विदेश में शादियों पर पीएम मोदी ने कही मन की बात

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पीएम ने मन की बात में डेस्टिनेशन वेडिंग को लेकर बात की, कहा देश में शादी करने से मजबूत होती है देश की इकोनॉमी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर में मन की बात में वोकल फॉर लोकल के साथ ही डेस्टिनेशन वेडिंग को लेकर बात की, जिसमें उन्होंने साफ सवाल किया कि देश के बाहर जाकर शादियां करना जरुरी है क्या? हर बार शादी सीजन शुरू होने से पहले कॉन्फेडेरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT), जिसे कैट भी कहते हैं।त्योहारों और शादियों से पहले होने वाली बिक्री का एक आंकड़ा पेश करता है। और डेस्टिनेशन वेडिंग को लेकर पीएम मोदी की इस बात पर कैट ने भी समर्थन दिया है।     

एक शादी में करीब 80 फीसदी खर्च, वस्तुओं और सेवाओं पर किया जाता है। और जब शादी में होने वाला खर्च यानी पैसा मार्केट में आता है, तो इससे अर्थव्यवस्था और साथ ही साथ कई बिजनेस में डायरेक्ट या इनडायरेक्ट मदद मिलती है।  लेकिन जब 'डेस्टिनेशन वेडिंग' विदेशों में होती है, तो वो पैसा दूसरे देश में पहुंचता है। CAIT के अनुमान के मुताबिक, देश में 23 नवंबर से 15 दिसंबर के बीच करीब 38 लाख शादियां होने की संभावना है। और इन 38 लाख शादियों पर करीब 4.74 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे। शादियों के इस आंकड़े में कई पहाड़ी एवं रिमोट एरिया शामिल नहीं हैं।   

देश की राजधानी दिल्ली में ही इस सीजन में 4 लाख से ज्यादा शादियां होने की उम्मीद है। इसमें लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये का कारोबार होने की संभावना है। इस बात को अगर आप अपनी या अपने करीबी की शादी से जोड़कर देखे, तो बेहतर समझ सकते है। जैसे शादी में आप किस चीज पर कितना खर्च करते हैं, वो कैसे देश की इकोनॉमी से जुड़ा हुआ है।   

कैट के मुताबिक, शादी के फक्शन में आमतौर पर 50 प्रतिशत खर्च, सामान की खरीद पर होता है। साथ ही कपड़ों पर 10 परसेंट, आभूषणों पर 15 फीसदी, इलेक्ट्रॉनिक्स पर 5 परसेंट साथ ही ड्राई फ्रूट, फल, मिठाई और नमकीन जैसे खर्च पर 5 परसेंट, किराना-सब्जियों पर 5 परसेंट, गिफ्ट पर 4 परसेंट और बाकी का 6 परसेंट कई और जरुरतों पर खर्च होता है।  इसी के साथ ही शादी में हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में अनुमान के मुताबिक, बैंक्वेट हॉल, होटल और मैरिज प्लेस पर 5 परसेंट, इवेंट मैनेजमेंट पर 5 फीसदी, टैंट सजावट पर 12 फीसदी, खान-पान पर 10 फीसदी, फूलों की सजावट पर 4 फीसदी, 3 प्रतिशत ट्रैवल एवं कैब सेवाओं पर, फोटो और वीडियो शूट पर 2 प्रतिशत, ऑर्केस्ट्रा, बैंड पर 3 फीसदी, लाइट और साउंड पर 3 फीसदी व अन्य विविध सेवाओं पर शेष 3 फीसदी राशि खर्च होगी। 

हमारे देश में शादी सिर्फ एक दिन की नहीं होती, लोग अपनी सहुलियत के हिसाब से 7 से 9 दिन तक शादी के फंक्शन करते हैं। अपनी क्षमता के मुताबिक शादियों पर खर्च भी करते है।वहीं इसी रिपोर्ट के हवाले से कहा जा सकता है कि इस सीजन के दौरान लगभग 7 लाख शादियां 3 लाख रुपये के खर्च पर होंगी। लगभग 8 लाख शादियां ऐसी रहेंगी, जिनमें प्रत्येक पर 6 लाख रुपये खर्च होंगे। 10 लाख शादियां, 10 लाख रुपये प्रति शादी के खर्च के हिसाब से होंगी। 7 लाख शादियां ऐसी होंगी, जिन पर 15 लाख रुपये के हिसाब से खर्च किया जाएगा। पांच लाख शादियां, ऐसी होंगी, जिन पर 25 लाख रुपये के हिसाब से खर्च होगा। 50 हजार शादियां, 50 लाख रुपये के खर्च वाली होंगी। इसके अलावा 50 हजार शादियां, 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक के खर्च के साथ होने की उम्मीद है। 

ये आंकड़े इस बात को साफ करते हैं कि शादी चाहें कम बजट की हो या ज्यादा शादी में होने वाला खर्च कई व्यवसायों से जुड़ा हुआ है, ऐसे में जब देश से बाहर शादियां होती है तो वो सारा पैसा देश के बाहर चला जाता है। पीएम मोदी की अपील से उम्मीद जताई जा रही है कि इससे निश्चित रूप से भारतीय रुपये की देश से बाहर खर्च पर कुछ हद तक तो रोक लग जाएगी। जिससे देश की अर्थव्यवस्था और ज्यादा मजबूत होगी। वैसे देश से बाहर शादियां करना अब एक समुदाय के स्टेट्स सिंबल के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर एक बार पुनर्विचार आवश्यक है।   

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