NEET Results 2024 Case पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, NTA का पेपर लीक होने से इनकार

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देश में इंजीनिरिंग की पढ़ाई के लिए सबसे बड़ा एग्ज़ाम आईआईटी जेईई होता है, ठीक वैसे ही मेडिकल की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स के लिए सबसे बड़ा एग्ज़ाम नीट होता है. इस मेडिकल इंट्रेन्स एग्जाम के सेंटर भारत के अलावा दूसरे देशों में भी बनाए जाते हैं. नीट एग्ज़ाम को लेकर जिस तरह पूरे देश में हंगामा मचा है उसे देखकर ये सवाल उठने लगा है कि क्‍या नीट यूजी परीक्षा के नतीजे रद्द किए जाएंगे और नीट यूजी की परीक्षा एक बार फिर से कराई जाएगी. 5 मई को लगभग 24 लाख स्टूडेंट्स ने नीट का एग्ज़ाम दिया था. हालांकि, जब मई में नीट यूजी के पेपर हो रहे थे, उस दौरान भी कई जगहों पर पेपर लीक की सूचनाएं आईं थीं. तब भी तमाम अभ्‍यर्थियों ने इसको कैंसिल करने और दोबारा पेपर कराने की मांग की थी लेकिन उस समय इस पर कुछ नहीं हुआ. लेकिन अब जब 4 जून को रिजल्‍ट आया, तो एक बार फिर ये मामला इस कदर गर्म हो गया है. कि नीट यूजी 2024 एग्ज़ाम का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है. एसपरेंट्स के एक ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर नये सिरे से NEET-UG, 2024 एग्ज़ाम कराने की मांग की है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि 5 मई को आयोजित नीट-यूजी एग्ज़ाम में गड़बड़ी की गई थी.


NEET UG एग्ज़ाम कराने वाली संस्था है, NTA यानी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी. जिसकी दलील है कि इस साल प्रश्न पत्र आसान दे दिया गया था और ज्यादा परीक्षार्थियों के एग्ज़ाम में एप्पियर होने के चलते इस तरह के बड़े रिजल्ट आए, जिसमें बहुत सारे लोग टॉप कर गए हैं, ऐसा देखने को मिला है.


सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यही है कि इस साल 67 छात्रों ने एक साथ टॉप किया है. इन छात्रों को 720 में से 720 अंक मिले हैं. क्योंकि आज तक कभी भी एक साथ इतनी संख्या में स्टूडेंट टॉपर नहीं हुए हैं. साल 2021 में तीन स्टूडेंट टॉप पर कर पाए थे. आम तौर पर एक या दो स्टूडेंट ही टॉप कर पाते हैं. लेकिन इस बार 67 स्टूडेंट्स ने एक साथ टॉप किया है.


इसके अलावा इस बार फिजिक्स के एक पेपर में इतनी बड़ी चूक हो गई कि एक ही सवाल के दो-दो सही जवाब दे दिए गए और दोनों तरह के जवाबों को एनटीए ने सही माना और इस वजह से एक सवाल के दो सही जवाब होने के चलते 44 टॉपर बढ़ गए. दरअसल, NCERT की नई किताब के मुताबिक जो जवाब स्टूडेंट्स ने दिया वो गलत था. लेकिन पिछले साल की NCERT की किताब के एडिशन में उसी जवाब को सही कहा गया था. हालांकि, आंसर की में उस सवाल जवाब को चुनौती दी गई. करीब दस हजार स्टूडेंट्स ने ये चुनौती दी थी. NTA इस चुनौती के आगे झुक गया और उसने उन स्टूडेंट्स को भी पूरे नंबर दिए जिन्होंने ऑप्शन-चार चुना था, जिसमें कहा गया था कि दोनों ही कथन सही है.


इस एक्जाम में मल्टीपल च्वाइस ऑन्सर, एमसीक्यू (MCQs) होते हैं, लेकिन क्या इसी एक वजह से इतने टॉपर हो गए. ऐसा आज तक पहले कभी नहीं हुआ था. किसी भी एग्ज़ाम में अपने देश में आज तक ये नहीं हुआ. एनटीए अब इस पर जवाब नहीं दे पा रही है.
एनटीए के रवैये पर एक सवाल और खड़ा हो गया है. हरियाणा के झज्जर में एक ही एग्ज़ाम सेंटर से आठ-आठ टॉपर निकल आए हैं. ये खबर सामने आने के बाद हरियाणा के जिंद में एडिशनल पुलिस कमिश्नर के पास कुछ पैरेंट्स ने शिकायत दर्ज कराई है और जांच की अपील की है. उनका कहना है कि हैरानी की बात है कि जिस केंद्र से आठ टॉपर आए हैं उसी केंद्र के छात्रों को ग्रेस मार्क्स भी दिया गया है. NTA को अधिकार ही नहीं है, ग्रेस मार्क्स देने का. इसके लिए कमेटी तक नहीं बनाई गई. ये क्राइटेरिया तय नहीं किया गया कि ग्रेस मार्क्स कितने देने हैं, किसको देने हैं और किस हद तक देने हैं? इस पर एडीशनल कमिश्नर का कहना है कि शिकायतें गंभीर हैं.


