Lok Sabha Election 2024: नेहरू, पटेल, अटल सुषमा, जेटली बनेंगे स्टार प्रचारक !

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों लोकसभा चुनाव को लेकर तमाम राज्यों में चुनावी रैली कर रहे हैं। बीजेपी लोकसभा चुनाव से पहले वोटर्स तक उनकी भाषा में पहुंचने की कोशिश कर रही है और इसके लिए पार्टी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल कर रही है। इतना ही नहीं बीजेपी अपने उन सीनियर नेताओं की लोकप्रियता का फायदा उठाने पर भी फोकस कर रही है जिनका निधन हो चुका है और जो सक्रिय राजनीति से दूर हो चुके हैं। अटल बिहारी वाजपेयी, सुषमा स्वराज जैसे नेताओं के भाषणों और उनसे जुड़ी यादों के वीडियो और ऑडियो फुटेज को उनके चुटीले राजनीतिक अंदाज में शेयर किया जाएगा।

टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल में बीजेपी हमेशा अपने विपक्षी दलों से आगे रही है। 2014 की शुरुआत में चुनाव प्रचार के लिए नरेंद्र मोदी का मैसेज हर संभावित मतदाता तक पहुंचे इसके लिए बीजेपी ने आईटी सेल, सोशल मीडिया और खासकर व्हाट्सएप का फायदा उठाते हुए कोई कसर नहीं छोड़ी। तब भी बीजेपी ने पीएम मोदी के मैसेज को घर-घर तक पहुंचाने के लिए एक हजार रैलियां कराई थी, जिन्हें थ्री डी टेक्नोलॉजी के जरिए पीएम मोदी ने संबोधित किया था। पार्टी ने जमीनी स्तर से फीडबैक हासिल करने, डेटाबेस तैयार करने और यहां तक कि निर्वाचन क्षेत्रों के लिए उम्मीदवारों के चयन में मदद करने के लिए भी नमो ऐप का इस्तेमाल किया। ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए लोगों तक सीधे मैसेज पहुंचाए जा रहे हैं। वहीं अब बीजेपी पार्टी वरिष्ठ नेताओं की लोकप्रियता का फायदा उठाने पर ध्यान दे रही है।

 AI की मदद से होंगे भाषण

बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि देश में 70 से ज्यादा लोकसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां आज भी इन नेताओं की चर्चा होती है। जैसे महाराष्ट्र, एमपी, यूपी, झारखंड, तमिलनाडु और केरल समेत दूसरे राज्यों में वाजपेयी लोकप्रिय हैं। जबकि गुजरात, बिहार, यूपी और उत्तराखंड में लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे दिग्गज प्रभावशाली हैं। इनके अलावा अरुण जेटली की चर्चा पंजाब, दिल्ली, बिहार और कर्नाटक में होती है। बीजेपी के एक महासचिव ने कहा, इन पार्टी नेताओं से जुड़ी कहानियां और किस्से लोग दिलचस्पी से सुनते और सुनाते हैं। इस बार बीजेपी इन नेताओं के चुनिंदा भाषणों को AI की मदद से लोगों के बीच पहुंचाएगी। इतना ही नहीं इन पर चर्चा और सम्मेलन भी करवाएगी।

 एक वोट से वाजपेयी सरकार जाने का प्रसंग

मुंबई का ऐतिहासिक भाषण अंधेरा हटेगा, सूरज उगेगा, कमल खिलेगा

बेल्लारी में सुथमा का कन्नड़ में भाषण

आज़ादी की 60वीं सालगिरह पर संसद में आडवाणी का भाषण

मंदिर आंदोलन में कल्याण सिंह की फुटेज 

काशी तमिल संगमम में हुआ था AI का इस्तेमाल

AI टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल पिछले साल दिसंबर में काशी तमिल संगमम कार्यक्रम में हुआ था, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का तमिल में अनुवाद किया गया था। पीएम मोदी ने उस समय कहा था, ये एक नई शुरुआत है और उम्मीद है कि इससे मेरे लिए आप तक पहुंचना आसान हो जाएगा। क्योंकि भारत एक ऐसा देश है जहां कई भाषाएं बोली जाती हैं। इसलिए उन लोगों से उनकी ही भाषा में बात करने के लिए बीजेपी एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है। वहीं सियासी जानकारों का मानना है कि पीएम मोदी के भाषणों के अनुवाद का लोगों के बीच बड़ा प्रभाव पड़ेगा। क्योंकि दक्षिण में लोग अपनी स्थानीय भाषाओं को बेहद पसंद करते हैं।

2019 में भाजपा ने की थी जीत दर्ज 

बीजेपी की ओर से दूसरी भाषाओं का चयन भी राजनीतिक महत्व रखता है। महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल दूसरे और तीसरे सबसे बड़ी संख्या में सांसद लोकसभा में भेजते हैं। पार्टी इन राज्यों में अपनी संख्या बेहतर करने के लिए काफी कोशिश कर रही है। 2019 में उसने महाराष्ट्र में 23 सीटें जीती थीं, जबकि उसकी सहयोगी शिवसेना ने 18 सीटें जीती थीं। बंगाल में वो राज्य की 42 में से 18 सीटें जीतने में कामयाब रही और इसे पार्टी के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा गया। 

कांग्रेस ने भी बनाई रणनीति

दूसरी ओर, कांग्रेस अपनी पूर्व सरकारों के खिलाफ बीजेपी के प्रोपेगेंडा से निपटने के लिए एआई की मदद लेगी। इसके जरिए राजनेताओं के वीडियो से ही उनकी बात रखने की तैयारी की गई है। इन वीडियो में पं. नेहरू कश्मीर को लेकर लगे आरोपों का जवाब देते और सरदार पटेल आरएसएस के बारे में राय देते नजर आएंगे। इन वीडियो का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर भी किया जाएगा। इंडिया गठबंधन के समर्थक इन्फ्लुएंसर्स को भी इनके क्लिप दिए जाएंगे। वहीं, राहुल गांधी के भाषणों का 8 भाषाओं में अनुवाद होगा ताकि वोटर्स तक पहुंच सकें। एआई के जरिए चर्चित नेता वोटर्स को उनके नाम से पुकारते दिखेंगे। इसके अलावा वॉयस मॉड्यूलेशन से चहेते नेता की आवाज बनाने जैसे प्रयोग भी होंगे। तो टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से चुनाव में किस दल को फायदा हुआ ये तो 4 जून को चुनाव के नतीजे आने पर पता चलेगा।  

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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