Paresh Rawal : कभी हंसाने-कभी डराने वाला एक्टर

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साल 1994, फिल्म रिलीज हुई 'अंदाज अपना अपना'। आमिर खान और सलमान खान की कॉमेडी से सजी ये फिल्म अधूरी सी लगती अगर तेजा और राम गोपाल बजाज के किरदार में ये एक्टर न होता। फिल्म 'तमन्ना' में किए गए किन्नर के रोल से फिल्म समीक्षकों का दिल जीता। अनिल कपूर, श्रीदेवी और उर्मिला मातोंडकर की लव स्टोरी वाली फिल्म 'जुदाई' शायद उतनी मजेदार नहीं लगती, अगर इन्होंने हर किसी से, किसी भी बात पर सवाल पर सवाल दागने वाले हसमुखलाल का रोल इतनी खूबसूरती से न निभाया होता।

फिल्म हेराफेरी का जब भी जिक्र होगा तो सबसे पहले 'बाबू भइया' ही याद आएंगे। ये सभी आइकॉनिक कैरेक्टर हमारे दिमाग में बसे हैं और इसमें जिन्होंने रंग भरा है। वो परेश रावल हैं। अपनी एक्टिंग से कभी हंसाने कभी डराने वाले परेश रावल ने एक बार क्यों कहा था कि ‘किसी आदमी को आप मरते दम तक पहचान नहीं सकते हैं।’

गुजरात के एक ब्राह्मण फैमिली से ताल्लुक रखने वाले दयाल रावल और धनलक्ष्मी के घर 30 मई साल 1950 परेश रावल का जन्म हुआ। परेश रावल जब छोटे थे तभी उनके पिता मुंबई शिफ्ट हो गए। शुरुआती पढाई करने बाद नरसी मोंजी कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की। काफी जद्दोजहद के बाद नौकरी मिली। कुछ वक्त तक एक बैंक में भी नौकरी की। लेकिन उन्हें बहुत जल्द ये यकीन हो गया था कि वो नौकरी नहीं कर सकते हैं। उन्हें अपना करियर एक्टिंग में अजमाना चाहिए। बस फिर क्या था। वो बैंक की नौकरी को छोड़कर अपना फिल्मी करियर संवारने में जुट गए। और एक थियेटर से जुड़े।

वक्त गुजरा और साल 1982 को परेश रावल की एक गुजराती फिल्म रिलीज हुई जिसका नाम था 'नसीब ने बलिहारी'। इस फिल्म में परेश की एक्टिंग देख कर डायरेक्टर केतन मेहता इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने साल 1984 में रिलीज हुई फिल्म 'होली' के लिए परेश को साइन कर लिया। दरअसल होली एक ऐसी फिल्म थी जिसने बॉलीवुड को दो लेजेंड्री एक्टर दिए। एक अमीर खान तो दूसरे परेश रावल। परेश ने इस फिल्म में एक विलेन का रोल किया था। फिर साल 1986 में रिलीज हुई फिल्म 'नाम' में काम करने के परेश रावल का भी नाम होने लगा।

अगले दस सालों तक इन्होंने 80 से ज्यादा फिल्मों में विलेन के ही रोल निभाए। साल 1994 की ‘सरदार’ फिल्म में परेश रावल ने वल्लभ भाई पटेल का कैरेक्टर रोल किया। इस फिल्म के बाद बतौर एक्टर परेश का कद बढ़ता चला गया। फिर साल दर साल सैंकड़ों फिल्मों में काम किया। न जानें कितनी फिल्में, जिसमें अगर परेश रावल न होते तो शायद वो फीकी लगतीं।

साल 1987 में परेश रावल ने संपत स्वरूप से शादी की। स्वरूप साल 1979 में मिस इंडिया रह चुकी हैं। और उन्होंने कई टीवी सीरियल और फिल्मों में एक्टिंग भी की है।

अपनी शादी को लेकर परेश रावल ने एक इंटरव्यू में एक किस्सा बताया था।

परेश रावल ने जब स्वरूप को पहली बार देखा तो देखते ही रह गए। और तय कर लिया कि इसी लड़की से शादी करेंगे। और स्वरूप से शादी करने के लिए 12 साल का इंतजार किया।

जब प्रपोज किया था तो परेश ने स्वरूप से कहा था कि ‘मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं, लेकिन मुझसे ये मत कहना कि, चलो एक दूसरे को पहले जानते हैं। क्योंकि कोई आदमी मरते दम तक किसको भी नहीं जान सकता है।’

इनके दो बच्चों का नाम आदित्य और अनिरुद्ध हैं। आदित्य रावल भी अपने पिता की तरह एक एक्टर हैं और साल 2020 में रिलीज हुई फिल्म “बमफाड़” से डेब्यू कर चुके हैं।

फिल्मों में अपना एक कद बनाने के बाद परेश रावल ने पॉलिटिक्स में भी कदम रखा। साल 2014 में बीजीपी की टिकट से अहमदाबाद ईस्ट सीट से सांसद बने। फिर साल 2019 में उन्होंने दोबारा लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा। इस बारे में उन्होंने कहा था कि वो राजनीति के लिए समय नहीं दे पा रहे हैं।

कई सारे अवार्ड पाने वाले परेश रावल को साल 2014 में पद्मश्री अवार्ड से नवाजा गया। परेश रावल एक उम्दा कलाकार हैं और उसने उम्मीद की जा सकती है कि उनके पास अभी एक्टिंग के कई रंग होंगे।  जिसका इस्तेमाल करके वो कभी गहरे और कभी हल्के शेड से फिल्मों के चित्रपट को भरते रहेंगे।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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