Parliament : एक कहानी का अंत, एक कहानी शुरू

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आधी रात को मिली आजादी के बाद नए भारत की सुबह देखी। देश का संविधान रचा गया। ये गवाह बना जब देश परमाणु शक्ति के रूप में उभरा। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का दिल को छू लेने वाला भाषण, लाल बहादुर शास्त्री का दृढ़ संकल्पइंदिरा गांधी की निडरता, अटल बिहारी वाजपेयी की काव्य प्रतिभा और नरेंद्र मोदी की शक्तिशाली भाषणकला की गूंज अब पुराने संसद में यादें बन गईं। आज बात पुरानी संसद की जो साल 1927 से देश की गाथा के कई पन्नों को समेटे है।

पुराने संसद का इतिहास लगभग 100 साल पुराना है। ये वो दौर था, जब भारत के नौजवान आजादी पाने के लिए मर खप रहे थे, आंदोलन चलाए जा रहे थे।

राज्यसभा के पूर्व महासचिव डॉ. योगेन्द्र नारायण ने 'भारत की संसद का परिचय' किताब लिखी है उसके पुस्तक में लिखा है कि, अंग्रेजों ने 1919 में 'गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट' पारित किया गया। और इसी तहत 12 फरवरी, साल 1921 में दिल्ली में ड्यूक ऑफ कनॉट और प्रिंस आर्थर ने पुराने संसद भवन की आधारशिला रखी। छह सालों को वक्त गुजरा और तारीख आई 18 जनवरी साल 1927 जब एक भव्य समारोह में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन ने पुराने संसद भवन का उद्घाटन किया। उस समय इसे 'काउंसिल हाउस' के रूप में जाना जाता था।

साल आया 1947 जब इंडियन फ्रीडम एक्ट पारित हुआ।

15 अगस्त 1947 को इस भवन में भारतीयों ने सत्ता संभाली। यहीं से प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आधी रात को अपना भाषण 'ट्रिस्ट विद डेस्टिनी' दिया। आजादी की पूर्व संध्या पर, संविधान सभा की बैठक रात 11:00 बजे राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में हुई।

यहीं पर उत्तर प्रदेश की एक सदस्य सुचेता कृपलानी ने पहले विशेष सत्र की शुरुआत के मौके पर राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का गाया।

यही वो जगह है, जब 2 फरवरी साल 1948 को तत्कालीन अध्यक्ष जीवी मावलंकर ने कहा कि जिसने हमें गुलामी से आजादी की ओर अग्रसर किया, उस कद्दावर हस्ती महात्मा गांधी का निधन हो गया है। ये पहली ऐसी दुखद खबर थी। जिसकी आधिकारिक घोषणा इस भवन से की गई। ये शोक पूरी दुनिया में मनाया गया।

यहीं पर 26 जनवरी 1950 को दो साल, 11 महीने और 18 दिन में लिखा गया भारत का संविधान लागू किया गया।

सिक्किम, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य बने। भारत में दीव-दमन, दादरा नगर हवेली और पुडुचेरी को शामिल करने की चर्चा यहीं हुई।

यही पर दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देश की जनता से हर हफ्ते एक वक्त का खाना छोड़ने की अपील की। क्योंकि तब भारत भोजन की कमी से जूझ रहा था।

साल 1962 में चीन के खिलाफ भारत की हार और साल 1971 में पाकिस्तान पर देश की जीत ने सरकार और विपक्ष के बीच बहस देखी है। जिसका असर हमारे विदेश नीति पर पड़ा।

महिलाएं हो या दबे पिछड़े समाज के लोग उनके लिए आरक्षण और कमीशन का प्रावधान जैसे कानूनों को पारित किया गया। संपत्ति के स्वामित्व पर अधिकार, राजशाही परिवारों को समाप्त करने जैसे महत्वपूर्ण एक्ट भी पारित हुए।

साल 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर उप गृह मंत्री एफएच मोहसिन ने देश में आपातकाल घोषित किया गया। जिसके बाद सत्ता के खिलाफ उठी  आवाज को कुचला गया। 

साल 1989 में देश की राजनीति के गठबंधन युग में प्रवेश किया।

इसी संसद में एक वोट से हार देखी गई। जब 1999 को वाजपेयी सरकार की गठबंधन सरकार गिर गई। लेकिन बाद में अटल जीत कर आए और ये सदन अटल युग का गवाह भी रहा।

साल 1998 में, तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी ने यहीं से कहा कि 'देश ने परमाणु परीक्षण कर लिए है।' ये एक ऐसी घोषणा थी। जिसके भारत अब किसी भी देश से आंख से आंख मिलाकर बात कर सकता था।

साल 2008 में पूरी दुनिया ने आर्थिक मंदी झेली। तब भारत शायद एकमात्र देश था जो इससे जो प्रभावित नहीं था क्योंकि तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने में यही से कई कदम उठाकर देश को बचाया।

'भारत छोड़ो आंदोलन' और देश की आजादी के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में रात में संसद की बैठकें हुई । यहीं पर आधी रात तक 'एक देश, एक कर प्रणाली' के लिए जीएसटी और लोकपाल बिल के लिए बहस हुई।

साल 2001 में भारतीय संसद पर आतंकवादी हमला भी हुआ। नरेंद्र मोदी सरकार में कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 और 35-ए को निरस्त करने के फैसले लिए गए। इस संसद ने मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 साल भी कर दी है।

लेकिन अब पुरानी संसद की कहानी का अंत हो गया है। मोदी सरकार ने अब नए संसद की पहली इबारत लिख दी है। मोदी पहले प्रधानमंत्री हो गए है जिन्होंने नई संसद में पहली बार भाषण दिया। कहा कि नई संसद आत्मनिर्भर भारत प्रतीक है। देश को लोगों को उम्मीद दिलाई कि ये नई संसद से देश की नई पहचान होगी।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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