घरों की खिड़कियां खोलीं और गाय ने मारी डकार तो देना होगा टैक्स!

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देश का बजट आने वाला है जिससे लोगों को राहत मिलने वाली है। बजट के खर्चें के लिए सरकार जनता पर टैक्स लगाती है। अगर ये टैक्स इनकम और हाउस टैक्स न होकर आपकी गर्लफ्रेंड न होने पर या आपने दाढ़ी रखी है इस पर लगाया जाए तो। चौकिए मत एक जमाने में दुनिया में ऐसे-ऐसे अजीबोगरीब टैक्स लगते थे, जिससे आप हैरान होंगे और कुछ टैक्स के बारे में जानकर आप गुस्से से भर जाएंगे।

माना जाता है दुनिया में टैक्स की शुरुआत 14वीं शताब्दी से हुई। इतिहास से लेकर आज तक कई ऐसे टैक्स हैं, जो शायद ही सुने हों। इन अजीबो-गरीब टैक्स का जिक्र कई किताबों और इतिहासकारों ने किया है।

आजकल लड़कों में दाढ़ी बढ़ाने का फैशन सा है। अगर ये साल 2023 न होकर साल 1705 होता तो ऐसे लड़कों टैक्स देना पड़ता। रूस के राजा पीटर द ग्रेट ने साल 1705 में दाढ़ी बढ़ाने पर टैक्स लगा दिया था। जिन्हें दाढ़ी रखनी होती थे, उन्हें टैक्स देना होता था। दाढ़ी टैक्स चुकाने वालों को एक टोकन दिया जाता था। जिसको वो हर वक्त अपने साथ रखता था।

दूध के प्रोडक्शन में दुनिया के टॉप 10 देशों में शामिल न्यूजीलैंड ने मई 2022 में एक विचित्र कानून बनाया। इस कानून के तहत गाय समेत दूसरे मवेशियों के डकारने पर किसानों या उसके मालिकों को टैक्स देना होगा। पर्यावरण को ग्रीन गैस से बचाने के लिए ये कानून लाने वाला न्यूजीलैंड दुनिया का पहला देश है।

स्तन ढकने पर ‘ब्रेस्ट टैक्स’ यानी ‘स्तन कर’ देना पड़े। ये किसी विदेश की बात नहीं, बल्कि भारत की है।

'भारतीय इनकम टैक्स की कहानी' किताब के मुताबिक

19वीं सदी में केरल के त्रावणकोर में निचली जाति की महिलाएं अपने स्तन नहीं ढक सकती थीं। नंगेली नाम की महिला ने विरोध जताया। जब राजा के मुंशी स्तन ढकने के लिए टैक्स लेने आए तो नंगेली ने अपना स्तन काटकर सामने रख दिया। हालांकि खून बहने से उसकी मौत हो गई थीं। इसके बाद हंगामा हुआ तो साल 1924 को टैक्‍स हटा लिया गया।

इंग्लैंड ने साल 1696 में घरों की खिड़की पर टैक्स लगा दिया था। जिनके घरों में ज्यादा खिड़कियां होती थीं। उन्हें उतना टैक्स देना पड़ता था। टैक्स न देना पड़े तो लोग खिड़कियां बंद करने लगे तो लोगों में सांस की दिक्कतें होने लगी। इसके बाद साल 1851 में इस टैक्स को हटा लिया गया। आज भी इंग्लैंड में ऐसे मकान दिख जाते हैं जहां खिड़किया बंद है।

5-साल 1820 में अमेरिका में शादी नहीं करने वाले लड़कों से साल में एक डॉलर बैचलर टैक्स वसूला जाता था। इससे पहले भी बैचलर टैक्स कई देशों में था। शुरुआत 9वीं सदी से हुई थी। तब रोम के सम्राट ऑगस्ट्स ने इस तरह का टैक्स लगाया था।

एक जमाने में मिस्र में खाना पकाने के तेल पर भी टैक्स देना पड़ता था। लोग टैक्स वाला तेल ही खरीद सकते थे। सरकार के लोग घर-घर जाकर तलाशी लेते थे की कहीं कोई बिना टैक्‍स वाले तेल का इस्तेमाल तो नहीं कर रहा। हालांकि आज भी हम जो अपने किचन में जो तेल इस्‍तेमाल करते हैं, उसपर टैक्‍स लगा होता है।

साल 1885 में कनाडा में ‘Chinese Head Tax’ नाम से एक टैक्स निकाला। इस टैक्स में कनाडा में चीनी प्रवासियों के आने पर टैक्स लगाया गया था। साल 1923 में कुछ एक्सेप्शन के साथ चीनी प्रवासियों पर रोक लगा दी गई।

साल 1660 में इंग्लैंड ने चिमनियों पर टैक्स लगा दिया था। जिससे लोगों ने घरों के फायरप्लेसेस को ढकना शुरू कर दिया था। 17वीं सदी के इंग्लैंड में तब और भी ज्यादा भीषण ठंड पड़ती थी। बहरहाल साल 1689 में इस टैक्स को खत्म कर दिया गया।

साल 1712 जब यूरोप के कई देशों में साबुन पर भारी टैक्स लगाया गया। ये इतना ज्यादा था कि साबुन कालाबाजारी होने लगी। ये टैक्स 141 साल तक रहा और साल 1853 में हटाया गया।

कौटिल्य के अर्थशास्त्र के मुताबिक, राजा ऐसा टैक्स लगाए जिसे चुकाने में प्रजा को किसी भी प्रकार की कठिनाई महसूस न हो। बहरहाल खुद को खुशनसीब समझिए कि आप इस सदी में जी रहे हैं नहीं तो आप पर भी ये अजीबोगरीब टैक्स थोपे जाते हैं।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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