अडानी पर नहीं थम रही सियासी रार, पेमेंट लोन को लेकर खड़े हुए सवाल

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अडानी वो नाम जिसके चलते बीजेपी और कांग्रेस में छिड़ी सियासी रार खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. एक ओर राहुल गांधी 20 हजार करोड़ को लेकर अडानी और पीएम मोदी के रिश्ते को लेकर लगातार सवाल उठा रहे है. हालांकि ये 20 हजार करोड़ कौन से है इस बारे में अभी ठोस जानकारी सामने नहीं है. वहीं दूसरी ओर बीजेपी लगातार राहुल गांधी के बयान को OBC समुदाय के अपमान से जोड़कर घेर रही है. ऐसे में ना तो संसद की कार्यवाही चल पा रही है. और ना ही देश की असल मुद्दों पर चर्चा. देखा जाए तो सियासत भी अडानी और राहुल गांधी के ईर्द गिर्द ही घूम रही है. लेकिन इन सबके चलते सबसे बड़ा नुकसान अडानी को झेलना पड़ रहा है. पिछले तीन दिनों की बात करें तो अडानी ग्रुप को तकरीबन 80 हजार करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है.
 
 
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद से लगातार अडानी के शेयरों में गिरावट देखने को मिल रही है. हालांकि बीच-बीच में उनके शेयर काफी उठे लेकिन इस बीच उनकी कंपनियों के शेयरों में गिरावट जारी रही. लेकिन पिछले तीन दिन में 80 हजार करोड़ से ज्यादा का अडानी ग्रुप को नुकसान हुआ है. ये गिरावट उस रिपोर्ट के बाद आई, जिसमें दावा किया गया है कि अडानी ग्रुप ने बैंकों को 2.15 अरब डॉलर का पूरा निवेश नहीं किया है. इसके बाद अडानी ग्रुप ने इसका स्पष्टीकरण दिया है और कहा कि वो अपने तिमाही नतीजों में शेयरों के बारे में जानकारी देंगे. रिपोर्ट पूरी तरह से गलत और ग्रुप को बदनाम करने वाली है.
 
द केन रिपोर्ट ने खड़ा किया बवंडर !
दरअसल इंडियन बेस्ड बिजनेस आर्गनाइजेशन द केन की एक रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि क्या अडानी ग्रुप ने वाकई 2.15 बिलियन डॉलर का कर्ज चुकाया है? रिपोर्ट में दावा किया कि ग्रुप ने लेंडर्स की कार्रवाई से बचने और अपने लोन अमाउंट को कम करने के लिए पार्शियल पेमेंट किया है. रिपोर्ट में आरोप है कि अडानी ग्रुप की प्री पेमेंट अनाउंसमेंट के बाद, बैंकों ने केवल अडानी पोर्ट्स के गिरवी रखे शेयरों को रिलीज किया है.

 
अडानी ग्रुप ने रिपोर्ट का किया खंडन
हालांकि ग्रुप ने इस रिपोर्ट का खंडन करते हुए कहा कि अडानी ग्रुप ने 2.15 बिलियन अमरीकी डॉलर के कंप्लीट प्री पेमेंट किया है और गिरवी रखे सभी शेयरों को रिलीज किया गया है. अडानी Enterprises के शेयर 7 फीसदी की गिरावट के साथ मंगलवार को 1,603 रुपये पर बंद हुए. हालांकि बुधवार को 1700 रुपये तक पहुंच गया. अडानी पोर्ट 5.2 फीसदी की गिरावट के साथ मंगलवार को 596.4 रुपये पर पर बंद हुआ. जिसके बाद बुधवार को मार्केट खुलते ही 622.20 रुपये पर पहुंच गया. एसीसी, अंबुजा सीमेंट्स और एनडीटीवी प्रत्येक में 4 फीसदी की गिरावट देखने को मिली. अडानी पॉवर, अडानी ट्रांसमिशन, अडानी ग्रीन, अडानी विल्मर और अडानी टोटल गैस में 5 फीसदी का लोअर सर्किट लगा.

लोन चुकाने को लेकर बढ़ा संकट !
इस वजह से ही ग्रुप को मार्केट कैप में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. इस बीच आई एक और खबर ने अडानी की टेंशन को बढ़ा दिया है. दरअसल अडानी ग्रुप स्विट्जरलैंड की होल्सिम समूह से अपनी सीमेंट संपत्तियों-एसीसी और अंबुजा सीमेंट्स के अधिग्रहण से जुड़ी शर्तों पर फिर से बातचीत करना चाहता है. ये बातचीत 4 बिलियन डॉलर के बकाए लोन की शर्तों पर हो सकती है. पिछले साल ही सेंकड टर्म में अडानी ग्रुप ने होल्सिम के भारत के सीमेंट कारोबार का अधिग्रहण किया था.
 
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है अडानी समूह ने लेंडर्स के साथ बातचीत शुरू कर दी है ताकि 3 बिलियन डॉलर के कर्ज के लिए मौजूदा 18 महीनों की अवधि का विस्तार हो सके. अडानी समूह इसके लिए पांच साल या उससे ज्यादा के समय की मांग कर रहा है पूरी बात को अगर समझा जाए तो हिंडनबर्ग रिपोर्ट जारी होने के बाद से अडानी ग्रुप को मार्केट कैप में करीब 10.31 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है.जिसके बाद से अडानी की मुश्किलें कम नहीं हो पा रही है. एक ओर राहुल गांधी अडानी को लेकर लगातार सवाल पूछ रहे है. तो अब दूसरी ओर अडानी जी के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है. 
कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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