कई स्टूडेंट्स का ये भी कहना है कि उनके नंबर इतने कम नहीं आ सकते हैं, इस मामले की पूरी जांच बेहद जरूरी है. स्टूडेंट्स इस बात से दुखी हैं कि उन्हें ये समझ ही नहीं आ रहा है कि आगे अब क्या होने वाला है. पीड़ित छात्र अजीब सी मार्किंग सिस्टम की वजह से आज असमंजस में हैं.


एनटीए के एक अधिकारी ने कहा कि साल 2023 के एग्जाम में शामिल होने वाले कैंडिडेट की संख्या 20,38,596 थी. जबकि इस साल 2024 में कैंडिडेट की संख्या 23,33,297 हो गई. कैंडिडेटों की संख्या में बढ़ोत्तरी के चलते कुछ अंक प्राप्त करने वालों की संख्या में भी वृद्धि हुई है.


ऐसा नहीं है कि मेडिकल एग्ज़ाम पर पहली बार सवाल उठे हैं. साल 2015 में जब NEET का गठन नहीं हुआ था, तब एमबीबीएस, बीडीएस एडमिशन के लिए नेशनल लेवल मेडिकल प्रवेश परीक्षा AIPMT ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट हुआ करती थी. तब ये परीक्षा सीबीएसई कराता था. उस समय भी पेपर लीक की खबरें आईं थीं. आरोप था कि एग्‍जाम सेंटर्स पर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस पर स्टूडेंट्स को क्वेश्चन पेपर के आंसर भेजे गए हैं. उस समय भी ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. तब 3 मई को परीक्षा हुई थी और 5 जून को रिजल्‍ट आना था. कोर्ट ने 15 जून को दिए अपने फैसले में कहा कि मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम कैंसिल किया जाएं और परीक्षा 4 हफ्ते में दोबारा से ली जाए. तब सरकार की तरफ से कोर्ट में ये दलील दी गई कि 44 छात्र धांधली में शामिल थे और ऐसे में 6.3 लाख छात्रों से दोबारा एग्ज़ाम नहीं दिलवाए जा सकते. इस पर तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर एक भी छात्र गैरकानूनी तरीके से फायदा पहुंचता है तो पूरी एक्जाम प्रक्रिया बिगड़ जाती है. अब इस बार कोर्ट का क्‍या फैसला होता है, यह तो देखने वाली बात है, लेकिन इस बार परीक्षा कैंसिल जैसी कोई बात नजर नहीं आ रही.


इसी तरह की हरकतों को रोकने के लिए बाद में NTA का गठन हुआ था, लेकिन अब 2024 के नतीजों ने वैसे ही सवाल फिर खड़े कर दिए हैं और खासकर NTA के कंडक्ट पर भी सवाल उठ रहे हैं. क्या इन नतीजों और रैंकिंग को छात्र सही मानें, जो इस बार आए हैं, या फिर एग्ज़ाम फिर से कराए जाएं? क्या होगा ये तो आने वाले सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट के रुख से पता चलेगा, लेकिन NEET की इस विवादित एग्ज़ाम पर अब सियासतदां भी कूद गए हैं.


कांग्रेस की नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट किया है - ''पहले NEET एग्ज़ाम का पेपर लीक हुआ और अब छात्रों का आरोप है कि इसके रिजल्ट में भी स्केम हुआ है. एक ही सेंटर के छह छात्रों को 720 में से 720 अंक मिलने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और कई तरह की अनियमितताओं की बातें भी सामने आई हैं. दूसरी ओर रिजल्ट आने के बाद देश भर में कई बच्चों के आत्महत्या करने की खबरें भी हैं. यह बहुत दुखद है और झकझोरने वाला है. सरकार लाखों छात्रों की आवाज को अनसुना क्यों कर रही है. छात्र-छात्राओं को NEET एग्ज़ाम के परिणाम में धांधली से वाजिब सवालों के जवाब चाहिए. क्या सरकार की जिम्मेदारी नहीं बनती कि वह जांच कराकर इन वाजिब शिकायतों का निस्तारण करे.''


इसके साथ ही आईएमए जूनियर डॉक्टर्स नेटवर्क ने एनटीए को एक लेटर लिखकर एग्ज़ाम में हुई गड़बड़ी की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है. अब इस एग्ज़ामके खिलाफ प्रदर्शन भी शुरू हो गए हैं. कानपुर और वाराणसी में छात्रों ने प्रदर्शन किया.

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