पीएम मोदी की फ्रांस यात्रा के दौरान हुए दो रक्षा सौदे इंडियन नेवी के लिए कितने अहम?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14जुलाई से फ्रांस के दौरे पर थे। वह फ्रांस के बैस्टील डे सेलीब्रेशन में बतौर चीफ गेस्ट शामिल हुए । इस दौरान भारत फ्रांस के साथ रक्षा क्षे़त्र में कई अहम समझौते भी हुए । जिसमें सबसे अहम दो समझौते हैं पहला इंडियन नेवी के एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत के लिए 26 राफेल एम फाइटर जेट की खरीद और दूसरा नेवी के लिए ही 3 और स्काॅर्पियन क्लाॅस की सबमरीन के निर्माण। ये दोनों ही मल्टी बिलियन डाॅलर की डील है। इसे लेकर फ्रांस का डिफेंस सेक्टर भी उत्साहित है। वहीं इन दोनों समझौतों से इंडियन नेवी कितनी मजबूत होगी \ हिंद महासागर] बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उसका कितना दबदबा बढेगा यह जानना भी जरूरी है। क्योंकि राफेल एम के नेवी में शामिल होने के बाद इंडियन नेवी की ताकत में मल्टीपल इजाफा होना तय है। आसमान और समुद्र के नीचे रह कर भारत के समुद्री क्षे़त्र की रक्षा के लिए यह दोनों समझौते कितने अहम हैं ?

 

बीते साल सितंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भारत का पहला इंडिजिनस एयरक्राफ्ट कैरियर  आईएनएस विक्रंात को नेवी में शामिल कर लिया गया। यह नेवी का दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर है। जिस पर नेवल फाइटर जेटस की तैनाती होनी है। आईएनएस विक्रमादित्य पर रूसी मिग-29 के फाइटर जेट का यूज हेाता है। नेवी के पास ऐसे कुल 45 फाइटर जेट है]लेकिन नेवी आईएनएस विक्रांत के लिए ज्यादा एडवांस फाइटर जेटस की तलाश कर रही थी। जिसके लिए मुख्य रूप से अमेरिकी एफ-18 सुपर हार्नेट और फ्रांस के राफेल-एम  के बीच ही मुकाबला था। दोनों एयरक्राफ्ट के गोवा स्थित आईएनएस हंसा पर ट्राॅयल किए जा चुके है। वहीं आईएनएस विक्रंात के लिए नेवी की ओर से राफेल एम खरीदने को प्राथमिकता दी गई। नेवी को कुल 26 में से 22 सिंगल सीटर और 4 टिवन सीटर राफेल एम मिलेंगे।  इंडियन एयरफोर्स के पास पहले से ही राफेल का यूज कर रही है। ऐसे में पाॅयलट की ट्रेनिंग को लेकर ज्यादा दिक्कत भी नहीं होगी। क्योंकि राफेल के नेवल और एयरफोर्स वैरियेंट की खूबियों में ज्यादा अंतर नहीं है। 

 

इंडियन नेवी में राफेल एम के आने के बाद हिंद महासागर क्षेत्र में उसके मुख्य प्रतिद्वंदी चीन के मुकाबले कितनी ताकत बढेगी यह भी जान लीजिए। दरअसल चीन की नेवी अपने दो एयरक्राफ्ट कैरियर से मुख्य रूप से जे-15 फाइटर जेट का इस्तेमाल करती है। यह फाइटर जेट मूल रूप से रूसी एसयू-33 का ही एक वर्जन है। चीन इस फाइटर जेट को 4 प्लस जेनरेशन का बताता है। चाइनीज नेवी के पास ऐसे 50 फाइटर जेट होने की जानकारी हैं।  वहीं इसके मुकाबले राफेल एम 4-5 जेनरेशन का फाइटर जेट है।  इन दोनों की तुलना करें तो

 

  

साफ है कि खूबियों के मामले में इंडिया अगर राफेल एम खरीदता है तो वह चीनी नेवल फाइटर जेट जे-15 के मुकाबले काफी ताकतवर होगा। ऐसे में भारत चीनी नौसेना को सीधे तौर पर चुनौती देने में सक्षम होगा। इसके अलावा इंडियन नेवी राफेल एम को खरीदने से पहले इसमें इंडिया स्पेसिफिक जरुरतों के हिसाब से कस्टमाइजेशन भी कराएगी। एक बात और इंडियन नेवी राफेल एम को सिर्फ आईएनएस विक्रांत पर ही तैनात करेगी। यह अभी क्लियर नहीं है। नेवी अपने दोनों एयरक्राफ्ट कैरियर पर राफेल एम को तैनात कर सकती है। मौजूदा समय में भी मिग-29 के को आईएनएस विक्रमादित्य और विक्रांत दोनों पर प्रयोग किया जा रहा है। इसके अलावा तेजस के नेवल वैरियेंट के भी डेक बेस्ड ट्राॅयल हो रहे है। इस तरह से इंडियन नेवी के अपने एयरक्राफ्ट कैरियर पर भविष्य में तीन तरह के फाइटर जेट तैनात कर सकेगी।

 

 

 ये बात तो हुई भारत की समुद्र में हवाई ताकत की। वहीं प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस की अपनी यात्रा के दौरान तीन स्कोर्पियन क्लाॅस सबमरीन के निर्माण को लेकर भी फ्रांसीसी सरकार के साथ समझौता कर सकते हैं। स्कोर्पियन क्लाॅस की 6 सबमरीन का निर्माण भारत में हाल में ही पूरा हुआ है और इस क्लाॅस की 6वीं सबमरीन के सी ट्राॅयल जारी है। मझगांव डाॅक यार्ड ने फ्रांसीसी कंपनी के साथ मिल कर इन 6 सबमरीन का निर्माण भारत में ही किया है। नेवी अपने प्रोजेक्ट-75 में रिपीट क्लाॅज के तहत अब इसी क्लाॅस की तीन और डीजल सबमरीन तैयार करेगी।

 

 स्काॅर्पियन क्लाॅस सबमरीन 220 फीट लंबी] 40 फीट उूंची हैं। जोकि 50 दिन तक समुद्र में रह कर कई तरह के मिशन को अंजाम दे सकती हैं। इसमें 35 सेलर्स और 8 आफिसर्स तैनात किए जा सकते हैं। समुद्र के अंदर इन सबमरीन की स्पीड 37 किमी प्रति घंटे तक होती है।

 

 

इन अटैक सबमरीन के जरिए इंडियन नेवी अपनी समुद्री सरहदों की ज्यादा बेहतर तरीके से रक्षा कर सकेगी और दुश्मनों पर तेजी से हमला करने में भी फ्रंट फुट पर खूफिया तरीके से तैनात रहेगी। पीएम मोदी के इस दौरे के दौरान होने वाले इन दोनों रक्षा समझौतों की लागत 90 हजार करोड़ रुपए बताई जा रही है।   

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