सिर्फ Mrs. Amitabh Bachchan नहीं हैं Jaya Bachchan.

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साल 2001 में रिलीज हुई फिल्म ‘कभी खुशी कभी गम’ में एक सीन है, जब यशवर्धन रायचंद का किरदार निभा रहे अमिताभ बच्चन टाई बांधने के लिए अपनी पत्नी नंदिनी यानी जया बच्चन को आवाज देते है। अमिताभ की हाइट ऊंची होने की वजह से जया उन तक नहीं पहुंच पाती तो अमिताभ एक स्टूल जया की तरफ कर देते हैं जिस पर खड़े होकर जया टाई बांधती हैं। टाई बंधवाते-बंधवाते अमिताभ जया से कहते हैं कि, आप अब लग रही हैं मिस्सेज यशवर्धन रायचंद। इस फिल्म की तरह ही रियल लाइफ में भी अमिताभ बच्चन जिनको सदी का महानायक कहा जाता है। उनसे शादी करने के बाद मिसेज अमिताभ बच्चन के टैग से हटकर जया को अपनी पहचान बनाए रखना लगभग मुश्किल था, पर जया ने अपने व्यक्तित्व को अमिताभ जैसे व्यक्तित्व के आगे कम होने नहीं दिया। सवाल उठता केसे। इस सवाल को समझने के लिए हमें जया के जीवन में झांकना होगा।

कहानी शुरू होती है साल 1944 में भोपाल के फेमस जर्नलिस्ट और राइटर तरुण भादुड़ी ने पटना की रहने वाली इंदिरा गोस्वामी से शादी की, इंदिरा भी एक सीनियर जर्नलिस्ट रही हैं। 9 अप्रैल साल 1950 को जया का जन्म हुआ। जया की दो छोटी बहनें नीता और रीता भी हैं।

बचपन से ही जिद्दी स्वभाव की जया ने जिसकी चाह रखी उसको पाने के लिए जी तोड़ मेहनत की। भोपाल के सेंट जोसेफ कॉन्वेंट से पढ़ाई की। स्पोर्ट में पार्सीपेट किया, भरतनाट्यम सीखा। एनसीसी में बेस्ट कैडेट होने का तमगा साल 1966 प्रधानमंत्री के हाथों मिला। इन सबके साथ फिल्मों में बेहद रुचि रखने वाली जया दिलीप कुमार की फेन थीं।

फिल्म डायरेक्टर और प्रोड्यूसर तपन सिन्हा की फिल्म 'क्षुधित पाषाण' की जब भोपाल में शूटिंग हुई, तब सारे इंतजाम तरुण कुमार ने किए। इस वजह से दोनों दोस्त बन गए। फिल्म हिट हुई तो तपन, तरुण को लकी मामने लगे, जहां भी शूटिंग होती तरुण को अपने पास बुलाया करते। साल 1962 जब 'निर्जन सैकते' की शूटिंग के वक्त तपन सिन्हा ने तरुण कुमार को पुरी बुलाया तो पिताजी के साथ जया भी गईं। जहां रवि घोष से मुलाकात हुई। रवि घोष ने ग्रेट फिल्म डायरेक्टर सत्यजीत रे से मिलवाया। और सत्यजीत रे जया को देखते ही अपनी फिल्म 'महानगर' में काम करने का ऑफर दे दिया। फिल्म पूरी होने के बाद सत्यजीत राय ने जया को एक प्रमाण-पत्र दिया था, जिस पर लिखा था।

'अभी तक मैंने जितने भी नए कलाकारों के साथ काम किया, जया उनमें शायद सबसे अच्छी थी।'

एक्टिंग में अपनी पकड़ बनाने के लिए जया ने फिल्म-इंस्टीट्यूट में अप्लाई कर दिया। जहां पर सत्यजीत रे ये सर्टिफिकेट काम आ गया और एडमिशन मिल गया। फिल्म इंस्टीट्यूट में जया के साथ शत्रुघ्न सिन्हा, रेहाना सुल्तान और डैनी भी थे। पहली टर्न में सिर्फ दो लोगों को मेरिट स्कॉलरशिप मिली। पहले डैनी थे, और दूसरी जया थी। उन दिनों डायरेक्टर ऋषिकेश मुखर्जी इंस्टीट्यूट आए प्रिंसीपल जगत मुरारी से मिले कहा कि 'गुड्डी' फिल्म के लिए एक अच्छी लड़की चाहिए। जगत मुरारी ने तुरंत कह दिया - जया है ना, जया भादुड़ी। कोर्स खत्म हुआ और जया ने ‘गुड्डी' फिल्म की शूटिंग शुरू हो गई। गुड्डी फिल्म में अमिताभ बच्चन ने गेस्ट एपिरेंस का रोल किया था और इसी फिल्में के सेट पर जया और अमिताभ की पहली मुलाकात हुई।

