2024 Lok Sabha Elections: यूपी में बीजेपी से आगे समाजवादी पार्टी की तैयारी!

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2024 लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर हर पार्टी अब मिशन मोड में लग गई है। साथ ही मौजूदा हालात को देखते हुए ये भी लग रहा है कि यूपी में बीजेपी और सपा के बीच कड़ा मुकाबला हो सकता है। पिछले विधानसभा चुनाव में बीएसपी का रिकॉर्ड देखे और 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का रिकॉर्ड देखे तो ये बात पुख्ता होती है। इन दोनों चुनावों की हार से सबक लेते हुए अखिलेश यादव इस बार काफी सतर्क दिख रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि अखिलेश ने 50 सीटें ऐसी चुनी हैं, जहां सपा हर हाल में लड़ेगी और इनमें से करीब 10 से 12 नेताओं को चुनाव लड़ने का इशारा भी मिल चुका है। 

असल में पिछले दिनों पटना में विपक्षी दलों की एक बैठक हुई, इसमें नीतीश कुमार और ममता बनर्जी ने एक के खिलाफ एक यानी वन अगेंस्ट वन का मंत्र दिया, जिसका मतलब है कि किसी भी सीट पर बीजेपी या एनडीए के उम्मीदवार के खिलाफ विपक्षी दलों का एक ही उम्मीदवार होना चाहिए, चाहे वो कोई भी हो। इस पर अमल करते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गठबंधन को लेकर एक बात तो तय कर ली है कि इस बार 80 लोकसभा सीटों में से किसी पर भी फ्रेंडली मैच नहीं होगा। ऐसा नहीं होगा कि एक सीट पर सपा भी लड़े और कांग्रेस भी लड़े। जो भी लड़े, एक ही पार्टी लड़ेगी ताकि किसी भी कीमत पर वोटों का बंटवारा न हो। इसीलिए इन दिनों अखिलेश एक-एक लोकसभा सीट के लिए उस क्षेत्र के नेताओं और प्रमुख कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं और उनसे सीट के मूड, माहौल और उम्मीदवार पर चर्चा कर रहे हैं।

कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए तैयार अखिलेश!

नेताओं की मानें तो अखिलेश, कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए तैयार हैं, जबकि कुछ समय पहले तक अखिलेश, कांग्रेस और बीजेपी को एक ही सिक्के के दो पहलू बताते थे। यहां तक कहा गया कि इस बार सपा अमेठी सीट पर भी उम्मीदवार उतारेगी, लेकिन कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस की जीत ने माहौल बदलकर रख दिया है। बीजेपी विरोधी पार्टियों को लगता है कि मुसलमान कांग्रेस की ओर लौट रहे हैं। ऐसे में उन्हें बीजेपी को हराने के लिए मुस्लिम वोटों का बंटवारा रोकना है तो उन्हें कांग्रेस से हाथ मिलाना होगा। क्योंकि सूबे के रामपुर, श्रावस्ती, सुल्तानपुर, मुरादाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, अमरोहा, मऊ, बिजनौर, बरेली, अलीगढ़ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश की कई ऐसी सीटें हैं, जहां चुनावी नतीजों पर मुस्लिम वोट प्रभाव डालते हैं। यूपी में पहले से ही एसपी और आरएलडी का गठबंधन है, जिसके नेता जयंत चौधरी भी कांग्रेस के साथ मिलाकर चुनाव लड़ना चाहते हैं।

आजमगढ़ लोकसभा सीट से कौन लड़ेगा चुनाव?

सूत्रों का कहना है कि अखिलेश यादव ने यूपी की 80 में से 50 ऐसी लोकसभा सीटें चुनी हैं, जिन पर किसी किंतु-परंतु के गठबंधन के बावजूद सपा चुनाव लड़ेगी। इनमें से कई सीटों पर तो अखिलेश ने उम्मीदवार का नाम भी फाइनल कर लिया है और कुछ सीटों पर संभावित उम्मीदवार को मैदान में उतरने का इशारा भी दे दिया है। आजमगढ़ लोकसभा सीट से अखिलेश एक बार फिर मैदान में उतरेंगे या अपने चाचा शिवपाल यादव को लड़ाएंगे ये सवाल अब गर्माने लगा है। 

2019 में गठबंधन से SP को कम BSP को हुआ ज्यादा फायदा

पिछले लोकसभा चुनाव में गठबंधन की किस तरह से हवा निकल गई थी। तो 2019 में सपा-बसपा-आरएलडी गठबंधन में मायावती की पार्टी ने 38 सीटोें पर चुनाव लड़कर 19.43 प्रतिशत वोटों के साथ 10 सीटें जीतीं, जबकि अखिलेश की पार्टी 37 सीटों पर चुनाव लड़कर 18.11 प्रतिशत वोटों के साथ केवल 5 सीटें ही जीत सकी, इतनी ही सीटें उसने 2014 के चुनाव में भी जीती थीं, जबकि जयंत की पार्टी 3 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और आरएलडी कोई भी सीट नहीं जीत सकी। हालांकि गठबंधन ने कांग्रेस के लिए रायबरेली और अमेठी सीटें छोड़ी थीं और कांग्रेस अमेठी हार गई। इतना मजबूत गठबंधन जिसमें यूपी की दो बड़ी पार्टियां शामिल थीं, 2019 के चुनाव में सिर्फ 39 फीसदी वोट ही हासिल कर सकीं, जबकि बीजेपी को 51 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे। कुल मिलाकर गठबंधन से सपा को कम और बसपा को ज्यादा फायदा हुआ। वैसे, 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को सीट भले ही एक मिली हो लेकिन वोट 6 परसेंट मिले थे।

यूपी में मायावती किस पार्टी से करेंगी गठबंधन?

बसपा खेमे में कांग्रेस से गठबंधन की बात भी उठ रही है। कांग्रेस के कई नेता भी सपा की बजाय बसपा से गठबंधन चाहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि सपा के वोट ठीक से ट्रांसफर नहीं होते जबकि मायावती सारे वोट ट्रांसफर करा देती हैं, लेकिन नीतीश की विपक्षी एकता की ट्रेन का मायावती को टिकट नहीं मिला, जबकि अखिलेश यादव उसमें सवार हो गए हैं। कांग्रेस ट्रेन का इंजन है, इसलिए अखिलेश अब कांग्रेस के साथ गठबंधन करते दिख रहे हैं। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि क्या मायावती इसमें शामिल होंगी या नहीं। वहीं, सपा के साथ गठबंधन में कांग्रेस कोई फॉर्मूला लगाए तो चार सीट के बाद दावा कमजोर होने लगता है, लेकिन चार सीट पर गठबंधन होगा नहीं। माना जा रहा है कि कांग्रेस 15 सीट पर दावा कर सकती है जिसमें अखिलेश 15 दें या 10, ये समय बताएगा। 

 

हालांकि इसी पूरी कवायद के बीच यूपी में गठबंधन को एक नहीं बल्कि कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी का चेहरा तो मोदी होंगे, लेकिन योगी फैक्टर से भी पार पाना होगा, जिसका असर 2019 के चुनाव में दिखा था।  

 

 

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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