दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के पहले स्ट्रेच का जल्द उद्घाटन करेंगे पीएम मोदी

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देश नहीं अब विश्व के सबसे लंबे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे का पहला स्ट्रेच बनकर तैयार हो गया है। जिसका पीएम मोदी इनोग्रेशन 12 फरवरी को करेंगे। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे को विश्व का सबसे लंबा एक्सप्रेस वे होने का तमगा तो हासिल ही है। उसके साथ साथ ये कई खूबियों को भी समेटे हुए है। इसमें एनिमल ओवरपास एक्सप्रेस-के साथ इलेक्ट्रिक लेन और स्ट्रेचेबल हाईवे भी शामिल है।

आगामी लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार की कई अहम प्रोजेक्ट्स को इस साल पूरा करने जा रही है। इनमें सबसे पहले नंबर पर है दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे क्यों कि ये एक्सप्रेस वे देश की राजधानी दिल्ली को आर्थिक राजधानी मुंबई से जोड़ देगा। जिससे देश की इकॉनमी के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है। विश्व के सबसे लंबे एक्सप्रेस वे के पहले स्ट्रेच पर आप 12 फरवरी से फर्राटा भर सकेंगे। 1380 किलोमीटर के दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे का सोहना से दौसा वाला स्ट्रेच बनकर तैयार है। 220 किलोमीटर के इस स्ट्रेच के जरिए अब आप दिल्ली से राजस्थान के दौसा तक की दूरी 2 घंटे में पूरी कर लेंगे।

लेकिन 1380 किलोमीटर का दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे जब पूरी तरह से बनकर तैयार होने में 2024 तक का वक्त लेगा। जब ये बनकर तैयार हो जाएगा। तब दिल्ली से मुंबई की दूरी को तय करने में महज 12 घंटे ही लगेंगे। जिसे पहले 30 घंटों में पूरा किया जाता था, इस एक्सप्रेस वे पर आपके व्हीकल 120 किलोमीटर की रफ्तार से फर्राटा भरेंगे। 5 राज्यों से गुजर रहे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे से लोकल बिजनेस कनेक्टिविटी के लिए भी फायदेमंद साबित होगा। इस एक्सप्रेस वे का 160 किमी हिस्सा हरियाणा में, 374 किमी हिस्सा राजस्थान, 245 किमी हिस्सा मध्य प्रदेश और 423 किमी लंबा हिस्सा गुजरात में है।

वैसे तो देश में कई एक्सप्रेस वे बनाए जा चुके हैं लेकिन इसकी बात ही कुछ और है। आखिर इस एक्सप्रेस-वे में ऐसा क्या खास है कि पूरी दुनिया में इसकी चर्चा हो रही है? ये भी जान लेते हैं।

इस एक्सप्रेस वे में रेस्‍तरां, रेस्ट रूम, शॉपिंग मॉल, होटल जैसी सुविधाएं मिलेंगी। वहीं बच्चों के खेलने के लिए फन पार्क व झूले लगे रहेंगे। एक्सप्रेस वे में चल रही गाड़ियों को मोबाइल फ्यूल स्टेशनों के जरिए फ्यूल मुहैया कराया जाएगा। इसके साथ इस एक्सप्रेसवे पर इलेक्ट्रिक गाड़ियों की अलग लेन भी बनाई जा रही है। एक्सप्रेस-वे पर हर 100 किमी पर ट्रामा सेंटर बनाए जाएंगे। जहां एक्सीडेंट में घायल लोग और मेडिकल इमरजेंसी में लोगों का तत्काल इलाज किया जाएगा। इसके साथ ही इस एक्सप्रेस वे में एयर एम्बुलेंस के लिए हेलीपैड भी बनाए जा रहे हैं। वहीं वाइल्ड लाइफ को ध्यान में रखते हुए इस एक्सप्रेस वे में कई ग्रीन ओवरपास बनाये जा रहे है। 

बूंदी-सवाई माधोपुर के बीच दुनिया का दूसरा बड़ा ग्रीन ओवरपास तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा आठ-लेन की 4 किलोमीटर लंबी एक सुरंग मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बनाई जा रही है। दूसरी सुरंग महाराष्ट्र के माथेरान इको सेंसिटिव जोन में बनाई जाएगी।

इस एक्सप्रेस वे को बनाने में जर्मन टेक्नोलॉजी का यूज किया जा रहा है। कंपनी की गारंटी है कि जर्मन तकनीक से बनी सड़कें 50 साल तक नहीं टूटेंगी। सड़क बनाने का पूरा कच्चा मटेरियल भी जर्मनी से मंगाया गया है। जिससे सड़क की ऊपरी परत को स्टोन मैट्रिक्स एसफाल्ट से बनाया गया है। जबकि अन्य हाईवे 10 से 15 सालों में ही टूट जाते हैं। तो उसको बनाने वाली कंपनी ही रिपेयर करेगी। इस एक्सप्रेस वे में 8 लेन हैं जिसे आगे बढ़ाकर 12 लेन में कनवर्ट किया जाएगा 

एक्सप्रेस-वे पर टोल लगेगा, लेकिन ये अभी तय नहीं किया गया है कितना, एक कार्यक्रम में ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडकरी ने कहा था अच्छी सेवाएं चाहते हैं तो भुगतान तो करना पड़ेगा।  इस एक्सप्रेसवे पर टोल वसूलने के लिए भी खास तरीका अपनाया गया है। इसमें एक खासियत ये है कि एंट्री करते समय कोई टोल नहीं लगेगा। इससे एग्जिट करते समय टोल का भुगतान करना होगा। वहीं गाड़ियों को बिना रोके ये टोल काटा जाएगा इसके लिए,पूरे एक्सप्रेसवे पर ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रीडर कैमरे लगाए गए हैं। जो चलती हुई गाड़ी से फास्टैग और नंबर प्लेट को स्कैन कर लेंगे।

रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री ने इस प्रोजेक्ट की आधारशिला 9 मार्च 2018 को रखी थी। इस प्रोजेक्ट का बजट 1 लाख करोड़ रुपये है।इसके लिए 52 टेंडर निकाले गये हैं। इस एक्सप्रेस वे को 4 फेस यानी स्ट्रेच में तैयार किया जाएगा, जिसका पहले स्ट्रेच सोहना से दौसा का पीएम मोदी इनोग्रेशन करेंगे।

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