खालिद मोहम्मद की किताब 'टू बी और टू बी नॉट : अमिताभ बच्‍चन' में अमिताभ और जया की लाइफ के कई किस्सों का जिक्र किया गया है।

जया बच्चन ने साल 1971 में ‘गुड्डी’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। पहली फिल्म से फिल्म फेयर में बेस्ट एक्टर का नॉमिनेशन पाया। जया की दमदार एक्टिंग के सभी दिवाने थे। जबकि साल 1969 में रिलीज हुई 'सात हिन्दुस्तान' से बॉलीवुड में कदम रख चुके अमिताभ बच्चन राजेश खन्ना के स्टारडम कहीं नजर नहीं आ रहे थे। उस दौर में अमिताभ राजेश खन्ना की फिल्मों में सपोर्टिंग एक्टर के तौर पर काम करते थे। एक तो अमिताभ की लंबी हाइट, ऊपर से स्ट्रगलिंग एक्टर का तमगा ऐसे में उस दौर में कोई भी हीरोइन अमिताभ के साथ काम नहीं करना चाहती थी। लेकिन जया भादुड़ी ने हिम्मत की। साल 1972 में रिलीज हुई दो फिल्में बंसी बिरजू और एक नजर में काम किया।

एक बार एक इंटरव्यू में, जया ने बताया भी था, अमिताभ बच्चन के साथ काम करने के लिए लोग उनसे 'क्या तुम पागल हो' जैसे सवाल पूछते थे। ये भी कहते थे कि अमिताभ कभी अच्छे एक्टर नहीं बन पाएंगे।

सबके मना करने पर जया ने अमिताभ के साथ साल 1973 में रिलीज हुई फिल्म जंजीर में काम किया। फिल्म सुपरहिट हुई। 'जंजीर' ने बिग बी की दुनिया बदल दी। उनको 'एंग्री यंग मैन' का खिताब मिला। और जया और अमिताभ की दोस्ती प्यार में बदल गई।

फिल्म जंजीर की सफलता के बाद पूरी टीम ने लंदन जाने का फैसला किया। जब अमिताभ ने ये बात घर पर बताई तो उनके पिता हरिवंश राय बच्चन ने उनसे पूछा कौन कौन से दोस्त जा रहे हैं। तब अमिताभ ने दोस्तों में जया का नाम भी बताया। फिर पिता हरिवंश राय बच्चन ने अमिताभ से कहा कि अगर जया के साथ जाना है तो शादी करके जाओ। फिर क्या था, दोनों की झट मंगनी, पट ब्याह हुआ। दोनों ने 3 जून 1973 को शादी कर ली। और अगले महीने ही एक और फिल्म 'अभिमान' रिलीज हुई। इस फिल्म की कहानी रियल लाइफ से कुछ-कुछ मिलती थी। फिल्म अमिताभ सिंगर बने होते है। फिर एक गांव में जया का गाना सुनकर अमिताभ इंप्रेस हो जाते है। फिर दोनों की शादी होती और अमिताभ की मदद से जया भी इंडस्ट्री गाना शुरू कर देती है लेकिन वे अमिताभ से ज्यादा पाप्यूलर हो जाती है इसके बाद दोनों के आड़े आता है 'अभिमान'। इस फिल्म की तरह ही अमिताभ और जया की जोड़ी ने 'चुपके चुपके', 'शोले', 'सिलसिला', 'कभी खुशी कभी गम' जैसी फिल्मों में काम किया। लेकिन मिसेज बच्चन ने अपने ऊपर कभी अमिताभ का व्यक्तित्व हावी नहीं होने दिया। आज भी समय – समय पर सामाजिक मुद्दों को लेकर जया अपनी बेबाक राय रखती है तो लोग उनकी बात सुनते है।

जया ने अपनी पहली हिं फिल्म 'गुड्डी' में उन्होंने एक्टर धर्मेंद्र की दीवानी-लड़की की रोल निभाया था। फिर दूसरी फिल्म 'उपहार' में ऐसी अल्हड़लड़की का रोल किया था, जो प्रेम और शादी का अर्थ नहीं समझती है। फिर 'अनामिका', 'कोरा कागज', 'कोशिश', 'पिया का घर', 'शोर', 'बावर्ची', 'गाय और गौरी', 'मन का आंगन', 'नौकर', 'नया दिन-नई रात', 'परिचय', 'फागुन', 'समाधि', जैसी फिल्मों से उन्हें संजीदा एक्टर के रूप में मान्यता मिली। सभी ने जया को सादगी के रूप में ज्यादा सराहा, लेकिन ग्लैमरस रोल में नकार दिया।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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