अब देश के पोर्ट आए साइबर ठगों के निशाने पर, सामने आई बड़ी जानकारी

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भारत में पिछले कुछ समय से साइबर फ्रॉड की बाढ़ सी आ गई है. साइबर ठगों के जाल में आम आदमी से लेकर खास आदमी हर कोई इनके मकड़जाल में फंस रहा है. ये ठग इतने शातिर तरीके से ठगी को अंजाम देते है.. कि किसी को भनक तक नहीं लगती है. लेकिन अब ये साइबर ठग देश की सुरक्षा के लिए भी आफत बन गए है. मुंबई पुलिस के लिए तो साइबर फ्रॉड गैंग सर दर्द बना हुआ है. 
आतंकी गुटों और दुश्मनों की निगाह अब भारत के समुद्री बंदरगाहों पर है. देश में घुसपैठ में बार-बार नाकाम होने वाले आंतकी गुट अब साइबर हमला कर सकते है और अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचा सकते हैं और इनके निशाने पर मुंबई पोर्ट है. एक खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक देश के अन्य बंदरगाह भी साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं एक खबर के मुताबिक लॉस एंजिलिस पोर्ट पर कोरोना महामारी के बाद से साइबर हमले बेतहासा बढ़े हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक साइबर हमले 400 फीसदी तक बढ़ गए है. रोजाना कई मालवेयर, स्पीयर फिशिंग और केसियल हारवेस्टिंग केस सामने आते रहते है. हमले रोकने को FBI की मदद ली जा रही. साइबर रिजिलियंस सेंटर भी विकसित किया गया है.

देखा जाए तो भारत अब बंदरगाहों पर सेफ्टी स्टैंडर्ड को लगातार अपग्रेट कर रहा है. Port Capacity और संचालन बढ़ाने और स्वचालन के माध्यम से समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. सभी बंदरगाह संचालनों की निगरानी में डिजिटलीकरण समुद्री क्षेत्र साइबर खतरों के लिहाज से असुरक्षित भी हुए हैं.

चीन सबसे बड़ा खतरा
चीनी साइबर एक्टिविटी भारत के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा का खतरा है.
चीन अपनी एटी एक्सेस/एरिया डेनियल ए 2 / ए डी रणनीति में भी साइबर टेक्नोलॉजी का यूज कर रहा है.
ए 2 / ए डी रणनीति अपने जहाजों / पनडुब्बियों की रक्षा प्रणालियों को बढ़ाकर Rival Powers के समुद्री संचालन को बाधित और नेविगेशन की स्वतंत्रता से वंचित करती है. चीन की ओर से साइबर हमलों का अंदेशा भी सबसे ज्यादा है.

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस हमले की वजह क्या है तो उसे भी समझ लेते हैं....

साइबर हमले की वजह
साइबर खतरों के पीछे प्राथमिक मकसद मुनाफाखोरी है, ऐसे कई पहलू हैं जो साइबर अपराधी को पोत संचालन पर साइबर हमले करने के लिए प्रेरित करते है. इसमें जासूसी, सक्रियता, आतंकवाद, परोक्ष युद्ध और अन्य कारण शामिल हैं.हमले किस तरह से हो सकते है. किस सिस्टम के जरिए हैक किया जा सकता है उस पर नजर डाल लेते हैं

किस तरह से होते हैं हमले
मैलवेयर
ट्रोजन
बॉटनेट
साइबर आतंकवाद
घोस्ट शिपिंग
आखिर बड़ी कमजोरियां क्या है.उस पर एक नजर

बड़ी कमजोरियां
असुरक्षित शिपबोर्ड कंप्यूटर नेटवर्क
ऑनलाइन पोर्टल्स से डॉक्यूमेंट्स अपलोड करना
ईमेल के माध्यम से शिपिंग डॉक्यूमेंट्स को रेगुलरली भेजना
पोर्ट Authorities के कम्युनिकेशन भी एक वजह
Unsupported ऑपरेटिंग सिस्टम
पैच न किया गया सिस्टम सॉफ्टवेयर
पुराना या Unavailable एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का होना

देखा जाए तो नेविगेशन, बिजली और कार्गो मैनेजमेंट से रिलेटेड जहाजों का बुनियादी ढांचे का तेजी से डिजिटलीकरण और इंडस्ट्रियल इंटरनेट ऑफ थिंग्स के बढ़ते उपयोग से साइबर हमले बढ़ सकते हैं...फिलहाल भारत में स्वचालित पहचान प्रणाली यानी एआईएस सिस्टम, इंडस्टियल कंट्रोल सिस्टम और अन्य Operationals टेक्नीक्स ने पोर्ट और पोल operational efficiency बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. लेकिन ये Technologies साइबर हमलों के लिहाज से फुल प्रूफ नहीं है.

कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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