादा विधायकों के साथ NDA में आ गए। महाराष्ट्र में शिवसेना और NCP में टूट होने से बीजेपी को सीधा फायदा मिला है और उद्धव ठाकरे और शरद पवार अलग-थलग पड़ गए हैं। अब एक और बड़ी खबर ये है कि राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना भी NDA के साथ आ सकती है। पिछले दिनों MNS के नेताओं ने बीजेपी नेता और डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की है। सूत्रों के मुताबिक, MNS नेताओं ने आम चुनाव को लेकर फडणवीस से चर्चा की है। अगर बीजेपी और MNS के बीच अलायंस होता है तो सबसे ज्यादा फायदा MNS को होगा। क्योंकि महाराष्ट्र में MNS कुछ सीटों तक ही सीमित है और संगठन भी कमजोर है। 

महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल

महाराष्ट्र में एक और बड़ी हलचल है। कहा जा रहा है कि उद्धव ठाकरे को लगातार झटके लगने के बाद वो भी NDA के साथ आने का मन बना रहे हैं। उद्धव खेमा भी नहीं चाहता है कि इंडिया ब्लॉक के साथ लोकसभा चुनाव लड़ा जाए। 2019 में उसे बीजेपी के साथ चुनाव लड़ने से खासा फायदा हुआ था और 18 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं, इंडिया ब्लॉक के नेता उद्धव खेमे को इतनी सीटें देने के लिए तैयार नहीं हैं। 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद उद्धव ने NDA का साथ छोड़ दिया था और महाविकास अघाड़ी के साथ मिलकर राज्य में सरकार बना ली थी। महाराष्ट्र में कुल 48 सीटें हैं और 2019 के चुनाव में NDA ने 41 सीटों पर कब्जा किया था। UPA को 5 सीटें मिली थीं। बीजेपी ने 23, शिवसेना ने 18, NCP ने चार सीटें जीती थीं।  

TDP-BJP का गठबंधन!

लोकसभा चुनाव से पहले आंध्र प्रदेश में TDP भी NDA का हिस्सा बन सकती है। TDP के एक बार फिर NDA के आने की चर्चाएं तेज हैं। बीजेपी हाईकमान ने पूर्व सीएम और TDP प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू को NDA में लाने की जिम्मेदारी जन सेना प्रमुख पवन कल्याण को सौंपी थी। जनसेना पहले से ही NDA का हिस्सा है और TDP ये साफ कर चुकी है कि वो आगामी आम चुनाव जन सेना के साथ लड़ेगी। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि बीजेपी ने विपक्षी दलों और उनके दिग्गज नेताओं को बीजेपी में लाने के लिए अलग से जॉइनिंग कमेटी तक गठित कर रखी है। ये कमेटी उन विपक्षी नेताओं को अपने पाले में लाएगी, जो अपने दल या नेताओं से नाराज चल रहे हैं। बीजेपी खुद के नफा-नुकसान से ज्यादा विपक्षी खेमे में सेंधमारी पर फोकस कर रही है। यही वजह है कि विपक्ष में इंडिया गठबंधन में बिखराव के चलते ही पीएम मोदी लगातार लोकसभा चुनाव में बीजेपी के 370 सीटें जीतने और NDA को 400 से ज्यादा सीटें मिलने का दावा कर रहे हैं।

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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